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Gandhi Jayanti Speech 2019 – 150th Gandhi Jayanti Speech in Hindi & Marathi – गांधी जयंती पर भाषण

2 October Gandhi Jayanti hindi Speech

Gandhi jayanti 2019: गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को पूरे भारत में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में मनाई जाती है। गांधी जयंती राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है, जिसे बापू भी कहा जाता है। 2 अक्टूबर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। यह स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, समुदायों, समाज और अन्य स्थानों में कई उद्देश्यपूर्ण गतिविधियों का आयोजन करके मनाया जाता है। इस दिन, पूरे भारत में सरकारी कार्यालय, बैंक, स्कूल, कॉलेज, कंपनियां आदि बंद रहते हैं लेकिन इसे बहुत उत्साह और बहुत सारी तैयारियों के साथ मनाया जाता है।

Gandhi jayanti hindi speech

गांधी जयंती मुख्य रूप से महात्मा गांधी को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। उन्होंने ब्रिटिश शासन से भारतीय स्वतंत्रता के लिए बहुत संघर्ष किया था। 2 अक्टूबर का यह दिन का महत्व महान है- इसे अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी जाना जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने महात्मा गांधी जी को सम्मान देने के लिए विश्व भर में अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए 15 जून 2007 को इसे लागू करने का फैसला किया|

राष्ट्र पिता महात्मा गांधी विश्व प्रसिद्ध व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे, जो सत्य, शांति, अहिंसा और सादगी के प्रतीक के रूप में हैं। हम हर साल 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में उनका जन्मदिन मनाते हैं और इसीलिए हम इसे “गांधी जयंती” कहते हैं। इस शुभ दिन पर, गांधी जयंती उत्सव राजघाट में “महात्मा गांधी के स्मारक” में मनाया जाता है जहां हमारे देश के प्रतिष्ठित लोग बापू के संस्कारित स्थान पर फूल मालायें चढ़ाते हैं और उनके पसंदीदा भक्ति गीत “रघुपति राघव राजा राम ” आमतौर पर उनकी स्मृति में गाए जाते हैं।

2 अक्टूबर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। इसे ऐतिहासिक अवसरों में से एक माना जाता है। इस दिन ‘शराब बेचने‘ जैसी सभी बुरी गतिविधियों को सख्ती से प्रतिबंधित किया जाता है क्योंकि गांधी जी हमेशा धूम्रपान और शराब पीने के खिलाफ थे| गांधीजी के अनुसार, आज़ादी प्राप्त करने के लिए सच्चाई और अहिंसा को ही एकमात्र साधन मानते थे। वह कई बार जेल भी गए। महात्मा गांधी हमेशा सामाजिक असमानता और अस्पृश्यता के खिलाफ विश्वास करते थे।

गाँधी जयंती मनाने से पहले कई तैयारी की जाती है। दुनिया भर में जन जागरूकता फैलाने के लिए कई अभियान चलाये जाते हैं। अधिकांश गतिविधियों में राज घाट और नई दिल्ली में सरकारी अधिकारियों द्वारा प्रार्थना, श्रद्धांजलि दी जाती है इसके आलावा प्रार्थना सभाएं और स्मारक समारोह भी आयोजित किए जाते हैं।

Gandhi jayanti speech in hindi

सभी माननीय, आदरणीय प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण और मेरे प्यारे दोस्तों आप सभी को सुबह का नमस्कार। मेरा नाम राहुल है, मैं कक्षा 7 में पढ़ता हूँ। मैं गाँधी जयंती के अवसर पर एक भाषण देना चाहूँगा। सबसे पहले मैं अपने क्लासटीचर को धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने इतने महान अवसर पर भाषण देने के लिये मुझे मौका दिया। जैसा कि हम सभी जानते है कि हर साल 2 अक्टूबर को महात्मा गाँधी का जन्मदिन मनाने के लिये हम सब इकट्ठा होते हैं। मेरे प्यारे दोस्तों, गाँधी जयंती केवल अपने देश में ही नहीं मनाया जाता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में पूरे विश्व भर में मनाया जाता है क्योंकि वह अपने पूरे जीवनभर अहिंसा के एक पथ-प्रदर्शक थे।

उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी है हालाँकि वह बापू और राष्ट्रपिता तथा महात्मा गाँधी के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इस दिन पर, नयी दिल्ली के राजघाट पर महात्मा गाँधी को उनके समाधि स्थल पर भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के द्वारा प्रार्थना, फूल, भजन आदि के द्वारा श्रद्धाजलि अर्पित की जाती है। गाँधी जयंती भारत के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में गाँधी को याद करने के लिये मनायी जाती है जिन्होंने हमेशा सभी धर्मों और समुदायों को एक नजर से सम्मान दिया। इस दिन पर पवित्र धार्मिक किताबों से दोहा और प्रार्थना पढ़ा जाता है खासतौर से उनका सबसे प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम”। देश में राज्यों के राजधानियों में प्रार्थना सभाएँ रखी जाती है। जैसा कि भारत सरकार के द्वारा इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश के रुप में, सभी स्कूल, कॉलेज, कार्यालय आदि पूरे देश में बंद रहते हैं।

महात्मा गाँधी एक महान व्यक्ति थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी को प्राप्त करने में बहुत संघर्ष किया और एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। वह ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत के लिये आजादी प्राप्त करने के अहिंसा के अनोखे तरीके के केवल पथ-प्रदर्शक ही नहीं थे बल्कि उन्होंने दुनिया को साबित किया कि अहिंसा के पथ पर चलकर शांतिपूर्ण तरीके से भी आजादी पायी जा सकती है। वह आज भी हमारे बीच शांति और सच्चाई के प्रतीक के रुप में याद किये जाते हैं।

जय हिन्द

धन्यवाद

Gandhi jayanti english speech

Gandhi jayanti speech in odia

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य, प्रिय शिक्षकों और मेरे सहपाठी छात्रों आप सभी का आज के इस कार्यक्रम में हार्दिक स्वागत है।

मैं सार्थक पांडेय कक्षा दसवीं वर्ग सी का छात्र हूँ और आज गाँधी दिवस के इस शुभ अवसर पर आप सबके सामने भाषण देने को अपना सौभाग्य समझता हूँ। यह बताने की जरुरत नही है कि भारत के स्वाधीनता संघर्ष में महात्मा गाँधी का योगदान कितना बड़ा है। मेरी इस बात से आप में से शायद ही कोई इंकार कर सकता है। साधरणतः हम महात्मा गाँधी को बापू के नाम से भी जानते है, उनके महान चरित्र और व्यक्तित्व के विषय में जितनी भी बात की जाये कम है।

उनका जन्म अक्टूबर सन् 1869 को वर्तमान गुजरात प्रदेश के पोरबंदर मे हुआ था और उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। वह सन् 1900 में भारत के सबसे महानतम स्वाधीनता सेनानियों में से एक थे। यह वह समय था, जब उन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन की बागडोर संभाली और देश को स्वतंत्रता प्राप्ति की ओर अग्रसर किया। जैसा कि हम सब जानते है कि अंग्रेजो ने हमारे देश पर लगभग 250 वर्षो तक राज किया, पर उनके इस राज की नीव हिलनी तब शुरु हुई, जब 1915 में बापू दक्षिण अफ्रीका से लौटे और गोपाल कृष्ण गोखले के कहने पर देश में चल रहे स्वाधीनता संघर्ष की बागडोर संभाली। उनके इस त्याग का अंदाजा हम इसी बात से लगा सकते हैं कि देश और समाज के भलाई के लिए। उन्होंने वकालत जैसे प्रतिष्ठित पेशे को छोड़ने में भी संकोच नही किया।

स्वाधीनता संघर्ष में उनके योगदान को किसी भी तरीके से कम नही आंका जा सकता है और ना ही इसे शब्दों में बयान किया जा सकता है। हम कह सकते हैं कि बापू ने शहीद भगत सिंह, लाल बहादुर शास्त्री, सुभाष चन्द्र बोस, सरोजनी नायडू, लाला लाजपत राय, और दूसरे अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर अंग्रेजो को हमारा देश छोड़ने पे मजबूर कर दिया था। उनकी कई सारी नीतियां खासतौर से अहिंसा नीति देश के आजादी में सबसे बड़ा हथियार साबित हुई। अपने इन्हीं कारगर नीतियों के वजह से वह देशभर में लोगो के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनें।

