हरिवंश राय बच्चन की कवितायेँ

हरिवंश राय बच्चन की कवितायेँ – Dr. Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi – Hindi Poetry of Harivansh Rai Bachchan & Kavita

Posted by

हरिवंश राय बच्चन जी इस देश के जानेमाने कवियों में से एक कवि है इनका पूरा नाम हरिवंश राय श्रीवास्तव “बच्चन” है | इनका जन्म 27 नवम्बर 1907 में इलाहाबाद में हुआ था तथा उनकी मृत्यु 95 साल की उम्र में 18 जनवरी 2003 में मुंबई में हुई थी | इनकी रचना की वजह से इन्हे 1976 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था इसीलिए हम आपको हरिवंश राय बच्चन जी द्वारा लिखी गयी कुछ बेहतरीन कविताओं के बारे में बताते है जिन कविताओं को पढ़ कर आप इनके बारे में भी जान सकते है |

Harivansh Rai Bachchan Poems for Class 8 – हरिवंश राय बच्चन पोयम्स इन हिंदी

अगर आप हरिवंश राय बच्चन कविताकोश, आत्मपरिचय, होली, मधुबाला, दोस्ती, harivansh rai bachchan की कविता, हरिवंश राय बच्चन जी की कविता, हरिवंश राय बच्चन कविता agneepath, हरिवंश राय बच्चन के कविता, हरिवंश राय बच्चन कविता संग्रह, हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध कविता, हरिवंश राय बच्चन की एक कविता के बारे में जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है :

अकेलेपन का बल पहचान।
शब्द कहाँ जो तुझको, टोके,
हाथ कहाँ जो तुझको रोके,
राह वही है, दिशा वही, तू करे जिधर प्रस्थान।
अकेलेपन का बल पहचान।
जब तू चाहे तब मुस्काए,
जब चाहे तब अश्रु बहाए,
राग वही है तू जिसमें गाना चाहे अपना गान।
अकेलेपन का बल पहचान।
तन-मन अपना, जीवन अपना,
अपना ही जीवन का सपना,
जहाँ और जब चाहे कर दे तू सब कुछ बलिदान।
अकेलेपन का बल पहचान।

हरिवंशराय बच्चन जी की एक खूबसूरत कविता

अब वे मेरे गान कहाँ हैं!
टूट गई मरकत की प्याली,
लुप्त हुई मदिरा की लाली,
मेरा व्याकुल मन बहलानेवाले अब सामान कहाँ हैं!
अब वे मेरे गान कहाँ हैं!
जगती के नीरस मरुथल पर,
हँसता था मैं जिनके बल पर,
चिर वसंत-सेवित सपनों के मेरे वे उद्यान कहा हैं!
अब वे मेरे गान कहाँ हैं!
किस पर अपना प्यार चढाऊँ?
यौवन का उद्गार चढाऊँ?
मेरी पूजा को सह लेने वाले वे पाषाण कहाँ है!
अब वे मेरे गान कहाँ हैं!

Harivansh Rai Bachchan Ki Shayari in Hindi

मैं समय बर्बाद करता।?
प्रायशः हित-मित्र मेरे
पास आ संध्या-सबेरे,
हो परम गंभीर कहते–मैं समय बर्बाद करता।
मैं समय बर्बाद करता?
बात कुछ विपरीत ही है,
सूझता उनको नहीं है,
जो कि कहते आँख रहते–मैं समय बर्बाद करता।
मैं समय बर्बाद करता?
काश मुझमें शक्ति होती
नष्ट कर सकता समय को,
औ’समय के बंधनों से
मुक्त कर सकता हृदय को;
भर गया दिल जुल्म सहते–मैं समय बर्बाद करता।
मैं समय बर्बाद करता?

Poem Agneepath by Harivansh Rai Bachchan

नभ के सीमाहीन पटल पर
एक चमकती रेखा चलकर
लुप्त शून्य में होती-बुझता एक निशा का दीप दुलारा!
देखो, टूट रहा है तारा!
हुआ न उडुगन में क्रंदन भी,
गिरे न आँसू के दो कण भी
किसके उर में आह उठेगी होगा जब लघु अंत हमारा!
देखो, टूट रहा है तारा!
यह परवशता या निर्ममता
निर्बलता या बल की क्षमता
मिटता एक, देखता रहता दूर खड़ा तारक-दल सारा!
देखो, टूट रहा है तारा!

