Amalaki Ekadashi 2018

Amalaki Ekadashi 2018 – आमलकी एकादशी व्रत कथा, स्टोरी, पूजा विधि इन हिंदी – Benefits, Significance

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हिंदू धर्म में कई तरह के व्रत रखे जाते हैं जिनमें से की आमलकी एकादशी या आमला अथवा आंवला एकादशी का व्रत एक महत्वपूर्ण व्रत होता है | एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के लिए रखा जाता है और हर एकादशी के व्रत का अलग ही महत्व होता है | प्रत्येक साल में 24 एकादशी पड़ती हैं जिसमें अलग-अलग तरह के व्रत रखा जाता है | इसीलिए हम आपको आमलकी एकादशी के व्रत के बारे में बताते हैं कि इस व्रत का मानव जीवन में क्या महत्व है ? तथा इस व्रत को करने से हमें क्या लाभ प्राप्त होता है ? इन सब की जानकारी पाने के लिए आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं |

आमलकी एकादशी २०१८ कब है – Amalaki Ekadashi in Hindi

भगवान विष्णु के लिए रखा जाने वाला यह व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है | हर साल amalaki ekadasi या amalaki ekadashi 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 में अलग अलग तारीख को पड़ती है | उसी तरह साल 2018 में इस एकादशी का व्रत 26 फरवरी के दिन रखे जाने का प्रावधान है :

Amalaki Ekadashi Vrat Vidhi – व्रत विधि

अगर आप आमलकी एकादशी व्रत की व्रत विधि, व्रत कथा, महत्व, इम्पोर्टेंस, सिग्नीफिकेन्स के बारे में Hindi, English, Punjabi, Marathi, Kannad, Malyalam, Tamil, Telugu, Kannad, Urdu सभी तरह की भाषाओ (Language Font) में जान सकते है :

  • इस व्रत को रखने वाला व्रती सबसे पहले प्रातः उठकर पवित्र नदी में स्नान करे |
  • उसके बाद भगवान् विष्णु की स्तुति करके पूजा करे व हवन भी करे |
  • उसके बाद आंवले के वृक्ष के चारो तरफ सफाई करे व उसे गाय के गोबर से पवित्र भी करे |
  • उसके बाद आंवले के वृक्ष के पास भूमि पर एक कलश बना कर रखे जिसमे की आपको देवी-देवताओ, तीर्थों एवं सागर को आमंत्रित करना होगा |
  • उसी कलश में पांच रत्न रखकर धुप अथवा दीप जलाये |
  • उसके बाद आपको इस पूजा में भगवान् विष्णु के छंठवे अवतार परशुराम की मूर्ति को स्थापित करना है तथा पुरे भक्ति भाव से आंवले तिल, कुश, मुद्रा और जल से उनकी स्तुति करनी है |
  • उसके बाद रात्रि में आपको पूरी रात जागरण करना है व आमलकी एकादशी की कथा को सुनना है |
  • उसके बाद अंत में सभी ब्राहम्णो को भोजन करवा कर व दक्षिणा देकर खुद व्रत खोलना चाहिए |

आमलकी एकादशी व्रत कथा

Amalaki Ekadashi Story | आमलकी एकादशी की कथा

Amalaki Ekadashi Vrat Katha In Hindi :पुराणों की कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में वैदिक नामक एक नगर हुआ करता था इस नगर में लगभग सभी जाति व धर्म जैसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र, वैश्य सभी लोग बड़ी प्रसन्नता पूर्वक रहा करते थे | उस नगर में हमेशा ही वेद ध्वनि गूंजती रहती थी | वह नगर इतना पापमुक्त था कि उस नगर में कोई भी व्यक्ति नास्तिक दुराचारी अथवा पापी नहीं था | उस नगर में चंद्रवंशी राजा चैत्ररथ का राज्य था वह भी एक विद्वान अथवा धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था वह इतना धार्मिक तथा विद्वान था कि उसके राज्य में किसी भी प्रकार का कोई भी गरीब व्यक्ति नहीं था वह बहुत ही दानी भी था | उस राज्य में सभी लोग विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे तथा हर एकादशी को व्रत रखा करते थे |

Amalaki Ekadashi Importance

उसके बार एक बात की बात है फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आमलकी एकादशी आई उस दिन लगभग उस राज्य के सभी लोगों ने व्रत रखा व्रत रखने के साथ ही वहां का राजा अपने प्रजा के साथ मंदिर में आया तथा भगवान विष्णु के पूरे भक्ति भाव से स्तुति की उनके ऊपर धूप दीप नैवेद्य पंचरथ नक्षत्र आदि से उनके पूजन भी किया | उन्होंने भगवन विष्णु से प्रार्थना की और कहा हे दात्री – आप ब्रह्म स्वरूप है आप ब्रह्मा जी द्वारा उत्पन्न हो तथा सभी पापों का भी नष्ट करने वाले हैं मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कृपया मेरे सभी तरह के पापों का हरण कर ले |

Amalaki Ekadashi Benefits – Amalaki Ekadashi Significance – महत्व

आमलकी एकादशी की रात को राज्य के सभी लोगों अथवा तथा तथा वहां के राजा ने जागरण भी किया उसी समय वहां पर एक दुराचारी तथा पापी बहेलिया भी आ गया वह जीव हिंसा का बहुत बड़ा पापी था | जब वह वहां आया तब उसे भूख भी बहुत लगी थी जिसकी वजह से वह पूरी रात उसी मंदिर के कोने में बैठा रहा | उसने उस पूरी रात कुछ भी नहीं खाया और भगवान विष्णु के आमलकी एकादशी की कथा भी पूरी सुनी इस तरह से अनजाने में उसने आमलकी एकादशी का व्रत भी कर लिया | उसके कुछ समय पश्चात थी उस बहेलिए की मृत्यु की हो गई अगले जन्म में उसका जन्म राजा वसुरथ के यहाँ हुआ | वह कांति में चंद्रमा के समान, वीरता में भगवान विष्णु के व तेज में सूर्य के समान था | इतना पाप करने के बाद भी उस बहेलिया का जन्म राजा के घर हुआ यही व्रत का महत्व है कि इस व्रत को करने से सभी मनुष्य के पापों का अंत हो जाता है और अंत में बैकुंठ धाम मोक्ष पाता है |

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