Poem (कविता)

गर्मी पर कविता – Summer Season Poems in Hindi – ग्रीष्म ऋतु – गर्मी का मौसम

Summer Season Poems in Hindi
Written by admin

गर्मी या ग्रीष्म ऋतू हर साल बसंत के खत्म होने के बाद शुरू हो जाती है तथा इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार यह अप्रैल माह के बाद से शुरू हो जाते है | ग्रीष्म ऋतू में छोटे बच्चो की स्कूलों की छुट्टी हो जाती है और बच्चे बड़े आनंद से उन छुट्टियों को मनाते है और बहुत ही अच्छे तरीके से इस ऋतू को मनाते है | इसके लिए हमारे कई महान कवियों ने गर्मी के कुछ बेहतरीन कविताये लिखी है अगर आप उन कविताओं को जानना चाहते है तो इसके लिए आप हमारी इस पोस्ट के माध्यम से जान सकते है |

गर्मी के मौसम पर कविताएं

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कपड़े सूख रहे हैं
हज़ारों-हज़ार
मेरे या न जाने किस के कपड़े
रस्सियों पर टँगे हैं
और सूख रहे हैं
मैं पिछले कई दिनों से
शहर में कपड़ों का सूखना देख रहा हूँ
मैं देख रहा हूँ हवा को
वह पिछले कई दिनों से कपड़े सुखा रही है
उन्हें फिर से धागों और कपास में बदलती हुई
कपड़ों को धुन रही है हवा
कपड़े फिर से बुने जा रहे हैं
फिर से काटे और सिले जा रहे हैं कपड़े
आदमी के हाथ
और घुटनों के बराबर
मैं देख रहा हूँ
धूप देर से लोहा गरमा रही है
हाथ और घुटनों को
बराबर करने के लिए
कपड़े सूख रहे हैं
और सुबह से धीरे-धीरे
गर्म हो रहा है लोहा।

गर्मी पर बाल कविता

तपा अंबर
झुलस रही क्यारी
प्यासी है दूब।
सुलगा रवि
गरमी में झुलसे
दूब के पांव।
काटते गेहूं
लथपथ किसान
लू की लहरी।
रूप की धूप
दहकता यौवन
मन की प्यास।
डूबता वक्त
धूप के आईने में
उगता लगे।
सूरज तपा
मुंह पे चुनरिया
ओढ़े गोरिया।
प्यासे पखेरू
भटकते चौपाये
जलते दिन।
खुली खिड़की
चिलचिलाती धूप
आलसी दिन।
सूखे हैं खेत
वीरान पनघट
तपती नदी।
बिकता पानी
बढ़ता तापमान
सोती दुनिया।
ताप का माप
ओजोन की परत
हुई क्षरित।
जागो दुनिया
भयावह गरमी
पेड़ लगाओ।
सुर्ख सूरज
सिसकती नदियां
सूखते ओंठ।
जलते तृण
बरसती तपन
झुलसा तन।
तपते रिश्ते
अंगारों पर मन
चलता जाए।
दिन बटोरे
गरमी की तन्हाई
मुस्काई शाम।

Short Summer Poems in Hindi – गर्मी पर छोटी कविता

गर्मी आई गर्मी आई,
धूप‍‍‍ पसीना लेकर आई।
सूरज सिर पर चढ़ आता है,
अग्नि के बम बरसाता है।
मुझे नहीं यह बिलकुल भाई।
गर्मी आई गर्मी आई।
चलो बरफ के गोले खाएं,
ठेले से अंगूर ले आएं।
मम्मी दूध मलाई लाई।
गर्मी आई गर्मी आई।

