Poem (कविता)

कट्टर हिन्दू कविता – Kattar Hindu Poem in Hindi Language – Hindutva Kavita & Poetry

कट्टर हिन्दू कविता
Written by admin

आजकल हिन्दुओ की ताक़त कट्टर हिन्दू के नाम से ही जाती है जिंदु धर्म के लोगो को मोटीवेट करने के लिए उन्हें कट्टर हिन्दू बोला जाता है जिसके लिए कई हिन्दू कवियों द्वारा कट्टर हिंदुत्व के ऊपर कई बेहतरीन कविताये लिखी है अगर आप उन कविताओं के बारे में जानना चाहे तो इसके बारे में जानकारी आप इस पोस्ट द्वारा जान सकते है तथा उसे फेसबुक व व्हाट्सएप्प पर शेयर भी कर सकते है |

Kattar Hindu Kavita in Hindi

हमारे पास बचाने को कुछ नहीं था
न हौसले, न हक़, न हथियार
हम किस के लिए मुगलों से लड़ते
हम शूद्र थे और हिन्दू होने के बावजूद
इस विपरीत समय में भी
एक कट्टर हिन्दू फ़रमान के शिकार थे
एक ऐसा फ़रमान जिसके चलते
हमारे गाँवों से गुज़रतीं मुगल फौजों के
हमारे गाँवों के कुओं से पानी पीते ही
हम मुसलमान हो जाते
पता नहीं तब हमारे गाँवों से गुज़रतीं
मुगल फौजें, हमें मुसलमान बनाना,
चाहती भी थीं या नहीं
मगर इतना तय था
कि फ़रमान जारी करने वाले ज़रूर
छुटकारा पाना चाहते थे हमसे
यदि फ़रमानी ऐसा नहीं चाहते होते
तो वे कभी जारी नहीं करते ऐसा फ़रमान
और मुगलों के हमारे गाँवों के कुओं से
पानी पीकर गुज़र जाने के बाद अपने बीच
हमारे वापस लौटने के रास्ते रखते खुले
अब आप ही बताएँ
तब सैकड़ों गाँवों में बसे हमें
मुसलमान बनाने वाला कौन था
कोई कट्टर मुसलमान
या कट्टर हिन्दू फ़रमान

ओ हिन्दू जाग!क्योंकि सभी को जगाना है!
पहले खुद को जान जो सबको बतलाना है!
शिराओ में बहता खून जैसे पानी हो गया है,
रबड़ और नालियों में बहने का नाम ही जवानी हो गया है,
हुंकार भरने का विचार अब आसमानी हो गया है,
मन की मानना ही बस अब मनमानी हो गया है!
पुराना इतिहास तो कहानी हो गया है,अब नया बनाना है!
जमीर मर गया है या सो रहा है ये सोचना पड़ेगा,
क्या करना है और क्या हो रहा है सोचना पड़ेगा,
सही भी है या नहीं जो हो रहा है सोचना पड़ेगा,
क्या पाने के लिए क्या खो रहा है सोचना पड़ेगा!
कैसे जीना है सोचना पड़ेगा,नहीं तो मर जाना है!
कल नहीं सोचा था तो आज मजबूर है हम,
जो चल पड़े तो भला मंजिल से कब दूर है हम,
पुष्प कि ज्यूँ कोमल तो यम की तरह क्रूर है हम,
मृत्य के सम्मुख भी सीना तान ले जो वो ही शूर है हम!
खाली दंभ में नहीं चूर है हम,ये भी तो दिखाना है!
जय हिन्द,जय श्री राम!

Kattar Hindu Poem in Hindi

हिंदुत्व की ललकार

इस रागनी को कट्टर हिन्दू ही सुने :

