कैफी आज़मी की शायरी

कैफी आज़मी की शायरी – कैफी आजमी के शेर, पोएट्री व गजलें – Kaifi Azmi Two Line Shayari in Hindi Font

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कैफ़ी आज़मी उर्दू के महान शायरों में से एक शायर थे इन्होने हिंदी फिल्म में कई गीत लिख कर भी फ़िल्मी जगत में अपना नाम बनाया | इनका जन्म 14 जनवरी 1919 में उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुआ था इनकी रचनाओं के लिए भारत सरकार ने इन्हे कई तरह के साहित्यिक पुरूस्कार से सम्मानित भी किया इसके अलावा इन्हे फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है व 1974 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया | इसीलिए हम आपको इनके द्वारा लिखी गयी कुछ बेहतरीन रचनाओं में से शायरियो के बारे में बताते है जो की आपके लिए काफी महत्वपूर्ण है |

Kaifi Azmi Shayari in Hindi – कैफ़ी आज़मी शायरी

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जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

वक्त ने किया क्या हंसी सितम
तुम रहे न तुम, हम रहे न हम

बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में
कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में

Kaifi Azmi ki Shayari in Hindi – कैफ़ी आज़मी शायरी इन हिंदी

मैं ढूंढता हूँ जिसे वह जहाँ नहीं मिलता
नई ज़मीं नया आसमां नहीं मिलता

बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए
इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए

बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें
मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले

कैफी आज़मी शायरी

Kaifi Azmi Shayari Lyrics

मुद्दत के बाद उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े

क्या जाने किसी की प्यास बुझाने किधर गयीं
उस सर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गयीं

गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो
डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ

Kaifi Azmi Sher o Shayari – Kaifi Azmi Sher in Hindi

जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ
यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता

रहें न रिंद ये वाइज़ के बस की बात नहीं
तमाम शहर है दो चार दस की बात नहीं

कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले
उस इंक़लाब का जो आज तक उधार सा है

कैफी आजमी के शेर

कैफ़ी आज़मी की गजलें

इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी
जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में

मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई

बस्ती में अपने हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए
इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए

Kaifi Azmi Best Shayari – कैफ़ी आज़मी पोएट्री इन हिंदी

रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं

मुद्दत के बा’द उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े

पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था
जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा

Kaifi Azmi Two Line Shayari

Shayari of Kaifi Azmi – Kaifi Azmi Sad Shayari

अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ
वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गईं

इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े

झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं

Kaifi Azmi 2 Line Shayari

ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बाद

बहार आए तो मेरा सलाम कह देना
मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने

बरस पड़ी थी जो रुख़ से नक़ाब उठाने में
वो चाँदनी है अभी तक मेरे ग़रीब-ख़ाने में

इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद

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