बेटी पर कविता – बेटी पर मार्मिक कविता – बेटी के जन्म तथा महत्व पर छोटी कविताएँ – Daughter Poem in Hindi

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हमारी भारत सरकार ने देश की लड़कियों को महत्व अधिक दिया जिस कारणवश लड़कियों के लिए कई प्रकार की योजनाए भी बनायीं है जिसमे की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भी एक योजना है जिसके अंतर्गत देश की बेटियों को पढाई के लिए प्रोत्साहित किया गया है | इसीलिए हम आपको बेटियों के ऊपर कुछ बेहतरीन कविताओं के बारे में बताते है जो की आपके लिए काफी बेहतरीन है जिन्हे आप अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है |

Poem on Daughter in Hindi Language – Beti Par Kavita in Hindi

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बिन बेटी ये मन बेकल है, बेटी है तो ही कल है,
बेटी से संसार सुनहरा, बिन बेटी क्या पाओगे?
बेटी नयनों की ज्योति है, सपनों की अंतरज्योति है,
शक्तिस्वरूपा बिन किस देहरी-द्वारे दीप जलाओगे?
शांति-क्रांति-समृद्धि-वृद्धि-श्री सिद्धि सभी कुछ है उनसे,उनसे नजर चुराओगे तो किसका मान बढ़ाओगे ?
सहगल-रफ़ी-किशोर-मुकेश और मन्ना दा के दीवानों!
बेटी नहीं बचाओगे तो लता कहां से लाओगे ?
सारे खान, जॉन, बच्चन द्वय रजनीकांत, ऋतिक, रनबीर
रानी, सोनाक्षी, विद्या, ऐश्वर्या कहां से लाओगे ?
अब भी जागो, सुर में रागो, भारत मां की संतानों!
बिन बेटी के, बेटे वालों, किससे ब्याह रचाओगे?
बहन न होगी, तिलक न होगा, किसके वीर कहलाओगे?
सिर आंचल की छांह न होगी, मां का दूध लजाओगे।

Daughter Day Poem in Hindi – बेटी दिवस पर कविता

क्या हूँ मैं, कौन हूँ मैं, यही सवाल करती हूँ मैं,
लड़की हो, लाचार, मजबूर, बेचारी हो, यही जवाब सुनती हूँ मैं।।
बड़ी हुई, जब समाज की रस्मों को पहचाना,
अपने ही सवाल का जवाब, तब मैंने खुद में ही पाया,
लाचार नही, मजबूर नहीं मैं, एक धधकती चिंगारी हूँ,
छेड़ों मत जल जाओगें, दुर्गा और काली हूँ मैं,
परिवार का सम्मान, माँ-बाप का अभिमान हूँ मैं,
औरत के सब रुपों में सबसे प्यारा रुप हूँ मैं,
जिसकों माँ ने बड़े प्यार से हैं पाला,
उस माँ की बेटी हूँ मैं, उस माँ की बेटी हूँ मैं।।
सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक बीज हूँ मैं,
नये-नये रिश्तों को बनाने वाली रीत हूँ मैं,
रिश्तों को प्यार में बांधने वाली डोर हूँ मैं,
जिसकों को हर मुश्किल में संभाला,
उस पिता की बेटी हूँ मैं, उस पिता की बेटी हूँ मैं।।

Short Poem on Daughter in Hindi – बेटी पर छोटी कविता

राह देखता तेरी बेटी, जल्दी से तू आना,
किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना,
ना चाहूं मैं धन और वैभव, बस चाहूं मैं तुझको
तू ही लक्ष्मी, तू ही शारदा, मिल जाएगी मुझको,
सारी दुनिया है एक गुलशन, तू इसको महकाना
किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना,
बन कर रहना तू गुड़िया सी, थोड़ा सा इठलाना,
ठुमक-ठुमक कर चलना घर में, पैंजनिया खनकाना
चेहरा देख के तू शीशे में, कभी-कभी शरमाना
किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना
उंगली पकड कर चलना मेरी, कांधे पर चढ़ जाना
आंचल में छुप जाना मां के, उसका दिल बहलाना
जनम-जनम से रही ये इच्छा, बेटी तुझको पाना