जाग उठो अब तो वीरो,
भारत मां तुम्हें पुकारती।
उठो क्षत्र-रक्षक की जननी,
लिए थाल में आरती।
करो तिलक पुत्रों का अपने
संकट है निज आन पर।
भरो वीरता उनमें इतनी
मिट जायें वे शान पर।
चढ़ जायें बलिवेदी पर
भारत हित रख कर ध्यान में।
शिरोच्छेद से पूर्व न जायें
कभी कटारें म्यान में।
भरो जोश ऐसा, जैसा भरता
अर्जुन का सारथी।
जाग उठो अब तो
वीरो…………………….
जग को दुष्ट बिहीन बना दो
तलवारों की धार से।
रक्तिम नदी बहे धरती पर
बर्छी और कटार से।
कोलाहल मच जाये जग में
महादेव हुंकार से।
पट जाये सारी ही पृथ्वी
वीरों की पुकार से।
हो जायें हम एक सभी, हो
नाम सभी का भारती।
जाग उठो अब तो
वीरो…………………….
खाते हैं वे भारत मां का
गीत पाक के गाते हैं।
उसकी शह पर ही ये दानव
उग्रवाद फैलाते हैं।
हम नहीं भूले सन् सैंतालिस
भारत मां को तोड़ दिया।
हर हिन्दुस्थानी मन का
विश्वास घड़ा ये फोड़ दिया।
लेकिन दुष्टो यह याद रखो,
तब की कुछ नीति उदार थी।
जाग उठो अब तो
वीरो……………………………
एक नये भारत का सपना
भारतीय के मन में हो।
नहीं वक्त ज्यादा लगना
तब हिन्दुस्थान अमन में हो।
अरबों, मुगलों, अग्रेंजों ने
भारत मां को लूटा है।
कई बार हिन्दू का रक्षक
सोमनाथ भी टूटा है।
बदला लो हर एक घाव का
मातृभूमि चिंघारती।
जाग उठो अब तो
वीरो…………………..
बचे न डायन कहने वाला
भारत मां को देश में।
खुलेआम ना घूमे कोई
आतंकी के वेश में।
आतंकी टोली का मित्रो
कहीं न नाम-निशान हो।
द्रोही ध्वज ना दिखें कहीं भी
भगवा ध्वज की शान हो।
घण्टे और घडि़याल बजें हो हर
मन्दिर में आरती।
जाग उठो अब तो वीरो
भारत माँ तुम्हें पुकारती.

Kattar Hindu Poetry in Hindi

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भारत की बर्बादी का वो , खुलेआम आयोजन था ,”
“जिसे कन्हैया समझे थे वो , कलयुग का दुर्योधन था……..”
“ये यूनीवर्सिटी ज़हर की , खेती करने वाली है ,”
“नौजवान पीढ़ी के मन में , नफरत भरने वाली है……..”
“यहाँ किताबों पर मदिरा के , अर्घ चढ़ाये जाते हैं ,”
देश-धर्म से गद्दारी के , पाठ पढ़ाये जाते हैं……..”
“ब्रेनवाश की मुहिम छिड़ी है , इस परिसर में सालों से ,”
“प्रोफ़ेसर के पद भी देखो , भरे पड़े चण्डालों से……..”
“काश्मीर को आज़ादी दो , बोध कराया जाता है ,”
“भारत के टुकड़े करने पर , शोध कराया जाता है……..”
“महिषासुर को दुर्गा वध , के कोर्स कराये जाते हैं ,”
“और कन्हैया चीर हरण में , फेलोशिप ले आते है……..”
“लाल , जवाहर की छाती पर , ये अफीम की फसलें हैं ,”
“और कलंकित वामपंथ की , ये नाजायज नस्लें हैं………”
“बोल कन्हैया तुझको कितनी , और अधिक आज़ादी दें ,”
“संविधान को आग लगा दें , भारत को बर्बादी दें…….”
“हवस भरे हाथों में , आज़ादी को खूब उछाला है ,”
“तुमने मिलकर आज़ादी का , गैंगरेप कर डाला है……..”
“आग लगे उस आज़ादी को , जो भारत से बैर करे ,”
“नक्सलियों को नायक माने , आतंकी की खैर करे……..”
“आग लगे उस आज़ादी में , जो दुश्मन को ताली दे ,”
“खुलेआम जो भी भारत की , सेनाओं को गाली दे……..”
“ये हर भारतभक्त कहे , अब धैर्य टूटने वाला है ,”
“गद्दारी से भरा हुआ अब , घड़ा फूटने वाला है……..”
“जिस दिन सेना सनक गयी , हर भूत उतारा जाएगा ,”
“तू भी शायद सेना के , हाथों से मारा जाएगा………”
“भारत का कानून अगर , गद्दारों को सहलायेगा ,”
“भारत माँ का बच्चा-बच्चा , ऊधम सिंह बन जाएगा……..”
“भारत माँ का और अधिक , अपमान नही सह पाएगी ,”
“अब सच्चा इंसाफ यहाँ पर , भीड़ सुनाने आएगी……..”
“वो कान्हा है या कासिम है , रहम नही दिखलाएगी ,”
“जो भारत को गाली देगा , भीड़ उसे खा जायेगी…….”
जय हिन्द जय भारत
जय माँ भारती
“अगर उन्हें भगत सिंह दिखता है , एक नामर्द कन्हैया में ,”
“तो हमको एक वैश्या दिखती , उनकी इटली वाली मैय्या में…….”
“जब वन्देमातरम का उदघोष , भगत सिंह के होठों पर था ,”
“तब तेरी पार्टी का ही वो चाचा , मुन्नी बाई के कोठों पर था……..”
“तूने बिस्मिल को मरवाया , चन्द्रशेखर भी चला गया ,”
“धोती और चरखे के कारण , भारत वर्षो तक छला गया……..”
“JNU के गद्दारों में , भले तुम्हे दामाद दिखे ,”
“पर सच्चे हिन्दू के सपनों में , बस शेखर , भगत और सुभाष दिखे…

