सुप्रभात कविता

सुप्रभात कविता – सुबह की कविता – Good Morning Poems in Hindi

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सुबह का समय पुरे दिन का सबसे ज्यादा सुहाना समय होता है क्योकि सवेरे-2 हमें प्रकृति की ताज़ी-2 हवा मिलती है दिन की एक नयी किरण मिलती है इसीलिए हम अपने ज्यादातर दोस्तों, फॅमिली मेंबर्स को सुबह उठते ही गुड मॉर्निंग विश करते है | गुड मॉर्निंग विश करने के लिए आप उनसे केवल गुड मॉर्निंग बोल सकते है या कई प्रकार की शेरो शायरियां उन्हें व्हाट्सएप्प या फेसबुक पर भेज सकते है | इसके लिए कलाई स्कूल में छोटी क्लास के बच्चो जैसे कक्षा Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 7, Class 8, Class 9, Class 10, Class 11, Class 12 के लिए कविताये भी होती है अगर आप उन कविताओं को जानना चाहते है तो इसके लिए यहाँ से जानकारी पार सकते है |

सुबह की सैर पर कविता

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पीठ ओट दे पूड़ी खालो
गाड़ी के डब्‍बे में
प्‍लास्टिक की पिद्दी प्‍याली में
एक घूंट मैली-सी चाय
देहाती स्‍टेशन की
जंग लगे लोहे वाले चपटे तीरों की सरहद के पार
सुनहरी परछांही को फैलते देखो
काई भरे गंदे डबरे पर
जो जगमग अलौकिक सी दीप्ति से
चूम रहा है ईश्‍वर
खुद अपने हाथों झुलसाये पृथ्‍वी के केश
और दग्‍ध होंठ
जिनमें इच्‍छाएं स्‍मृतियों की तरह हरी हैं
और वे कड़खड़ाती एडियां कतारबद्ध
और वे क्‍लाश्निकोव वगैरह चमचम
परेड मैदान की भूरी धूल में सुबह-सुबह
और वे नंगी दुर्बल सांवली पसलियां
भयग्रस्‍त थर-थर वक्ष के तले
वह भी चमकतीं हंसुओं की तरह
देखो बेआवाज सिसकियों से हिलती दिल की बूढ़ी पीठ
दिल की आंखों से उबलते आंसू
देखो फूलता-पचकता
दिल का घबराया जर्द चेहरा
सुप्रभात, अलबेले जीवन
चलो निकल आगे की ओर
दिल को लिये मीर की ठौर !

Good Morning SMS Poems in Hindi

चारों तरफ लोग घरों में हैं अपने बिस्तर पर
सुबह की नींद से उठने की कोशिश करते हुए
हम कुछ ही लोग सुनसान सडक़ों पर सैर करते हुए
कितना अच्छा संबंध है यह, जागे और सोकर उठते लोगों का
हमारी ताजगी जरूर उन तक पहुंचती होगी
वे हमें देखते तो शायद और भी खुश होते
रास्ते के कुत्ते जमा हो रहे हैं एक साथ
अब उनमें सतर्कता कम दिखाई दे रही है
एक उम्मीद से घरों की ओर देखते हैं वे
लोग जागें तो उन्हें भी खाना-पीना मिले
धीरे-धीरे गाडिय़ों का शोर बढ़ चला है सडक़ों पर
सबसे पहले स्कूल जाने वाले बच्चे
निकलते हैं घरों से बाहर
अपनी पीठ पर भारी भरकम बैग लादे हुए
देखते- देखते बहुत सारे बच्चे
जैसे शिक्षा घुलती जा रही हो सुबह से
और सोचते हैं हम पुराने जमाने की बात
उन दिनों ठीक चार बजे सुबह हो जाया करती थी
यह शुभ समय था हमारे अध्ययन करने का।

