Papmochani Ekadashi Vrat Katha in Hindi

पापमोचनी एकादशी 2018 – Papmochani Ekadashi Vrat Katha in Hindi, Story, Puja Vidhi, Significance

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पापमोचनी एकादशी व्रत कथा : भारत देश त्योहारों का देश है इस देश में कई तरह के त्यौहार मनाये जाते है जिसमे हर व्यक्ति अपनी श्रद्धा के अनुसार अलग-2 भगवान की उपासना करता है | उसी तरह से हिन्दू धर्म में प्रत्येक साल २४ एकादशियाँ पड़ती है एकादशी के व्रत का अपना अलग महत्व होता है इसीलिए हम आपको पापमोचनी एकादशी के व्रत के बारे में बताते है की यह व्रत क्यों रखा जाता है ? इस व्रत की क्या कथा है ? व्रत का महत्व ? पूजन-विधि इसके बारे में पूरी जानकारी के लिए आप यहाँ से जानकारी पाए |

Papmochani Ekadashi 2018 in Hindi

एकादशी व्रत की सूची – एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य के सभी पापो का नाश हो जाता है इसीलिए पापमोचनी एकादशी के व्रत हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होता है और उसे रखने से उसके सभी तरह के पापो की समाप्ति हो जाती है | यह व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन पड़ता है द्रिकपंचांग के अनुसार साल 2018 में पापमोचनी एकादशी का व्रत मंगलवार के दिन 13 मार्च को रखे जाने का प्रावधान है |

पापमोचनी एकादशी व्रत विधि

  • इस दिन आप सबसे पहले सुबह उठकर पवित्र नदी में स्नान करके व्रत का संकल्प ले |
  • उसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करे, उनके ऊपर धूप, दीप, चंदन और फल चढ़ाये तथा उनका स्मरण करके विधिपूर्वक उनकी पूजा करे |
  • इस दिन आपको केवल फलाहारी करनी चाहिए किसी और तरह का कोई भी भोजन नहीं करना चाहिए |
    उसके बाद रात्रि में जागकर जागरण किया जाना चाहिए |
  • आपको ब्राह्मणो को भोजन करवाना चाहिए व इस दिन दान में देना शुभ माना जाता है इसीलिए आप श्रद्धानुसार भिखारियों को भिक्षा दे सकते है |
  • उसके बाद ब्राह्मणो को भोजन करने के पश्चात् खुद भोजन ग्रहण करना चाहिए |

पापमोचनी एकादशी 2018

Papmochani Ekadashi Story – Papmochani Ekadashi Mahatmya

Papmochani Ekadashi Vrat Katha – प्राचीन काल के समय में चित्ररथ नाम का एक वन हुआ करता था वहां पर सभी देवी-देवता विहार करते थे और उसी वन में मेधावी नाम का एक ऋषि था जो कि महान ज्ञानी था वह वहां तप किया करता था | एक बार वह ऋषि वहां पर भगवान शिव की तपस्या कर रहा था तभी कामदेव ने मेधावी ऋषि की तपस्या को भंग करने के लिए मंजुघोषा नाम की एक अप्सरा को भेजा | उस अप्सरा ने अपनी अदाओं से उस ऋषि को अपने वश में किया जिससे कि वह ऋषि अप्सरा पर मोहित हो गए इस तरह से कई साल बीत गए |

कई सालों बाद उस अप्सरा ने ऋषि से देवलोक जाने की अनुमति मांगी तब उनका मोह टूटा तब उन्होंने ज्ञात हुआ कि वह तो भगवान शिव की तपस्या में लीन थी और इस अप्सरा की वजह से उन्हें अपनी तपस्या को तोड़ना पड़ा | जिस वजह से उन्होंने मंजुघोषा को श्राप दिया कि वह एक पिशाचिनी बनेगी तब यह सुनकर वह अप्सरा डर गई और उसने उस ऋषि से क्षमा मांगी |

Ppmochani Ekadashi Significance – महत्व

उस अप्सरा ने अपने इस पाप से बचने के लिए उपाय जानने की चेष्टा की तभी मेधावी ऋषि ने उसे बताया कि वह चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पढ़ने वाली पापमोचनी एकादशी का व्रत रखें इस व्रत को रखने से तुम्हारे सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं उस मंजुघोषा नाम अप्सरा ने ऐसा ही किया जिससे कि उसका वह पाप नष्ट हो गया |अतः इस व्रत को कोई भी व्यक्ति पुरे भक्तिभाव से रखता है तो उसके सभी तरह के पापो का नाश हो जाता है |

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