प्रदोष व्रत तिथि

Pradosh Vrat 2018 – प्रदोष व्रत तिथि – कथा, उद्यापन, पूजा समय, पूजन विधि, महत्व, नियम

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जिस तरह हिन्दू धर्म में जितने देवी-देवताओ की पूजा की जाती है उसी तरह हर देवी-देवताओ को प्रसन्न करने का अपना एक अलग तरीका होता है इसीलिए हिन्दू धर्म में कई तरह के व्रतों का प्रावधान भी होता है | उन्ही व्रतों में से एक व्रत प्रदोष नाम का व्रत होता है जिस दिन भगवान् शिव व माता पार्वती की पूजा की जाती है | इसीलिए हम आपको प्रदोष व्रत के बारे में जानकारी देते है की प्रदोष का व्रत कब आता है तथा इस व्रत का क्या महत्व है ? इस दिन की तरह से पूजा करनी चाहिए इन सबकी जानकारी आप यहाँ से पा सकते है |

प्रदोष व्रत कब है – प्रदोष व्रत कैलेंडर – मुहूर्त

प्रदोष व्रत की डेट : प्रदोष व्रत के दिन सूर्यास्त होने के बाद 2 घंटे 24 मिनट टाइम जो होता है वह समय प्रदोष काल का समय होता है | प्रदोष का व्रत त्रयोदशी के दिन रखे जाने का प्रावधान है हर माह में क्रमशः दो त्रयोदशी पड़ती है यानी दो प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष) पड़ते है अंग्रेजी केलिन्डर के अनुसार जिनकी तिथि भिन्न होती है | इसीलिए हम आपको यहाँ बताते है की साल 2018 में किस-तारीख को प्रदोष का व्रत रखे जाने का प्रावधान है |

 Date in 2018  Month  Day  Vrat/Paksh Pradosha Puja Time
14 January (Sunday) Pradosh Vrat (K) 17:57 to 20:37
29 January (Monday) Soma Pradosh Vrat (S) 18:08 to 20:44
13 February (Tuesday) Bhauma Pradosh Vrat (K) 18:17 to 20:51
27 February (Tuesday) Bhauma Pradosh Vrat (S) 18:25 to 20:54
14 March (Wednesday) Pradosh Vrat (K) 18:31 to 20:57
29 March (Thursday) Pradosh Vrat (S) 18:37 to 20:59
13 April (Friday) Pradosh Vrat (K) 18:43 to 21:00
27 April (Friday) Pradosh Vrat (S) 18:48 to 21:03
13 May (Sunday) Pradosh Vrat (K) 18:56 to 21:06
26 May (Saturday) Shani Pradosh Vrat (S) 19:02 to 21:10
11 June (Monday) Soma Pradosh Vrat (K) 19:08 to 21:15
25 June (Monday) Soma Pradosh Vrat (S) 19:12 to 21:19
10 July (Tuesday) Bhauma Pradosh Vrat (K) 19:12 to 21:20
24 July (Tuesday) Bhauma Pradosh Vrat (S) 19:08 to 21:18
09 August (Thursday) Pradosh Vrat (K) 19:00 to 21:13
23 August (Thursday) Pradosh Vrat (S) 18:49 to 21:05
07 September (Friday) Pradosh Vrat (K) 18:35 to 20:55
22 September (Saturday) Shani Pradosh Vrat (S) 18:19 to 20:43
06 October (Saturday) Shani Pradosh Vrat (K) 18:05 to 20:33
22 October (Monday) Soma Pradosh Vrat (S) 17:51 to 20:23
05 November (Monday) Soma Pradosh Vrat (K) 17:42 to 20:17
20 November (Tuesday) Bhauma Pradosh Vrat (S) 17:37 to 20:15
04 December (Tuesday) Bhauma Pradosh Vrat (K) 17:36 to 20:17
20 December (Thursday) Pradosh Vrat (S) 17:41 to 20:22

प्रदोष व्रत कथा

पुराणों के अनुसार प्राचीन समय में एक विधवा ब्राह्मणी थी जोकि अपने परिवार का पेट पालने के लिए भिक्षा मांगती हुई फिरती थी | एक दिन वह भिक्षा मांग रही थी तभी वहां उसे नदी किनारे में एक बहुत ही आकर्षित अथवा सुंदर बालक दिखाई दिया जो कि विदर्भ देश का राजकुमार धर्मगुप्त था | वह बालक बहुत चिंतित था क्योंकि शत्रुओं ने उसके पिता को मार दिया था तथा उनके पूरे राज्य पर आधिपत्य कर लिया था | उसके बाद उसकी मां की भी मृत्यु हो चुकी थी जब ब्राह्मणी ने उस बालक को देखा तो वह उस बालक को अपने साथ ले आई तथा उसका पालन पोषण करने लगी |