आज की सुबह कविता

रात धीरे-धीरे दीवार फाँद गई,
चाँद मेरी छत से होकर गुज़र गया
जुगनूओं का शोकगीत अब भी जारी है।
गर्मागर्म मुद्दों की अलाव जलाकर
सर्द सुबहों में लोग अपने हाथ सेंक रहे हैं
और जो थोड़े सोए थे
सनसनीखेज़ ख़बरों की चादर ओढ़कर
अभी भी सोए हैं
और बड़बड़ा रहे हैं नींद में।
यह समय
इस युग का सबसे कठिन समय है
और यह युग,
अपनी उपेक्षा से तिलमिलाया, क्रोध से फफक रहा है।
रातभर की डरी खिड़कियाँ
अभी-भी काँप रही है किसी अजान भय से।
आदमी के लिए सबसे शर्म की बात तो यह है कि
दरवाज़े,
जो महज औपचारिकता थे कभी
आज खुलते नहीं,
बाहर का शोर सुनकर भी।

सुबह की सैर पर कविता

सुबह की चाय कविता

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हुआ सवेरा, हुआ सवेरा, सूरज की किरणों ने
डाल-डाल पर डाला घेरा,
हुआ सवेरा, हुआ सवेरा।
मन में उमंग, तन में तरंग,
जीवन ने फिर से लिया फेरा
हुआ सवेरा, हुआ सवेरा।
चल निकला, बागों में जीवन,
चल निकला, राहों में जीवन
हुआ सवेरा, हुआ सवेरा।
पक्षियों का जागा फिर कलखू,
मीठा-मीठा, मंद-मन मोहक
हुआ सवेरा, हुआ सवेरा।
कलियों का सुंदर पल्लवित जीवन,
सौरभ-सुगंध, मधुर मन मोहक
जागा फिर से सारा जन-जीवन।
हुआ सवेरा, हुआ सवेरा।

Good Morning Love Poems in Hindi

जागती नहीं सुबह सबकी तरह किसी निश्चित समय पर
जगी रहती है बैठी देखती हुई बिताती रात
सुख- दुख के अदभुत नृत्य
आलिंगन और संताप
सुनती हुई मौन के विकल आलाप
फड़फड़ाकर गिरना किसी चिड़िया का स्वप्न से बाहर
सुबक कर सोये किसी बच्चे की डूबती साँस
करती हुई नहीं मगर कोई यत्न उबारने या बचाने का किसी को
विरल निःसंगता में घटित होने देती है सब कुछ
जैसे उन्हें होना है किसी नियति के तहत
नहीं आती सुबह यूँ ही कभी औचक
वह चली रहती है रात से ही
जैसे कोई स्वप्न पिछली नीन्द से

सुप्रभात हिंदी कविता

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नयन का नयन से, नमन हो रहा है
लो उषा का आगमन हो रहा है
परत पर परत, चांदनी कट रही है
तभी तो निशा का, गमन हो रहा है
क्षितिज पर अभी भी हैं, अलसाये सपने
पलक खोल कर भी, शयन हो रहा है
झरोखों से प्राची की पहली किरण का
लहर से प्रथम आचमन हो रहा है
हैं नहला रहीं, हर कली को तुषारें
लगन पूर्व कितना जतन हो रहा है
वही शाख पर पक्षियों का है कलरव
प्रभातीसा लेकिन, सहन हो रहा है
बढ़ी जा रही जिस तरह से अरुणिमा
है लगता कहीं पर हवन हो रहा है
मधुर मुक्त आभा, सुगंधित पवन है
नये दिन का कैसा सृजन हो रहा है।

सुबह की कविता

Subah Kavita in Hindi

आँख मलते हुए जागती है सुबह
और फिर रात दिन भागती है सुबह
सूर्य के ताप को जेब में डाल कर
सात घोंडों का रथ हांकती है सुबह
रात सोई नहीं नींद आई नहीं
सारे सपनों का सच जानती है सुबह
बाघ की बतकही जुगनुओं की चमक
मर्म इतना कहाँ आकती है सुबह
आहटें शाम के रात की दस्तकें
गुड़मुड़ी दोपहर लांघती है सुबह

सुप्रभात कविता इन हिंदी

सुबह का सूरज
कितना प्यारा, कितना सुंदर
रंग-बिरंगी किरणें उसकी
रोम-रोम में बस जाती हैं
खुशबू सी महका जाती हैं
सुबह का सूरज
लेकर आता आस नई
बाहर-भीतर, रौशन-रौशन
कर जाता है तन-मन सारा
ये जीवन जो तुम्हें मिला है
इसको यूँ ही मत जाने दो
सूरज सा इसको चमका दो
फूलों सा इसको महका दो
ये ही तुमसे कहता है
जब आता है सुबह का सूरज
सुबह का सूरज
कितना प्यारा, कितना सुंदर