बेटी पर मार्मिक कविता

Daughter Wedding Poem in Hindi – बेटी की शादी पर कविता

भारत की है शान बेटियां
हमसब का अभिमान बेटियां
सीता सावित्री अनुसूया बन त्‍याग की मूरत कहलाई
शौर्य का प्रचंड ज्‍वाल बनी झांसी की रानी लक्ष्‍मीबाई
पन्‍ना का बलिदान पदमनी की जौहर ज्‍वाला
मीरां की अमर भक्ति, पी गई विष का प्‍याला
स्‍वर्णिम इतिहास लिए, देश का गौरव गान बेटियां
भारत की है शान बेटियां, हमसब का अभिमान बेटियां
लता आशा अनुराधा, स्‍वर सरिता बहाती है
कविता अलका सुनिधि श्रेया, गीत जीवन के गाती है
अं‍तरिक्ष यात्री बनी सुनिता, कल्‍पना इस व्‍योम में रमी है
हर क्षेत्र में परचम इनका, बेटियां कहां थमी है
बेटियों ने छू लिया आकाश, छेडती मधुर तान बेटियां
भारत की है शान बेटियां, हमसब का अभिमान बेटियां
सावित्री फूले भगिनी निवेदिता, शिक्षा की अलख जगाती
मैत्रेयी गार्गी विदुषियां, ज्ञान क्षेत्र में लोहा मनवाती
सरोजिनी सुचेता प्रतिभा सुषमा और इन्दिरा
सोनिया जया ममता माया छाई राजनीति में वसुंधरा
नैतृत्‍व करती बेटियां, हमारा है स्‍वाभिमान बेटियां
भारत की है शान बेटियां, हमसब का अभिमान बेटियां
मेरीकॉम का पंच, कर्ण्‍णम का भार, पीटी उषा की दौड
मिताली हरप्रीत झूलन अंजुम ने क्रिकेट को दिया नया मोड
सानिया साईना सन्‍धु साक्षी बेटियों में दम है
ज्‍वाला कृष्‍णा गीता, बेटियां कहां बेटों से कम है
अब तो सम्‍भालती है ओलम्पिक में कमान बेटियां
भारत की है शान बेटियां, हमसब का अभिमान बेटियां
किरनबेदी बनी आईपीएस पुलिस फोर्स में छाई
मिताली आर्मी अफसर अंजलि ने वायुसेना में धूम मचाई
हिमालय पर तिरंगा फहराती बेटी बछेन्‍द्री पाल
बेटों से कंधे से कंधा मिला करती कदमताल
अबला नहीं सबला है, आंधी नहीं तूफान बेटियां
भारत की है शान बेटियां, हमसब का अभिमान बेटियां
आज इस गणतंत्र पर बेटी बचाने का संकल्‍प हमें लेना है
कन्‍या भ्रूण हत्‍यारों का साथ हरगिज नहीं देना है
पढे बेटियां बढे बेटियां, बेटी बची तो बचेगा देश
माता दुहिता भगिनी भार्या, बेटी से ही है सम्‍पूर्ण परिवेश
सृष्टि की रचियता बेटियां, वतन का उत्‍थान बेटियां
भारत की है शान बेटियां, हमसब का अभिमान बेटियां

Emotional Poem on Daughter in Hindi – बेटी पर मार्मिक कविता

बेटियों की बात निराली
ये तो लगतीं बहुत हैं प्यारी
कुदरत की ये सुंदर रचना
सारे घर की होती हैं दुलारी
बेटियों की बात निराली
बेटियों की बात निराली
जब इनकी मुस्कान खिले तो
लगती है खिली हो फुलवारी
कितनी चंचल कितनी नटखट
पटर – पटर सब बात बतानी
बेटियों की बात निराली
बेटियों की बात निराली
माँ की होती हैं परछाई
संभाल सकती घर की ज़िम्मेदारी
बचपन से ही आ जाती इनको
सारे जहां की समझदारी
बेटियों की बात निराली
बेटियों की बात निराली
बेटी है बेशकीमती हीरा
चमका दे घर आँगन द्वारी
जिसको बेटी धन मिल जाए
कमी नहीं कोई रह जानी

