हिन्दू मुस्लिम एकता शायरी

हिन्दू मुस्लिम एकता शायरी – 2 Lines Hindu Muslim Ekta Shayari in Hindi Image – Desh Bhakti Qaumi Unity Sher Shayari

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हमारे भारत देश में हिन्दू मुस्लिम वर्ग के लोग सबसे अधिक पाए जाते है जिनमे की अक्सर लड़ाइयां भी होती है लेकिन जहाँ झगड़ा होता है वहां प्यार भी होता है | इसीलिए कई राजनैतिक पार्टियां हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए अभियान चलाती रहती है जिसके लिए कई देशभक्त शायर हिन्दू मुस्लिम एकता के ऊपर कई बेहतरीन शायरियां लिखी गयी है जिन शायरियो को जानने के लिए आप हमारी इस पोस्ट को पढ़ सकते है जिसे की आप फेसबुक व व्हाट्सएप्प पर शेयर भी कर सकते है |

हिन्दू मुस्लिम देशभक्ति शायरी

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ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम ‘अमीर’
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है

एक ही है सबकी मंजिल बस लफ़्ज़ों के तराने बदल जाते है दोस्तों
वो एक ही मुकाम है, जिसे कुछ स्वर्ग तो कुछ जन्नत का दरबार कहते है

अहल-ए-हुनर के दिल में धड़कते हैं सब के दिल
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है

कुछ जाते है मंदिरो में, कुछ मस्जिदों की राह अपनाते है
पर मक़सद तो सबका एक ही, जिसे लोग ख़ुशी की फ़रियाद कहते है

Hindu Muslim Unity Shayari

किसी का कोई मर जाए हमारे घर में मातम है
ग़रज़ बारह महीने तीस दिन हम को मोहर्रम है

अजीब मखलूक है यारो जिसे लोग इंसान कहते है
आज फिर हम अपने दिल का एक सच बयान कहते है

न ही फर्क एक तिनके का भी न ही खून का रंग कुछ और है
बस फर्क ये की किसी को लोग हिन्दू, तो किसी को मुसलमान कहते है

एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं
वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने

हिन्दू मुस्लिम देशभक्ति शायरी

हिन्दू मुस्लिम एकता पर शायरी

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जाती पाती के नाम पर इंसान ने बेच दिया इस जहान को
कुछ इसे कृपा कहते है, कुछ इसे खुदा का फरमान कहते है

मिरे सेहन पर खुला आसमान रहे कि मैं
उसे धूप छाँव में बाँटना नहीं चाहता

‘हफ़ीज़’ अपनी बोली मोहब्बत की बोली
न उर्दू न हिन्दी न हिन्दोस्तानी

वो एक ही हस्ती, एक ही वजूद है. जिसने ये सारा जहान बनाया है
फर्क इतना की कुछ उसे “खुदा” तो कुछ उसे “भगवान्” कहते है

Hindu Muslim Ekta Shayari Image

मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए
मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूँ

कोई पूजे पत्थर को, कोई सजदे में अपना सर झुकाते है
ये एक ही है बस कुछ इसे पूजा, तो कुछ इसे अपना ईमान कहते है

यही है इबादत यही दीन ओ ईमाँ
कि काम आए दुनिया में इंसाँ के इंसाँ

एक ही रिवाज़, एक ही रसम, बस कुछ अंदाज़ बदल जाते है
वरना एक ही है जिसे कुछ उपवास, तो कुछ रमज़ान कहते है

Hindu Muslim Ekta Shayari in Hindi Image

Shayari on Hindu Muslim Love

पी शराब नाम-ए-रिंदाँ ता असर सूँ कैफ़ के
ज़िक्र-ए-अल्लाह अल्लाह हो वे गर कहे तू राम राम

हम अहल-ए-दिल ने मेयार-ए-मोहब्बत भी बदल डाले
जो ग़म हर फ़र्द का ग़म है उसी को ग़म समझते हैं

हम तो सोच समझकर भी कुछ समझ नहीं पाते यारो
कुछ ऐसी बाते ये नादान परिंदे, बेजुबान कहते है

सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें
आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत

हिन्दू मुस्लिम एकता की शायरी

हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं
हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है

सुनो हिन्दू मुसलमानो कि फ़ैज़-ए-इश्क़ से ‘हातिम’
हुआ आज़ाद क़ैद-ए-मज़हब-ओ-मशरब से अब फ़ारिग़

तकबीर का जो कुछ मतलब है,
नाकस की भी मंशा है वही।
तुम जिनको नमाजे़ कहते हो,
हिंदू के लिए पूजा है वही।

बड़े अनमोल हे ये खून के रिश्ते
इनको तू बेकार न कर,
मेरा हिस्सा भी तू ले ले मेरे भाई
घर के आँगन में दीवार ना कर।

2 Lines Desh Bhakti Qaumi Unity Sher Shayari

हिन्दू मुस्लिम एकता हिंदी शायरी

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, हैं दोनों इंसान,
ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ ले कुरान,
अपने तो दिल में है दोस्त, बस एक ही अरमान,
एक थाली में खाना खाये सारा हिन्दुस्तान।

दोस्ताना इतना बरकरार रखो कि,
मजहब बीच में न आये कभी,
तुम उसे मंदिर तक छोड़ दो ,
वो तुम्हें मस्जिद छोड़ आये कभी।

तुम राम कहो, वो रहीम कहें,
दोनों की ग़रज़ अल्लाह से है।
तुम दीन कहो, वो धर्म कहें,
मंशा तो उसी की राह से है।

संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे,
हिन्दू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे
हम मिलजुल के रहे ऐसे कि
मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम बसे जैसे।

हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल शेरो शायरियां

फिर लड़ने से क्या हासिल है?
ज़ईफ़ हम, हो तुम नादान नहीं।
भाई पर दौड़े गुर्रा कर,
वो हो सकते इंसान नहीं।

क्यों लड़ता है, मूरख बंदे,
यह तेरी ख़ामख़याली है।
है पेड़ की जड़ तो एक वही,
हर मज़हब एक-एक डाली है।

तुम ऐसे बुरे आमाल पर,
कुछ भी तो ख़ुदा से शर्म करो।
पत्थर जो बना रक्खा है ‘शहीद’,
इस दिल को ज़रा तो नर्म करो।

तुम इश्क कहो, वो प्रेम कहें,
मतलब तो उसकी चाह से है।
वह जोगी हो, तुम सालिक हो,
मक़सूद दिले आगाह से है।

हिन्दू मुस्लिम एकता सायरी

बनवाओ शिवाला, या मस्जिद,
है ईंट वही, चूना है वही।
मेमार वही, मज़दूर वही,
मिट्टी है वही, चूना है वही।

क्या क़त्ल व ग़ारत ख़ूंरेज़ी,
तारीफ़ यही ईमान की है।
क्या आपस में लड़कर मरना,
तालीम यही कुरआन की है!

इंसाफ़ करो, तफ़सीर यही
क्या वेदों के फ़रमन की है।
क्या सचमुच यह ख़ूंख़ारी है,
आला ख़सलत इंसान की है?

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