यह प्रथम विश्व युद्ध का समय था और उस वक्त के भारत के वायसराय लार्ड चेस्टफोर्ड ने महात्मा गाँधी को युद्ध के विषय में चर्चा करने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया तथा उनसे अपील की वह अधिक से अधिक भारतीय लोगो को सेना में शामिल होने के लिए कहें। इस बात पर अंग्रेजी हुकूमत का विश्वास हासिल करने के लिए उन्होंने लोगो से प्रथम विश्व युद्ध के लिए सेना में शामिल होने के लिए कहा, लेकिन इसके साथ ही अपने एक व्यक्तिगत खत में उन्होंने वायसराय से कहा कि “वह किसी को भी जान से मारने के लिए नही कहेंगे चाहे वह दोस्त हो या दुश्मन”।

गुजरात में खेड़ा नामक एक गांव हैं, यह सन् 1917 की बात है जब वहां भीषण बाढ़ आई हुई थी, जिससे उस क्षेत्र में हालात काफी खराब हो गये थे। इन्हीं कारणों से स्थानीय किसानों ने उच्च अधिकारियों से कर माफ करने का निवेदन किया परन्तु अंग्रेजी हुकूमत द्वारा उनकी इन मांगो को अस्वीकार कर दिया गया। जिसके बाद गाँधी जी ने किसानो के समर्थन में कर ना देने के लिए आंदोलन किया। इसके साथ ही उन्होंने तालददार और मालतदार जैसे राजस्व अधिकारियों के सामाजिक बहिष्कार का भी आंदोलन किया था। गाँधी जी के इन्हीं प्रयासों के चलते सन् 1918 में अंग्रेजी सरकार को विवश होकर किसानों की मांगो का मानना पड़ा और जब तक आकाल की समस्या समाप्त ना हो जाये, तब तक उन्हें करों में छूट देने के लिए तैयार होना पड़ा।

स्वाधीनता संघर्ष में सक्रिय रहने के साथ ही गाँधी जी ने छुआछूत, लिंगभेद के साथ अन्य कई सामाजिक महत्वपूर्ण विषयों जैसे किसानों के दयनीय स्थिति को सुधारने तथा महिला सशक्तिकरण के मामलो पर सुधार के लिए भी काफी कार्य किया।

इसके साथ ही सबसे दिलचस्प बात यह है कि वह आल इंडिया मुस्लिम लीग कांफ्रेस के मुख्य प्रवक्ताओं में से एक थे। एक तरह से गाँधी जी एक सर्वमान्य नेता थे और खिलाफत आंदोलन में उनके सहभागिता ने उन्हें हर वर्ग का राष्ट्रीय नायक बना दिया। यह उनके द्वारा किए गये नमक स्तयाग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन और असहयोग आंदोलन जैसे अहिंसक आंदोलन ही थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की कमर तोड़ने का कार्य किया। जिसके चलते अंग्रेजी हुकूमत को भारत को स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए विवश होना पड़ा।

अंत में हम यहीं कह सकते हैं कि वह एक महान क्षमता तथा योग्यता के धनी व्यक्ति थे और अपने नेतृत्व कौशल से उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में एक अहम भूमिका निभाई थी। देश के स्वतंत्रता संघर्ष में, उनके इस योगदान के चलते हम और हमारे देश की आने वाली पीढ़ीया सदैव उनकी ऋणी रहेंगी। उनके बलिदान को ना ही हम भूले हैं ना ही इसे कभी भूल सकते हैं।

मेरे इस भाषण को इतने धैर्यपूर्वक सुनने और अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद!

2 october gandhi jayanti speech in marathi

1. परिचय:

सत्य आणि हिंसा किंवा चर्चा चर्चा प्रेम त्याच्या सर्व स्वत: च्या संन्यास घेणे महात्मा एक महान नेते दुचाकी किंवा यशस्वी सुधारक नाव, नंतर नाव महात्मा गांधी आम्ही राष्ट्र सर्व बापू आणि आदर प्रेम जे असणे आवश्यक आहे म्हणतात.

2. जन्म आणि शिक्षण:
महात्मा गांधी, 2 ऑक्टोबर रोजी जन्म झाला, 1869 ए. गुजरातमध्ये पोरबंदर नावाच्या ठिकाणी आली. त्यांचे पूर्ण नाव मोहनदास करमचंद गांधी आहे, वडिलांचे नाव करमचंद आणि Putlibai आईचे नाव होते. त्यांच्या आई गांधी आणि वडील संस्कार प्रभाव त्यांना न्यायासाठी लढा प्रेरणा.

