साहस की कविता

साहस की कविता – साहसी व्यक्ति पर कविता – Sahas Par Hindi Kavita – Sahas Poem in Hindi

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किसी भी व्यक्ति को अपने गोल अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए साहस की बहुत अधिक आवश्यकता होती है जब तक उसके अंदर सहस व आत्मविश्वास नहीं होगा वह अपने उस काम को पूर्ण रूप से नहीं कर पायेगा | इसीलिए हमारे कुछ महान कवियों द्वारा सहस के ऊपर बेहतरीन कविताये बताई गयी है जो कविताये आपके लिए काफी प्रेरणादायक है इन कविताओं को पढ़ कर आप इनके बारे में काफी कुछ जानकारी पा सकते है |

हिम्मत और साहस पर कविता

अगर आप उत्साह बढ़ाने वाली कविता, प्रेरक कविताएं, आत्मविश्वास कविताएँ, हिम्मत पर कविता तथा उत्साह पर कविता के बारे में जानकारी पाना चाहे तो यहाँ से जान सकते है :

मेरा जो भी तजुर्बा है ऐ ज़िंदगी,
मै तुझे बतला जाऊँगा।
चाहे जितना करना पड़े संघर्ष,
मै कर जाऊँगा।
उम्म्मीद क्या होती है ज़माने में
ये हमसे बेहतर कोई नहीं जानता,
कभी आ मेरी चौखट पे,
ये विषय भी तुझे सिखला जाऊँगा।
मेरा जो भी तजुर्बा है ऐ ज़िन्दगी,
मैं तुझे बतला जाऊँगा।
रंग बदल के तु मेरा इम्तिहां ना ले
जीतूंगा मै ही अब हार का नाम ना ले,
सितम का ज़ादू तेरा औरों पे चल जायेगा
उठूँगा हर हाल में अब गिरने का नाम ना ले।
प्यास मेरी थोड़े की नही है जो मिट जाये,
ज़रूरत आने पर ये आसमां भी पी जाऊँगा।
मेरा जो भी तजुर्बा है ऐ ज़िन्दगी,
मैं तुझे बतला जाऊँगा।

Marathi Sahas Katha

अब जबकि एक जीवित मशीन में भरी है
सारी की सारी दुनिया
कुछ भी तो दूर नहीं है पहुँच से
विश्वव्यापी होने के सपनों को जेब में रखे
मैं अक्सर उसमें देख लेता हूँ आपको
तस्वीरों में अक्सर ढूँढता रहता हूँ
न जाने क्या क्या
दुनिया भर को प्रेम लुटाती आपकी बातें
मुस्कराहटें
सब सच लगती हैं मुझे
सच कहूँ तो मुझे आपकी मशीन वाली दुनिया
ज्यादा अपनी सी लगती है
बनिस्बत मेरी हक़ीक़त वाली दुनिया से
जिसमें
जीवन है
पत्थर की प्रतिमा पर चढ़ाये गए फूल सा
निष्प्राण … कुम्हलाया
मैं इसे “भगवान की प्रतिमा पर चढ़ाये गए फूल सा”
भी कह सकता था, …।
ये संकेत है आपके लिए
कि मैं अब उतना उदार नहीं रहा
या हो गया हूँ इतना साहसी कि कह सकूँ
पत्थर को पत्थर
दुःख को दुःख
खिलवाड़ को खिलवाड़
और प्रेम को प्रेम !

साहसी व्यक्ति पर कविता

साहस भरी कविता

काँपता रहता है खड़ा-खड़ा काफी रात
बँधा हुआ पेड़ के सहारे
पेड़ की तरह असहाय
आते हैं वनराज अलसायी चाल से
टटोलते हैं उसका धड़कता हुआ दिल
रहम की तरह टूट पड़ते हैं उस पर
छोड़ आते हैं कुछ तसवीरें
कल के अखबारों में छपने के लिए
जंगल के पत्‍ते
सिर झुकाए देखते हैं सारा तमाशा
उदास सरसराहट पर फैलती है
साहस-गाथा प्रकृति-प्रेमियों की।

