Poem (कविता)

बसंत पंचमी पर कविता | Poem On Basant Panchami in Hindi | Pdf Download

Poem On Basant Panchami in Hindi
Written by abhay

Basant Panchami 2019:वसंत पंचमी एक प्रसिद्ध त्योहार है जो सर्दियों के मौसम के अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत करता है। सरस्वती वसंत पंचमी त्योहार की हिंदू देवी हैं। युवा लड़कियां चमकीले पीले कपड़े पहनती हैं और उत्सव में भाग लेती हैं। रंग पीला इस उत्सव के लिए एक विशेष अर्थ रखता है क्योंकि यह प्रकृति की प्रतिभा और जीवन की जीवंतता को दर्शाता है। इस त्योहार के दौरान पूरी जगह पीले रंग से जुडगमगा जाती है।

Hindi poems on basant panchami

Basant panchami kab hai:इस वर्ष २०१९ में बसंत पंचमी 10 फरवरी को पड़ रही है|

उड़-उड़कर अम्बर से।
जब धरती पर आता है।
देख के कंचन बाग को।
अब भ्रमरा मुस्काता है।
फूलों की सुगंधित।
कलियों पर जा के।
प्रेम का गीत सुनाता है।
अपने दिल की बात कहने में।
बिलकुल नहीं लजाता है।
कभी-कभी कलियों में छुपकर।
संग में सो रात बिताता है।
गेंदा गमके महक बिखेरे।
उपवन को आभास दिलाए।
बहे बयारिया मधुरम्-मधुरम्।
प्यारी कोयल गीत जो गाए।
ऐसी बेला में उत्सव होता जब।
वाग देवी भी तान लगाए।
आयो बसंत बदल गई ऋतुएं।
हंस यौवन श्रृंगार सजाए।

महके हर कली कली
भंवरा मंडराए रे
देखो सजनवा
वसंत ऋतु आये रे
नैनो में सपने सजे
मन मुस्काए
झरने की कल कल
गीत कोई गाये
खेतों में सरसों पीली
धरती को सजाये रे
देखो सजनवा
वसंत ऋतु आये रे……….
ठण्ड की मार से
सूखी हुई धरा को
प्रकृति माँ हरियाला
आँचल उड़ाए
खिली है डाली डाली
खिली हर कोंपल
प्रेम का राग कोई
वसुंधरा सुनाये रे
देखो सजनवा
वसंत ऋतु आये रे…….
मन में उमंगें जगी
होली के रंगों संग
प्यार के रंग में
जिया रँगा जाए
उपवन में बैठी पिया
तुझे ही निहारूं मैं
वसंती पवन मेरा
ह्रदय जलाये रे
देखो सजनवा
वसंत ऋतु आये रे…………..

Poems in english

har juba pe hai chhaee ye kahaanee.
aaee basant kee ye rtoo mastaanee..
dil ko chhoo jaaye mast jhoka pavan ka.
meethee dhoop mein nikhar jae rang badan ka..
gaaye bujurgo kee tolee jubaanee.
aaee basant kee ye rtoo mastaanee..
jhoomen panchhee koyal gaaye.
sooraj kee kirane hansatee jamee nahalaaye..
laage donon pahar kee samaan roohaanee.
aaee basant kee ye rtoo mastaanee..
timatimaayen khushee se raaton mein taare.
pilee phasalon ko nahalaaye doodhiya ujaale..
gaate jae sab dagar puraanee.
aaee basant kee ye rtoo mastaanee..
– utpal paathak

Basant panchami kavita in hindi

Poem On Basant Panchami

आया वसंत आया वसंत
छाई जग में शोभा अनंत।
सरसों खेतों में उठी फूल
बौरें आमों में उठीं झूल
बेलों में फूले नये फूल
पल में पतझड़ का हुआ अंत
आया वसंत आया वसंत।
लेकर सुगंध बह रहा पवन
हरियाली छाई है बन बन,
सुंदर लगता है घर आँगन
है आज मधुर सब दिग दिगंत
आया वसंत आया वसंत।
भौरे गाते हैं नया गान,
कोकिला छेड़ती कुहू तान
हैं सब जीवों के सुखी प्राण,
इस सुख का हो अब नही अंत
घर-घर में छाये नित वसंत।