Good Morning Poems for Friends in Hindi

हम पड़े रहते हैं
नींद की चादर के नीचे
सुविधाओं को तह किए
और बाहर
सुबह की धूप हमारा इंतज़ार करती है
खिड़की-रोशनदानों पर दस्तक देती हुई
सब कुछ जानते-समझते हुए भी
हम बेख़बर रहते हैं
सुबह की इस धूप से
जो हर सुराख से पहुँच रही
अपनी चमकीली किरणों के साथ
अंधकार को भेदती हुई
यह उतरती है
पहाड़ की सबसे ऊँची चोटी पर
फिसलती हुई
घास पर पड़ी ओस की बूँदों में
मेतियों की तरह चमकती है
पेड़ की फुनगियों से झूला झूलती है
नहाती है समुद्र की लहरों में
चिड़ियों की तरह चहचहाती है
स्कूल के बच्चों की तरह
घर से बाहर निकलती है
कितनी नटखट है यह धूप
सुबह-ही-सुबह
हमारी नींद
हमारी दुनिया में हस्तक्षेप करती है
डायरी की तरह खोल देती है
एक पूरा सफ़ेद दिन
इसी तरह जगाती है
हम-जैसे सोये आदमी को
उसे ज़िन्दगी की मुहिम में
शामिल करती है हर रोज़ ।

Good Morning Poems in Hindi

सुप्रभात पर कविता

ताज़ा हवा से बातचीत हो सकी आज
रात की रही रंगत देखी सुबह की सड़कों पर
नदी की उनींदी और
पेड़ों की उमंग देखी आज सुबह
कल की दुनिया चलकर आई आज
वहाँ उत्सव मनाए गए थे
योजनाएँ बनी थीं और थोड़ा-बहुत
अशुभ भी घटा कुछ शहरों में
यह सुबह रद्द करती पुरानी प्रविष्टियाँ
पेश करतीं नया पृष्ठ
और उसके बाद सम्भावनाओं की
अनेक सुबहों के कोरे पन्ने
नई शुरूआत के लिए फैलाए बाँहें
आई है मुस्कुराती हुई
फिर आज की सुबह

सुबह पर कविता

सुबह-सुबह
तालाब के दो फेरे लगाए
सुबह-सुबह
रात्रि शेष की भीगी दूबों पर
नंगे पाँव चहलकदमी की
सुबह-सुबह
हाथ-पैर ठिठुरे, सुन्न हुए
माघ की कड़ी सर्दी के मारे
सुबह-सुबह
अधसूखी पतइयों का कौड़ा तापा
आम के कच्चे पत्तों का
जलता, कड़ुवा कसैला सौरभ लिया
सुबह-सुबह
गँवई अलाव के निकट
घेरे में बैठने-बतियाने का सुख लूटा
सुबह-सुबह
आंचलिक बोलियों का मिक्स्चर
कानों की इन कटोरियों में भरकर लौटा
सुबह-सुबह

Hindi Poems on Morning for Class 7

रुपहले ओस की मोतियों में,
झलकती है आसमान की लाली,
मधुर चूड़ियों की खनखनाहट भरी
स्वप्नों के बोझ से लदी रात अब जा रही है
डाल पर बैठी बुलबुल जोर से हुंकारा भारती है
‘ऐSS देखो!’
देती दिलासा वह क्रोड़ में दुबके खग शिशुओं को
‘लो सुबह, अब आ रही है!’
या कि स्वीकारती शुभ प्रभात को
‘आओ! स्वागत लाल सूर्य तुम्हारा स्वागत!’
वह गा रही है हेरती न जाने किसे टेरती
पुकारती समस्त विजन को
दुलारती हवाओं के संग
शांत झरोके रूक-रूक कर सहलाते हैं
चांदी सी चमकीली झील के साए को
एक पथिक छोड़ते हुए पुरानी लीक को
मुड़कर देखता है क्या पीछे सवेरा आ रहा है?
कैसी भी गर्म उमस भरी थी शाम
फिर कितनी ठंढ़ी बोछारों में भीगी रात
विदा!
पर विदा लेगी वह अंतिम प्रहार में
प्रभात के आने पर क्यों कर थमेगी वह
हमारे रोके न रूकेगी

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