ग्रीष्म ऋतु

Garmi Par Kavita in Hindi

गर्मी का मौसम है आया
सबको इसने बहुत सताया,
आसमान से आग है बरसे
सूरज ने फैलाई माया।
कूलर, पंखे, ए.सी. चलते
दिन भी न अब जल्दी ढलते,
पल भर में चक्कर आ जाते
थोड़ी दूर जो पैदल चलते।
जून का है जो चढ़े महीना
टप टप टप टप बहे पसीना,
खाने का कुछ दिल न करता
मुश्किल अब तो हुआ है जीना।
सूखा है जल नदियों में
पंछी है प्यासा भटक रहा,
कहीं छाँव न मिलती है उसको
देखो खम्भे पर लटक रहा।
कुल्फी वाला जब आता है
हर बच्चा शोर मचाता है,
खाते हैं सब बूढ़े बच्चे
दिल को ठंडक पहुंचाता है।
सूनी गलियां हो जाती हैं
जब सूर्या शिखर पर होता है,
रात को जब बली गुल हो
तो कौन यहाँ पर सोता है?
न जाने ये है कहाँ से आया
हमने तो इसको न बुलाया,
परेशान इससे सब हैं
ये किसी के भी न मन को भाया।
गर्मी का मौसम है आया
सबको इसने बहुत सताया,
आसमान से आग है बरसे
सूरज ने फैलाई माया।

Summer Vacation Poems in Hindi – Poem on Summer Vacation in Hindi

बचपन में देखा कि
गर्मी ऊन में होती है,
स्कूल में पता चला
कि गर्मी जून में होती है,
पापा ने बताया कि
गर्मी खून में होती है,
बहुत जिन्दगी में थपेड़े खाये
तब पता चला कि
गर्मी न खून, न जून, न ऊन में होती है,
जनाब,
गर्मी तो जुनून में होती है।

Short Poems in Hindi on Summer Season

कम करती है गर्मी की मनमानी को
गहराई ज़िन्दा रखती है पानी को
दूरी आंधी बर्फ़ धूप की बाधाएँ
रोक नहीं सकती सच्चे सैलानी को
याद नहीं रहते या याद नहीं रखते
लोग आजकल संबंधों के मानी को
वाणी द्वारा कम आँखों द्वारा ज़्यादा
व्यक्त किया उसने अपनी हैरानी को
प्रजातंत्र में भी बच्चों के किस्से ही
ज़िंदा रखते हैं राजा या रानी को
लोग आंकड़ों को ही ज्ञान समझ बैठे
कम्प्यूटर जैसा कुछ समझे ज्ञानी को
क्या भूलूँ क्या याद करूँ की उलझन में
अलबम रखते हैं हम याद-दहानी को

गर्मी पर कविता

Summer Holidays Poems in Hindi – गर्मी की छुट्टियों पर कविता

गरमी भारी
चैन न मिलता
चुभे लपट
बन तीर।
बंदर से
बोली घरवाली
चलो चलें कश्मीर।
तन से बहे पसीना खारी
क्या होगा ओ राम।
बोला गीदड़ आग लगी हैकहां करें विश्राम॥
भालूजी की गले की हड्डी
बनी रजाई खूब।
नहीं हटाई जाती तन से
गरमी लाती ऊब॥
कौआ कांव-कांव चिल्लाता
नहीं घड़े में नीर।
कंकड़ डाल-डाल के हारा
छूटा मन का धीर॥
गधेमलजी मस्त हुए हैं
रोज लगाते लोट।
कहते लोग व्यर्थ चिल्लाते
गरमी के मन खोट॥

गर्मी ऋतु पर कविता

स्कूल की दूर हुई भागम-भगाई
गर्मी की लो छुट्टी आई।
आराम से उठ मैनें ली अंगड़ाई
गर्मी की लो छुट्टी आई।
मम्मी नहीं आज मुझ पर चिल्लाई
गर्मी की लो छुट्टी आई।
पिकनिक पर जा सब मौज मनाई
गर्मी की लो छुट्टी आई।
हाहा ठीठी संग करी मिल भाई
गर्मी की लो छुट्टी आई।
जमकर खेला लूडो, आई-स्पाई
गर्मी की लो छुट्टी आई।
टीवी, वीडियो से पापा ने पाबंदी हटाई
गर्मी की लो छुट्टी आई।

