अमजद इस्लाम अमजद की शायरी

अमजद इस्लाम अमजद की शायरी – Amjad Islam Amjad Shayri in Hindi

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अमजद इस्लाम अमजद एक बहुत बड़े पाकिस्तानी लेखक, कवि व शायर थे उनका जन्म 4 August 1944 में पाकिस्तान में लाहौर शहर में हुआ | इन्होने अपने जीवन में कई तरह की रचनाये लिखी यह अपनी रचनाये हिंदी, उर्दू के अलावा अन्य भाषाओ में भी किया करते थे इसीलिए इनकी रचनाओं में से हम आपके लिए कुछ बेहतरीन शेरो शायरियां बताते है जो की आपके लिए काफी महत्वपूर्ण व प्रेरणादायक है जिन्हे आप अपने दोस्तों के साथ फेसबुक व व्हाट्सएप्प पर शेयर भी कर सकते है |

Love Shayari Amjad Islam Amjad

सुना है कानों के कच्चे हो तुम बहुत सो हम
तुम्हारे शहर में सब से बना के रखते हैं

बड़े सुकून से डूबे थे डूबने वाले
जो साहिलों पे खड़े थे बहुत पुकारे भी

ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है
ये भी तो अपनी जगह एक परेशानी है

सवाल ये है कि आपस में हम मिलें कैसे
हमेशा साथ तो चलते हैं दो किनारे भी

Amjad Islam Amjad Urdu Shayri

उस के लहजे में बर्फ़ थी लेकिन
छू के देखा तो हाथ जलने लगे

जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें
ईद के चाँद का दीदार बहाना ही सही

एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा
जिस तरफ़ देखिए आने को है आने वाला

अपने लहजे की हिफ़ाज़त कीजिए
शेर हो जाते हैं ना-मालूम भी

Love Shayari Amjad Islam Amjad

Amjad Islam Amjad Ki Shayari

हमें हमारी अनाएँ तबाह कर देंगी
मुकालमे का अगर सिलसिला नहीं करते

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया
होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया

साए ढलने चराग़ जलने लगे
लोग अपने घरों को चलने लगे

वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं
दिल-ए-बे-ख़बर मिरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा

Amjad Islam Amjad Shayari in Urdu

एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक
जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है

अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला
हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला

Amjad Islam Amjad Shayri in Hindi

Amjad Islam Amjad Mohabbat Shayari

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा

अब किसी से भी शिकायत न रही
जाने किस किस से गिला था पहले

ग़म है आवारा अकेले में भटक जाता है
जिस जगह रहिए वहाँ मिलते-मिलाते रहिए

उस ने आहिस्ता से जब पुकारा मुझे
झुक के तकने लगा हर सितारा मुझे

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