Kattar Hindu Kavita in Hindi

यह सत्य-सनातन-धर्म-रीति, वैखरी-वाक् वर्णनातीत
विधि के हाँथों में पली-बढ़ी, विस्तारित इसकी राजनीति
इसके ही पूर्वज सूर्य-चन्द्र-नक्षत्र-लोक-पृथ्वीमाता
इसकी रक्षा हित बार-बार नारायण नर बन कर आता
कितना उज्ज्वल इतिहास तुम्हारा बात न यह बिसराओ ।।
हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।
हिन्दू समाज ने गुरु बनकर फैलाया जग में उजियारा
निष्‍कारण किया न रक्तपात पर दुश्‍मन दौड़ाकर मारा
मानव को पशु से अलग बना इसने मर्यादा में ढाला
इतिहास गढ़ा सुन्दर, रच डाली पावन वेद-ग्रन्थमाला
पाणिनि बनकर व्याकरण दिया, चाणक्यनीति भी समझाया
बन कालिदास, भवभूति, भास साहित्य-मूल्य भी बतलाया
जीवन के उच्चादर्शों का अब फिर से ज्ञान कराओ ।।
हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।
हिन्दू ने इस समाज को जाने कितने सुन्दर रत्न दिये
पर हा ! कृतघ्न संसार ! नष्‍ट हो हिन्दू सतत प्रयत्न किये
मासूम रहा हिन्दू समाज कसते इन छद्म शिकंजों से
कर सका नहीं अपनी रक्षा घर में बैठे जयचन्दों से
हिन्दू ने जब हिन्दू के ही घर को तोड़ा भ्रम में आकर
मुगलांग्लों ने सत्ता छीनी हमको आपस में लड़वाकर
घर के भेदी इन जयचन्दों को अब यमपुर पहुँचाओ ।।
हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।
काँपती धरा-दिग्पाल-गगन जब हिन्दू शस्त्र उठाता है
पार्थिव जीवों की क्या बिसात यम भी चीत्कार मचाता है
शड्.कर प्रलयंकर प्रलयदृष्टि सम हिन्दू तेज तप्त ज्चाला
जिसने असंख्य अत्याचारी अरि अगणित बार जला डाला
पर आज विवश हिन्दू समाज क्यूँ मुट्ठी भर हैवानों से
अपनी महिमा पहचान उठें, तलवार निकालें म्यानों से
“आनन्द” आज तुम इनके मानस को झकझोर जगाओ ।।
हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।
जेहाद नाम पर आज राक्षसों ने आतंक मचाया है
कुत्सित-मानस नेताओं ने उनका ही साथ निभाया है
निरपेक्ष-धर्म हो हिन्दु भ्रान्तियाँ ऐसी ये फैलाते हैं
भोले हिन्दू इसमें फँसकर अपनों से वैर मचाते हैं
पर नहीं फंसेगा अब हिन्दू इनके इन नीच बहानों से
हो सावधान ! मुगलांग्ल भीरु ! हिन्दू के तीर कमानों से
या फिरसे कृष्‍ण कह उठेंगे, भारत ! गाण्डीव उठाओ ।।
हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।

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