उसके बाद एक दिन वह ब्राह्मी संयोगवश देव मंदिर गई उस दिन मंदिर में उसकी मुलाकात ऋषि शांडिल्य से हुई थी उसने उन्हें बताया कि यह वाला है वह विदर्भ देश के राजा का इकलौता पुत्र है तथा इसकी माँ की अकाल मृत्यु हो गई थी तथा इसके पिता को भी शत्रु ने मार डाला था | उसके बाद उसने उस ब्राह्मणी के बारे में जाना कि उन्हें क्या करना चाहिए ? तब ऋषि शांडिल्य ने बताया की उन्हें प्रदोष व्रत करना चाहिए | उसके बाद प्रदोष व्रत करना शुरू कर दिया था |

उसके बाद एक ऐसा समय आया जब वह दोनों बालक वन में घूमने के लिए निकल पड़े वहां उनकी भेंट गंधर्व कन्या से हुई जो की दिखने में बहुत ही सुंदर थी | उनमें से ब्राह्मण बालक तो वहां से चला गया लेकिन राजा का पुत्र धर्मगुप्त उस कन्या पर मोहित हो उठा और वहां से वह गंधर्व कन्या भी उस बालक पर मोहित हो गयी | वह कन्या उस राजकुमार को अपने पिता के पास ले गयी उसके बाद गंधर्व कन्या के पिता को इसकी जानकारी थी कि वह अभी तक वह देश के राजकुमार का पुत्र है उसके बाद भगवान शिव की आज्ञा हेतु गंधर्वराज ने अपनी पुत्री का विवाह धर्म गुप्त से करवा दिया के बाद राजकुमार धर्मपत्नी गंधर्व मदद ली तथा अपने राज्य पर आक्रमण कर दिया और वहां अपना पुनः अपना आधिपत्य जमा लिया | यह सब प्रदोष व्रत के कारण ही हुआ इस प्रदोष व्रत को जो करता है इसकी कथा जो भी व्यक्ति सुनता है उसकी सौ जन्म तक की दरिद्रता दूर हो जाती है |

Pradosh Vrat 2018

प्रदोष व्रत कसे करावे – प्रदोष व्रत रखने की विधि – पूजन विधि

  • प्रदोष का व्रत रखने के लिए आपको हर त्रयोदशी के दिन प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए |
  • उसके बाद आपको भगवान महादेव, शिव, भोलेनाथ की स्तुति करनी छाइये |
  • इस दिन आपको स्नान करने के पश्चात् श्वेत रंग के वस्त्र को धारण करना चाहिए |
  • उसके बाद पूजा घर में विधिपूर्वक भगवन शिव तथा माता पारवती की पूजा के लिए आपको पूजा का स्थान पवित्र करके गाय के गोबर से लीपकर वहां एक मंडप तैयार करना है |
  • उसके बाद आपको उस स्थान पर रंगोली भी बनानी है |
  • उसके बाद आपको विधिपूर्वक पूजा प्रारम्भ कर देनी है तथा उतर-पूर्व दिशा की तरफ ही मुख करने पूजा करनी चाहिए |
  • उसके बाद आपको भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करना अनिवार्य है मंत्र का जाप करते समय आपको उनके ऊपर जल चढ़ाना चाहिए |

प्रदोष व्रत का महत्व – प्रदोष व्रत माहात्म्य – प्रदोष व्रत के लाभ

प्रदोष व्रत सिग्निफ़िकेन्स : प्रदोष व्रत का बेनिफिट आपको दिन के अनुसार पड़ता है जिस दिन वह व्रत पड़ेगा उसी दिन के अनुसार आपको इस व्रत का लाभ मिलेगा जिसके बारे में हमने आपको नीचे बताया है :

रविवार प्रदोष – इस दिन व्रत रखने से आपके ऊपर किसी भी तरह का कोई रोग या बीमारी नहीं लगती व आप निरोगी रहते है और आपको लम्बी उम्र का वरदान मिलता है तथा आपकी हर मनोकामना पूर्ण होती है |
सोमवार प्रदोष – अगर आप किसी भी तरह की इच्छा रखे है तो आपको इस व्रत को करना चाहिए इस व्रत को करने से आपको आपकी इच्छा अनुसार फल प्राप्त होता है |
मंगलवार प्रदोष – इससे आप जीवन भर स्वस्थ रहते है तथा किसी भी तरह का कोई रोग आपको नहीं लगता |
बुधवार प्रदोष – अगर प्रदोष का व्रत इस दिन पड़ता है तो इसके फलस्वरूप आपकी तरह की कामना सिद्ध होती है तथा इसकी मदद से आपको ज्ञान की प्राप्ति होती है |
बृहस्पतिवार प्रदोष – इस दिन व्रत रखने का फलस्वरूप आपको आपके पितरो से आशीर्वाद मिलता है व आपके शत्रु का नाश हो जाता है |
शुक्र प्रदोष – इस दिन व्रत के फलस्वरूप आपको सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा आपको धन, सम्पदा की प्राप्ति भी होती है |
शनि प्रदोष – इस दिन व्रत रखने से आपको संतान की प्राप्ति होती है |

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