ते बालपण आणि प्रामाणिक निसर्ग साधा दृश्य होते. त्यांचे शालेय शिक्षण राजकोट केले. ते लहानपणापासून कस्तुरबा म्हणतात मुलगी लग्न केले. लग्न त्यांच्या शिक्षण एक अडथळा होती पण त्याच शाळेत आणि काम त्यांनी मेट्रिक पूर्ण यश आले. मग ते कायद्याने इंग्लंड परीक्षा उत्तीर्ण.

3. उपक्रम:
1891 अँजेलो. ते भारतात सराव होते आणि मुंबई (मुंबई) परतला कारण ते अयशस्वी झाले आहेत असे मी म्हणत नाही आहे. ते त्यांना बाधणार नाही. 1893 पासून ई (बाबतीत) मध्ये एक खटला ते दक्षिण आफ्रिका आणि विजय जिंकली. तेथे त्याने एक संघटना बांधली आणि भारतीय संघ अधिकार निदर्शनास आणून दिले.

आणि पासून 1915 ए. भारतात 1919 (नेतृत्व) काँग्रेस पक्ष सूत्रे परत केली आणि 1920 मध्ये केले होते अँजेलो. तो इंग्रजी दडपशाही विरोधात चळवळ आहे आणि सामाजिक सुधारणा कार्य सुरू. असहकार चळवळ (नॉन सहकार्य चळवळ), सविनय कायदेभंग चळवळ (मुख्य नागरी-कायदेभंग चळवळी) आणि भारत चळवळ (भारत छोडो) इत्यादी बाहेर पडा ..

आपण (जलद मरणाला) म्हणाला-मृत्यू कैदी म्हणून नेले आणि अनेक वेळा खर्च अनेक वर्षे. महात्मा गांधी यांच्या शेवटी संपत प्रयत्न; 15 ऑगस्ट 1947 ई. व्हा भारत स्वतंत्र. तो नंतर समाज गोळीबाराला सुरुवात केली पण Nathu राम गोडसे, su धार 30 जानेवारी 1948 त्याचे जीवन घेणे.

4. निष्कर्ष:
कोणत्या सरकारी कार्यालये गांधीजींच्या कल्पना तारीख आठवण करून देखील इतर ठिकाणी त्याच्या चित्र ठेवले आहे. आमच्या मनात (सत्य), साधेपणा (साधेपणा) मध्ये सत्य लक्षात करण्यासाठी, आत्मविश्वास (आत्मविश्वास) आणि सभ्यपणा (चांगले आचार) एक अर्थ होतो.

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A very good morning to the excellencies, respected Principal sir, teachers and my dear colleagues. My name is … I study in class … standard. I would like to recite a speech on Gandhi jayanti. First of all I would like to say a big thank to my class teacher for giving me an opportunity to speech on this great occasion. As we all know that we gathered here every year to celebrate 2nd October, the birth anniversary of Mahatma Gandhi. My dear friends, Gandhi Jayanti is not celebrated only in our country however it is celebrated as an event all over the world. 2nd of October is celebrated as Gandhi Jayanti in India however as International Day of Non-Violence all across the world as he was a preacher of non-violence throughout his life.

His full name is Mohandas Karamchand Gandhi however popularly known as Bapu, Mahatma Gandhi or Father of the nation. He was born on 2nd October in 1869 at Porbunder, Gujrat. At this day, the President and Prime Minister of India pay homage to the Mahatma Gandhi’s statue at his samadhi by offering prayer, flowers, bhajans, devotional songs, etc at the Raj Ghat, New Delhi. Gandhi Jayanti is celebrated in almost all the states and territories of India in order to commemorate the person who always respected the people of all the religions and communities in same manner. At this day, verses and prayers from religious holy books are read out especially his favorite ones like “Raghupati Raghava Raja Ram”. Prayer meetings are also held in various state capitals in the country. As this day has been declared as the national holiday by the government of India, all the schools, colleges, offices, etc remain closed throughout the country.

Mahatma Gandhi was a great person who struggled a lot and played a significant role in the achievement of freedom for India from British rule. He not only pioneered the unique method of non-violence to get freedom for India against British rule but also proved the world that freedom can be achieved peacefully through the path of non-violence. He is still remembered among us as the symbol of peace and truth.

Jai Hind

Thank You

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