बेटी के जन्म तथा महत्व पर छोटी कविताये

Poem for Daughter in Hindi on her Birthday – बेटी के जन्मदिन पर कविता

ऐ मेरी प्यारी गुड़िया
जीवन से भरी,खुशियो की कड़ी
जब से आई तू मेरे अंगना
मेरे भाग्य खुले घर लछ्मि बसी
ऐ……
तेरे मासूम सवालो की लड़ी
तोतली जुवा से हर एक बोली
गुस्से मे कहे या रूठ कर बोली
लगती सुमधुर गीतो से भली
ऐ……….
घर लौटता शाम थक कर चूर चूर
साहब के डाट से मन मजबूर
सुन कर मेरे दो पहिए की आवाज
भागी आती तू मेरे पास
तेरी पापा पापा की पुकार
हर लेती सब कर देती नई
ऐ………
सोचता हू जब तू बड़ी होगी
तेरी शादी लगन की घड़ी होगी
कैसे तुझको बिदा दुंगा
कैसे खुद को सम्भालुंगा
सहम जाता हू निबर पाता हूं
क्यो एैसी रीत बनी जग की
ऐ…………

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविता – बेटी बचाओ पर कविता – बेटी पढ़ाओ पर कविता

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बेटी का हर रुप सुहाना, प्यार भरे हृदय का,
ना कोई ठिकाना, ना कोई ठिकाना।।
ममता का आँचल ओढे, हर रुप में पाया,
नया तराना, नया तराना।।
जीवन की हर कठिनाई को, हसते-हसते सह जाना,
सीखा है ना जाने कहाँ से उसने, अपमान के हर घूँट को,
मुस्कुराकर पीते जाना, मुस्कुराकर पीते जाना।।
क्यों न हो फिर तकलीफ भंयकर, सीखा नहीं कभी टूटकर हारना,
जमाने की जंजीरों में जकड़े हुये, सीखा है सिर्फ उसने,
आगे-आगे बढ़ते जाना, आगे-आगे बढ़ते जाना।।
बेटी का हर रुप सुहाना, प्यार भरे हृदय का,
ना कोई ठिकाना, ना कोई ठिकाना।।

बेटी का महत्व पर कविता – पिता और बेटी पर कविता

मैं तेरे घर -आँगन की शोभा
मुझसे सजता जीवन सबका,
तेरे घर की रौनक हूँ मैं
दूजे घर का मैं सम्मान कहलाती,
दो – दो घर मुझसे ही सजते
वंश को आगे मैं ही बढ़ाती।
सोचो अगर जो मैं न जन्मी
तो कैसा होगा ये जीवन ?
कहाँ से मिलेगी प्यारी बहना ?
कैसे खिलेगा नन्हा बचपन ?
कहाँ मिलेगी माँ की ममता ?
कैसे मिलेगा पत्नी का प्यार ?
जब मैं न हूंगी जीवन में तो
कैसे होगा तुम्हारा उद्धार ?
क्या खुद से जीवन पा पाओगे
बिन मेरे क्या जी पाओगे
खत्म मुझे करने से पहले
सोच लेना तुम फिर से एक बार
बिन मेरे न जीवन संभव
खत्म हो जायेगा ये संसार।
सोचो अगर जो मैं न जन्मी…….