गर्मी पर हास्य कविता

ओ सूरज भगवान क्यों करते परेशान
इतने गरम क्यों होते कि निकले सबकी जान,
क्यों तरस न हम पर करते
हम पल-पल गर्मी में मरते
गलियाँ सूनी पड़ जातीं
जब तुम हो शिखर पर चढ़ते,
राहत कैसे हम पायें
कुछ देदो हमको ज्ञान
ओ सूरज भगवान क्यों करते परेशान
इतने गरम क्यों होते कि निकले सबकी जान।
जो बिजली चली जाती पल में गीले हो जाते
फिर काम न होता कोई सब लोग ढीले हो जाते
कभी गलती से जो मौसम बदले
पाकर बारिश का पानी फिर सब छैल छबीले होते,
पर जब रूप दिखाते अपना
दुविधा में पड़ता सारा जहान
ओ सूरज भगवान क्यों करते परेशान
इतने गरम क्यों होते कि निकले सबकी जान।

गर्मी का मौसम

Garmi Poem in Hindi

तपता सूरज लू चलती है
हम सब की काया जलती है।
गर्मी आग का है तंदूर
इससे कैसे रहेंगे दूर।
मन करता हम कुल्फ़ी खाएँ
कूलर के आगे सो जाएँ।
खेलने को हम हैं मज़बूर
खेलेंगे हम सभी ज़रूर।
पेड़ों की छाया में चलकर
झूला झूल के आएँगे।
फिर चाहे कितनी हो गर्मी
इससे ना घबराएँगे।।

Hindi Poem on Garmi Ka Mausam

तुम अपने कैनवास पर
बनाओ एक चित्र
गर्मी की दुपहरी का
रंग अपनी पसन्द के भरो
पर गर्मी में ताप होना चाहिए
और दुपहरी में अलसायापन
धारीदार जांघिया पहने बच्चे
तख्ती-सा मुल्तानी मिट्टी से
पुता हुआ बदन जिस पर
कोलतार से तुम लिख सकते हो
एक दुपहरी गर्मी की
अगर तुम्हारा कैनवास बड़ा हो
तुम दिखा सकते हो
प्याज और आम का अचार
सूखी रोटियाँ और ठंडा पानी
अगर तुम पैदा कर सको
भूने हुए चनों और जौं की गंध
तब तुम्हारा कैनवास बन जाएगा
एक घर गर्मी की दुपहरी में

Garmi Aayi Garmi Aayi Poem In Hindi – Short Poem on Grishma Ritu in Hindi

गर्मी आई गर्मी आई
पंखे कूलर कुल्फी लाई।
सूरज दादा लगे भड़कने
धूप करारी लगी कड़कने,
दरखत की छाया मन भाई
गर्मी आई गर्मी आई
सूनी सड़कें सूनी गलियाँ
बंद दरवाजे खुली खिड़कियाँ,
दोपहरी में बंद घुमाई
गर्मी आई गर्मी आई।
बाहर जाना ही आफत है
घर के अन्दर कुछ राहत है,
बिन बिजली सांसें घबराई
गर्मी आई गर्मी आई।
अमरस शरबत और ठण्डाई
आईसक्रीम सबके मन भाई
‘कुल्फी लूं’ मुन्नी चिल्लाई
गर्मी आई गर्मी आई।

ग्रीष्म ऋतु पर कविता हिंदी में

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काली घटा गगन में छाई मंद हुआ भूतल पर ताप
रिमझिम रिमझिम पानी बरसा इधर उधर है उस की छाप॥
पवन झोरता है डालों को टपक रहे हैं जामुन आम
बच्चों, दौड़ो,आम उठाओ, आज जामुनों का क्या काम॥
दीन हीन बच्चे ही जामुन बीन रहे पा कर संकेत
आम समीप गिरे न छुवेंगे भली भाँति है उनको चेत॥
रंग रंग के किस्म किस्म के एक एक भूरूह के नाम
समझ बूझ से रखे गए हैं फल ही पहुँच पाएँगे धाम॥
कच्चे पके आम जैसे हों इनका होता है उपयोग
खाएँ और खिलाएँ सब को अगर बाग् का है संजोग॥

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