हरिवंश राय बच्चन पोयम्स इन हिंदी

Harivansh Rai Bachchan Motivational Poem in Hindi

अगर आप pdf free download, mp3, harivansh rai bachchan poems pdf, with meaning, harivansh rai bachchan poetry collection, on nature, free download, for class 6, with pictures, on desh bhakti, madhushala lyrics, हरिवंश राय बच्चन पोएट्री, harivansh rai bachchan poems for students, हरिवंश राय बच्चन पोएट्री इन हिंदी, harivansh rai bachchan poetry hindi, harivansh rai bachchan poetry english के बारे में जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है :

धरा हिला, गगन गुँजा
नदी बहा, पवन चला
विजय तेरी, विजय तेरी
ज्योति सी जल, जला
भुजा–भुजा, फड़क–फड़क
रक्त में धड़क–धड़क
धनुष उठा, प्रहार कर
तू सबसे पहला वार कर
अग्नि सी धधक–धधक
हिरन सी सजग सजग
सिंह सी दहाड़ कर
शंख सी पुकार कर
रुके न तू, थके न तू
झुके न तू, थमे न तू
सदा चले, थके न तू
रुके न तू, झुके न तू

Harivansh Rai Bachchan Poem Koshish Karne Walon Ki Lyrics

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

Harivansh Rai Bachchan Poem aa Rahi Ravi ki Sawari

नव किरण का रथ सजा है,
कलि-कुसुम से पथ सजा है,
बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी!
आ रही रवि की सवारी!
विहग बंदी और चारण,
गा रहे हैं कीर्ति गायन,
छोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी!
आ रही रवि की सवारी!
चाहता, उछलूँ विजय कह,
पर ठिठकता देखकर यह,
रात का राजा खड़ा है राह में बनकर भिखारी!
आ रही रवि की सवारी

Harivansh Rai Bachchan Poems for Class 8

Harivansh Rai Bachchan Inspirational Poem in Hindi

हैं विचरते स्वप्न सुंदर,
किंतु इनका संग तजकर,
व्योम–व्यापी शून्यता का कौन साथी हो रहा है?
विश्व सारा सो रहा है!
भूमि पर सर सरित् निर्झर,
किंतु इनसे दूर जाकर,
कौन अपने घाव अंबर की नदी में धो रहा है?
विश्व सारा सो रहा है!
न्याय–न्यायधीश भू पर,
पास, पर, इनके न जाकर,
कौन तारों की सभा में दुःख अपना रो रहा है?
विश्व सारा सो रहा है!

Harivansh Rai Bachchan Best Poem in Hindi

खेल चुके हम फाग समय से!
फैलाकर निःसीम भुजाएँ,
अंक भरीं हमने विपदाएँ,
होली ही हम रहे मनाते प्रतिदिन अपने यौवन वय से!
खेल चुके हम फाग समय से!
मन दे दाग अमिट बतलाते,
हम थे कैसा रंग बहाते
मलते थे रोली मस्तक पर क्षार उठाकर दग्ध हृदय से!
खेल चुके हम फाग समय से!
रंग छुड़ाना, चंग बजाना,
रोली मलना, होली गाना–
आज हमें यह सब लगते हैं केवल बच्चों के अभिनय से!
खेल चुके हम फाग समय से!

Harivansh Rai Bachchan Poems Hai Andheri Raat

अगर आप harivansh rai bachchan as a poet, harivansh rai bachchan 10 poems in hindi, मधुशाला, हरिवंश राय बच्चन की छोटी कविता, अग्निपथ, harivansh rai bacchan kavita sangrah, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, हरिवंश राय बच्चन का कविता, harivansh rai bacchan kavita in hindi, harivansh rai bachchan kavita in english, डॉ ,येँ, जो बीत गई सो बात गई, हरिवंश राय बच्चन हिन्दी कविता के बारे में जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है :

मैंने गाकर दुख अपनाए!
कभी न मेरे मन को भाया,
जब दुख मेरे ऊपर आया,
मेरा दुख अपने ऊपर ले कोई मुझे बचाए!
मैंने गाकर दुख अपनाए!
कभी न मेरे मन को भाया,
जब-जब मुझको गया रुलाया,
कोई मेरी अश्रु धार में अपने अश्रु मिलाए!
मैंने गाकर दुख अपनाए!
पर न दबा यह इच्छा पाता,
मृत्यु-सेज पर कोई आता,
कहता सिर पर हाथ फिराता-
’ज्ञात मुझे है, दुख जीवन में तुमने बहुत उठाये!
मैंने गाकर दुख अपनाए!