Daughter Poem in Hindi

बेटी की विदाई पर कविता – हिन्दी कविता बेटी पर

अगर आप बेटी के जन्मदिवस या बेटी के ऊपर किसी भी तरह की कविता भाषा Hindi, English, Marathi, Gujarati, Tamil, Telugu, Malayalam, Punjabi, Kannada, Nepali, Urdu के Language Font में जानना चाहे तो यहाँ से जाने व उसकी 3D Image, HD Wallpapers, Photos, Pictures, Pics, Greetings को Facebook & WhatsApp पर शेयर भी करे :

मैं भी जीना चाहती हूँ
तेरे आँचल मे सांस लेना चाहती हूँ,
तेरी ममता की छांव मे रहना चाहती हूँ
तेरी गोद मे सोना चाहती हूँ।
मैं भी तो तेरा ही अंश हूँ,
फिर कैसे तू मुझे खुद से
अलग कर सकती है ?
तू तो माँ मेरी अपनी है
फिर क्यों….?
माना की तूने ये खुद से ना चाहा…
विवश हुई तू औरों के हाथों….
पर थोड़ी सी हिम्मत जो करती
तो शायद मैं भी जी पाती…
या फिर किया तूने ये सोच कर
कि जो कुछ सहा है तूने अब तक…..
वो सब सहना पड़े न मुझको…!
क्या बेटी होना ही कसूर है मेरा …..?
जो तू भी मुझे पराया करना चाहती है…!!
तू भी नहीं तो फिर कौन होगा मेरा अपना ?
क्यों मेरे जज्बातों को कुचल देना चाहती है ?
जीवन देने से पहले ही क्यों मार देना चाहती है ?
क्यों… मेरा कसूर क्या है ?
क्या सिर्फ एक बेटी होना ही मेरी सजा है…?
मुझको भी इस दुनिया में आने तो दो ….
कुछ करने का मौका तो दो….
जीवन की हर लड़ाई लड़ कर दिखाउंगी
खुद को साबित करके दिखाऊँगी,
मुझे एक मौका तो दो।
मैं भी जीना चाहती हूँ
तेरे आँचल मे सांस लेना चाहती हूँ,
तेरी ममता की छांव मे रहना चाहती हूँ
तेरी गोद मे सोना चाहती हूँ।

बेटी के जन्म पर कविता – माँ और बेटी पर कविता

**बिटिया**
दुनिया का भी दस्तूर है जुदा, तू ही बता ये क्या है खुदा?
लक्ष्मी-सरस्वती, हैं चाह सभी की, क्यों दुआ कहीं ना इक बेटी की ?
सब चाहे सुन्दर जीवन संगिनी, फिर क्यों बेटी से मुह फेरे ,
लक्ष्मी रूपी बिटिया को छोड़, धन-धान्य को क्यों दुनिया हेरे |
क्या बेटे ही हैं जो केवल, दुनिया में परचम लहरा पाते ,
ना होती बेटी जो इस जग में, तो लल्ला फिर तुम कहाँ से आते?
वीरता की कथा में क्यों अक्सर, बेटों की कहानी कही जाती ,
शहीदे आज़म जितनी ही वीर, क्यों झाँसी की बेटी भुलाई जाती |
बेटे की चाहत में अँधा होकर,क्यों छीने उसके जीवन की आस ,
बेटी जीवन का समापन कर, क्यों भरे बेटे के जीवन में प्रकाश |
इतिहास गवाह उस औरंज़ेब का, शाहजहाँ नज़रबंद करवाया ,
क्या भूल गया उस कल्पना को, जिसने चंदा पर परचम लहराया |
पुरुष प्रधान के इस जग में,क्यों बेटे की चाह में तू जीता ,
मत भूल ! बेटी के लिए जनने वाली से पहले, पहला प्यार होता है पिता |
सुन ले तू ऐ बेटे के लोभी, बेटी पालन तेरे बस की बात ,
खुदा भी कैसे बख़्शे तुझे बेटी, छोटी है बहोत तेरी औकात |
दुनिया का भी दस्तूर है जुदा, तू ही बता ये क्या है खुदा?
लक्ष्मी-सरस्वती, हैं चाह सभी की, क्यों दुआ कहीं ना इक बेटी की ?

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