Poem (कविता)

अग्रसेन जयंती पर कविता – Agrasen Jayanti Poem in Hindi & English

Maharaja Agrasen Jayanti par kavita

अग्रसेन जयंती शुक्ल पक्ष के of एकम ’(पहला दिन) (चंद्रमा के उज्ज्वल पखवाड़े की अवधि) win अश्विन’ के हिंदू महीने के दौरान मनाया जाता है। अग्रसेन जयंती हिंदू समुदाय के अग्रहरी और अग्रवाल संप्रदायों द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध कार्यक्रम है। यह दिन उनके सम्मानित पूर्वज, महाराजा अग्रसेन के सम्मान में पूरे उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है और उनकी जयंती मनाई जाती है।किंवदंतियों के अनुसार, महाराजा अग्रसेन अग्रोहा के महान राजा और भारत में अग्रहरी और अग्रवाल समुदायों के संस्थापक भी थे।ग्रेगोरियन कैलेंडर में, यह तारीख सितंबर से अक्टूबर के महीनों के बीच आती है।

Poem on Maharaja Agrasen Jayanti

बंगले . गाडी तो ” agrawal ” की घर घर
की कहानी हैं…….

तभी तो दुनिया ” agrawal “
की दिवानी हैं.

अरे मिट गये ” agrawal ” को मिटाने वाले क्योकि आग मे
तपती ” agrawal ” की जवानी है

ये आवाज नही शेर कि दहाड़ है….. हम खडे हो जाये
तो पहाड़
है….

हम इतिहास के वो सुनहरे पन्ने है…..
जो भगवान राम ने ही चुने है….दिलदार औऱ दमदार
है” ” agrawal “

रण भुमि मे तेज तलवार है”” agrawal “
पता नही कितनो की जान है agrawal ” agrawal

सच्चे प्यार पर कुरबान है
“” ” agrawal

यारी करे तो यारो के यार है
“” ” ” agrawal “
औऱ दुशमन के लिये तुफान है
“” ” agrawal ” “”

तभी तो दुनिया कहती है बाप रे खतरनाक है
“” ” agrawal “”””

शेरो के पुत्र शेर ही ज़ाने जाते हैं, लाखो के
बीच. ” agrawal “
पहचाने जाते हैं।।

मौत देख कर किसी क़े पिछे छुपते नही ,
हम” agrawal ” ,मरने से क़भी डरते नही। हम
अपने आप पर ग़र्व
क़रते हैं, दुशमनों को काटने का जीगरा हम रखते हैं ,

कोई ना दे हमें खुश रहने की दुआ,तो भी कोई
बात नहीं…
वैसे भी हम खुशियाँ रखते नहीं,
बाँट दिया करते हैं।

Maharaja Agrasen Jayanti Kavita Pdf Download

Poem on Maharaja Agrasen Jayanti

अग्रवंश के गौरव हैं हम,
जिगर शेर का रखते हैं !
सेवा और सहयोग की भावना, दिल में हमेशा रखते हैं !
यूँ ही नहीं सब लोग हमें, धनवान कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!
एक रुपईया एक ईंट का, हमको था संदेश मिला!
अग्रवंश के शिरोमणि का, सदियों पहले उपदेश मिला !!
इसीलिए सब लोग हमें, दिलदार कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!
ग्राम विकास या नगर विकास, रहते हैं सबसे आगे !
बड़े बड़े नेता और मंत्री, झुकते हैं अपने आगे !
घर को हमारे, राजा का दरबार कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!
माँस और मदिरा से रहते, बचपन से ही दूर सदा !
हमको अपनी विरासत में, पूर्वजों से संस्कार मिला !!
अनजाने भी पहली नजर में, गुणवान कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!
रजवाड़ों का खून है, और रजवाड़ों सी शान है !
हमको अपने कुल गोत्र पर, सदियों से अभिमान है !!
बिन कुर्सी के,
लोग हमें सरकार कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!