Sahas Kavita in Hindi

अपने मनोबल को इतना सशक्त कर,
कठिनाई भी आने से न जाए डर।
आत्मविश्वास रहे तेरा हमसफर,
बड़े-बड़े कष्ट न डाल पाएं कोई असर।।
हौसला अपना बुलंद कर लो,
साहस व हिम्मत को संग कर लो।
निर्भय होकर आत्मविश्वास से बढ़ो,
संयम व धैर्य से सफलता की सीढ़ी चढ़ो।
जब कभी कर्तव्य के मार्ग पर,
विपत्ति व विघ्न तुम्हें सताएंगे।
जब कभी हारकर या विवश होकर,
निराशा के बादल छा जाएंगे।
हार न मानने का जज्बा तुम्हें उठाएगा,
तुम्हारा अडिग हौसला तुम्हें बढ़ाएगा।
आखिरकार देखना तुम्हारे आगे,
धरती हिल जाएगी, आसमां झुक जाएगा।
भय-विस्मय का अब अंत करो,
आते हुए दुखों को पसंद करो।
कर्म ज्यादा व बातें चंद करो,
हौसला अपना इतना बुलंद करो।
दुखों का पहाड़ टूटने पर भी,
सीना ताने खड़ा रह पाएगा।
दर्द का अंबार फूटने पर भी,
सर उठाकर सतत् चलता जाएगा।
जो अपने पक्के इरादों के आगे,
मुसीबतों के घुटने टिका जाएगा।
वही सुदृढ़ मनोबल वाला मनुष्य,
जिंदगी की यह जंग जीत पाएगा।

Sahas Par Hindi Kavita

हौसला पर कविता

बीज को धूल में मिला कर भी।
जो नहीं धूल में मिला देते।
ऊसरों में कमल खिला देना।
वे हँसी खेल हैं समझ लेते।
धज्जियाँ उड़ते दहलते जो नहीं।
सिर उतरते किस लिए वे सी करें।
तन नपाते जो सहम पाते नहीं ।
वे भला गरदन नपाते क्यों डरें।
पाजियों को गाल क्यों दें मारने।
सामने दुख फिरकियाँ फिरती रहें।
जिस तरह हो चीर देंगे गाल हम।
चिर गईं तो उँगलियाँ चिरती रहें।
वह बने आस छोड़ बेचारा।
पास जिस के रहा न चारा है।
हार हिम्मत न छोड़ देंगे हम।
नँह नहीं गिर गया हमारा है।
क्या करेगा भाग हिम्मत चाहिए।
हाथ में हित कुंजियाँ क्या हैं नहीं।
जो लकीरें हैं लकीरें भाग की।
कब न मूठी में हमारी वे रहीं।
है करमरेख मूठियों में ही।
बेहतरी बाँह के सहारे है।
कर नहीं कौन काम हम सकते।
क्या नहीं हाथ में हमारे है।
साहसी के हाथ में ही सिध्दि है।
लोटता है लाभ पाँवों के तले।
है दिलेरी खेल बायें हाथ का।
हैं खिलौने हाथ के सब हौसले।
जो रहे ताकते पराया मुँह।
तो दुखों से न किस लिए जकड़ें।
क्यों न हों पाँव पर खड़े अपने।
और का पाँव किस लिए पकड़ें।
ठोकरें मार चूर चूर करें।
पथ अगर हो पहाड़ ने घेरा।
क्यों नहीं बेडिगे भरें डग हम।
पाँव क्यों जाय डगमगा मेरा।
जम गये, छोड़ता जगह क्यों है।
क्यों नहीं गड़ पहाड़ लौं पाता।
दूसरों के उखाड़ देने से।
पाँव क्यों है उखड़ उखड़ जाता।
काँपता बात बात में है जी।
फल बुरे हैं इसी लिए चखते।
फ़ूँक से आप उड़ न जावेंगे।
पाँव क्यों फूँक फूँक हैं रखते।
जी लगा यह पाठ हम पढ़ते रहें।
कट गये हैं बाल बढ़ने के लिए।
बात यह चित से कभी उतरे नहीं।
हैं उतरते फूल चढ़ने के लिए।

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