आई बसंत
हर जुबा पे है छाई ये कहानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।
दिल को छू जाये मस्त झोका पवन का।
मीठी धूप में निखर जाए रंग बदन का।।
गाये बुजुर्गो की टोली जुबानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।
झूमें पंछी कोयल गाये।
सूरज की किरणे हँसती जमी नहलाये।।
लागे दोनों पहर की समां रूहानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।
टिमटिमायें ख़ुशी से रातों में तारे।
पिली फसलों को नहलाये दूधिया उजाले।।
गाते जाए सब डगर पुरानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।
– उत्पल पाठक

Poem in punjabi

ਹਰ ਜੁੁਬਾ ਪੀ ਹੈਚਾਈ ਤੇਰਾ ਦਹੈ.
ਆਸੀ ਬੇਸੰਤ ਕੀ ਵੀ ਰੁਟੋ ਮਾਸਟਾਏਨੀ ..
ਦਿਲੀ ਕੋ ਚੁੂ ਜਾਵੇ ਮੰਤ ਝੋਕ ਪਵਨ ਕਾ.
ਮਿਲਦੀ ਦਹੋਪ ਮੇਂ ਨਿਖਰ ਜਾਇ ਰੰਗੁ ਬਦਨ ਕਾ ..
ਗੇਏ ਬਜੁਰਗੋ ਕੀ ਤੋਲੀ ਜੁਬਾਨੇ.
ਆਸੀ ਬੇਸੰਤ ਕੀ ਵੀ ਰੁਟੋ ਮਾਸਟਾਏਨੀ ..
ਝੁਮੇਨ ਪੰਚਾਇ ਕੌਲ ਗਾਏ.
ਸੁੂਰਜ ਕੀ ਕਿਰਣ ਹਾਨਸੇਟੇ ਜਮੀ ਨਾਹਲੈ ..
ਲੇਜ ਡੋਨਨ ਪਹਾੜ ਕੀ ਸੈਮਨ ਰੋਹਾਣੀ.
ਆਸੀ ਬੇਸੰਤ ਕੀ ਵੀ ਰੁਟੋ ਮਾਸਟਾਏਨੀ ..
ਟਾਈਮਿਟਿਮੇਂ ਖੁਸਸੀ ਸੀ ਰਾਟ ਵਿੱਚ ਮੈਂ ਹੁਣ
ਪੋਲੀ ਫਾਸਲੋਨ ਕੋ ਨਹਿਲਾਯ ਦੋਧਿਆ ਉਜਾੇਲ ..
ਗੇਟ ਜੇ ਸਾਰੇ ਸੰਦੇਸ਼ ਪਹਿਨੇ.
ਆਸੀ ਬੇਸੰਤ ਕੀ ਵੀ ਰੁਟੋ ਮਾਸਟਾਏਨੀ ..
ਯੂਟਲ ਪਾਠਕ

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अलौकिक आनंद अनोखी छटा।
अब बसंत ऋतु आई है।
कलिया मुस्काती हंस-हंस गाती।
पुरवा पंख डोलाई है।
महक उड़ी है चहके चिड़िया।
भंवरे मतवाले मंडरा रहे हैं।
सोलह सिंगार से क्यारी सजी है।
रस पीने को आ रहे हैं।
लगता है इस चमन बाग में।
फिर से चांदी उग आई है।।
अलौकिक आनंद अनोखी छटा।
अब बसंत ऋतु आई है।
कलिया मुस्काती हंस-हंस गाती।
पुरवा पंख डोलाई है।

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