अग्रवंश शिरोमणि, छत्रपति महाराजा श्री श्री 1008 श्री अग्रसेन जी महाराज की जय।।
अग्रवंश जननी माता माधवी रानी की जय।।
कुल देवी माता लक्ष्मी की जय।।
जय अग्रसेन जय अग्रोहा जय अग्रवाल

महाराजा अग्रसेन जयंती कविता

ऊपर हमने आपको श्री अग्रसेन जयंती पोएम, Agrasen Jayanti poem Gujarati Agroha, अग्रसेन जयंती की कविता, agrasen maharaj poem, agrawal community, Poem on Maharaja Agrasen Jayanti par kavita, आदि की जानकारी किसी भी भाषा जैसे Hindi, हिंदी फॉण्ट, मराठी, गुजराती, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language व Font में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection जिसे आप अपने स्कूल व सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|

द्वापर युग का अंत हुआ तब अग्रसेन जी का जन्म हुआ
राम राज्य के पदचिन्हों पर ही इनका भी हर कदम हुआ
यज्ञ में पशु बलि देखकर पशुओं के प्रति जब उपजा प्यार
पशु बलि का तब से ही कर दिया उन्होंने बहिष्कार
धर्म क्षत्रिय त्याग उन्होंने वैश्य धर्म को अपनाया
लक्ष्मी माँ का पूजन करके धाम अग्रोहा बसवाया
युद्ध मे महाभारत के भी दिया पांडवों का ही साथ
विवाह हुआ था उनका नागराज पुत्री माधवी के साथ
एक रूपए और एक ईंट का दिया उन्होंने नारा था
हम सब एक बराबर कहकर सबको दिया सहारा था
पुत्र अठारह थे उनके जिनसे कुछ संकल्प करवाये थे
ऋषि मुनियों से इसी लिए उन्होंने यज्ञ भी करवाये थे
संकल्पों के अनुरूप उन्होंने अठारह गोत्र दिये
धन उपार्जन के भी उन सबको रास्ते नए नए दिए
न्यायप्रियता और दयालुता थी भरी हुई उनमे भरपूर
कर्मठता और क्रियाशीलता का मुख पर दिखता था नूर
इतिहास रचा उन्होंने अपनी अलग बनाई थी पहचान
मान मिला जग में उनको सबने माना जैसे भगवान
नाम गोत्र अठारह के भी दिए उन्होंने बहुत ही सुंदर
गर्ग गोयल गोइन बंसल कंसल सिंघल धारण मंदल
तिंगल ऐरन जिंदल मंगल नांदल भंदल मित्तल बिंदल
मधुकुल और कुच्छल रहें सभी यहां पर एकजुट होकर
इन सबके मिलकर रहने से अग्रवाल समाज में मंगल हैं
यही बनाते अपने भारत का और सुनहरा हर कल हैं
अश्विन शुक्ल की प्रतिप्रदा को जयंती इनकी हम मनाते हैं
भव्य भव्य आयोजन करके पूजा पाठ करवाते हैं
अग्रवाल होने का हमको गर्व बहुत है अपने पर
अग्रसेन के आदर्शों पर हम दिखलायेंगें चलकर

Agrasen Jayanti Kavita in Hindi

वैश्य जाती में प्रतिष्ठित अग्रवाल का वर्ग,
गोत्र अठारह में प्रथम नोट कीजिए गर्ग,
नोट कीजिए गर्ग कि कुच्छल, तायल, तिंगल,
मंगल, मधुकूल, ऐरण, गोयन, बिंदल, जिंदल,
कहीं कहीं है नागल, धारण, भंदल, कंसल,
अधिक मिलेंगे मित्तल, गोयल, सिंहल, बंसल,
यह सब थे अग्रसेन के पुत्र दूलारे,
हम सब उनके वंशज है, वे पूज्य हमारे |

नाम अग्रवाल क्यों?
“न दौलत पर नाज़ करते है”
“न शोहरत पर नाज़ करते है”
“किया माता माधवी-अग्रसेन जी ने अग्रवाल के घर पेद्‍दा”
“इसलिए अपने कर्म पर प्रारम्भ से विस्वास करते है”,
“अत: मानव कल्याण के लिए धर्मशाला, हास्पिटल आदि का निर्माण करते है”
इसलिए अग्रवाल कहलाते है |

Maharaja Agrasen Kavita

माथे पे अग्रोहा का चंदन मैं लगाने आया हूँ ।
एक परोपकारी राजा का मैं वंदन करने आया हूँ |
किया जिसने खुद को समाज को समर्पित ।
उस महाराज अग्रसेन को मैं नमन करने आया हूँ |

 

जिसके ह्रदय में दूसरे का हित बसता है,
उनको जगत में कुछ भी दुर्लभ नहीं है
जो अपने जैसा दूसरों को भी सुखी देखने की कामना रखते है,
उनके पास रहने से विद्या प्राप्त होती है
और अज्ञान का अंधकार दूर होता है

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

Copyright © 2018 Hindiguides.in

To Top