Harivansh Rai Bachchan Poem Akelepan ka Bal Pehchan

घुल रहा मन चाँदनी में!
पूर्णमासी की निशा है,
ज्योति-मज्जित हर दिशा है,
खो रहे हैं आज निज अस्तित्व उडुगण चाँदनी में!
घुल रहा मन चाँदनी में!
हूँ कभी मैं गीत गाता,
हूँ कभी आँसू बहाता,
पर नहीं कुछ शांति पाता,
व्यर्थ दोनों आज रोदन और गायन चाँदनी में!
घुल रहा मन चाँदनी में!
मौन होकर बैठता जब,
भान-सा होता मुझे तब,
हो रहा अर्पित किसी को आज जीवन चाँदनी में!
घुल रहा मन चाँदनी में!

Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi

Harivansh Rai Bachchan Poetry in Hindi

अरे है वह अंतस्तल कहाँ?
अपने जीवन का शुभ-सुन्दर
बाँटा करता हूँ मैं घर-घर,
एक जगह ऐसी भी होती,
निःसंकोच विकार विकृति निज सब रख सकता जहाँ।
अरे है वह अंतस्तल कहाँ?
करते कितने सर-सरि-निर्झर
मुखरित मेरे आँसू का स्वर,
एक उदधि ऐसा भी होता,
होता गिरकर लीन सदा को नयनों का जल जहाँ।
अरे है वह अंतस्तल कहाँ?
जगती के विस्तृत कानन में
कहाँ नहीं भय औ’ किस क्षण में?
एक बिंदु ऐसा भी होता,
जहाँ पहुँचकर कह सकता मैं ’सदा सुरक्षित यहाँ’।
अरे है वह अंतस्तल कहाँ?

Harivansh Rai Bachchan Poems on Love

अगर आप किसी भी कक्षा के बच्चो के लिए Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 7, Class 8, Class 9, Class 10, Class 11, Class 12 के लिए भाषा जैसे Hindi, English, Urudu, Marathi, Tamil, Telugu, Malyalam, Punjabi, Gujarati, Kannad के Language Font में जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है :

तुम बुझाओ प्यास मेरी या जलाए फिर तुम्हारी याद|
स्वर्ण-चाँदी के कटोरों
में भरा था झलमलाता नीर,
में झुका सहसा पिपासाकुल
मगर फिर हो गया गंभीर–
भेद पानी और पानी,
प्यास में औ’ प्यास में भी भेद,
तुम बुझाओ प्यास मेरी या जलाए फिर तुम्हारी याद|
कम अधर, कम कंठ में पर
प्राण में जो निर्नियंत्रित आग,
एक है मालूम तुमको
जो रही है वह सदा से माँग,
होठ भीगे हों, हृदय हो
किंतु मरु की शुष्क, सूनी आह,
क्या बनूँगा आज अपना ही स्वयं दयनीय मैं अपवाद।
तुम बुझाओ प्यास मेरी या जलाए फिर तुम्हारी याद|

Harivansh Rai Bachchan Poems for Parents

कौन हंसिनियाँ लुभाए हैं तुझे ऐसा कि तुझको मानसर भूला हुआ है?
कौन लहरें हैं कि जो दबती-उभरती
छातियों पर हैं तुझे झूला झुलातीं?
कौन लहरें हैं कि तुझपर फेन का कर
लेप, तेरे पंख सहलाकर सुलातीं?
कौन सी मधुगंध बहती है पवन में
साँस के जो साथ अंतर में समाती?
कौन हंसिनियाँ लुभाए हैं तुझे ऐसा कि तुझको मानसर भूला हुआ है?
कौन श्यामल, श्वेत औ’ रतनार नीरज–
के निकुंजों ने तुझे भरमा लिया है?
कौन हालाहल, अमीरस और मदिरा
से भरे लबरेज़ प्यालों को पिया है
इस क़दर तूने कि मुझको आज मरना
और जीना और झुक झुक झूमना सब
एक-सा है? किस कमल के नाल की
जादू-छड़ी ने आज तेरा मन छुआ है?
कौन हंसिनियाँ लुभाए हैं तुझे ऐसा कि तुझको मानसर भूला हुआ है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *