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हैप्पी कृष्ण जन्माष्टमी पर कविता | Krishna Janmashtami Poem in Hindi & English | Pdf Download

krishna Janmashtami poem In english

कृष्ण जन्माष्टमी 2020: श्री कृष्ण को भगवान विष्णु के सबसे शक्तिशाली मानव अवतारों में से एक माना जाता है। उनका जन्म 5,200 साल पहले मथुरा में हुआ था। श्रीकृष्ण के जन्म का एकमात्र उद्देश्य पृथ्वी को राक्षसों की बुराई से मुक्त करना था। उन्होंने महाभारत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भक्ति और अच्छे कर्म के सिद्धांत का प्रचार किया जो भागवत गीता में गहराई से वर्णित है| -श्रीकृष्ण का जन्म कंस के संरक्षण में जेल में हुआ था। वासुदेव, उनके पिता ने तुरंत अपने दोस्त नंद के बारे में सोचा और कृष्ण को कंस के चंगुल से बचाने के लिए अपने बच्चे को उन्हें सौंपने का फैसला किया। कृष्ण गोकुल में पले बढ़े और अंत में अपने चाचा राजा कंस को मार डाला।

Janmashtami Poem in Hindi

कृष्ण जन्माष्टमी कब की है: इस वर्ष कृष्णा जन्माष्टमी 24 अगस्त शनिवार को है|

तेरे प्रेम के सहारे…
मेरी साँस अब चलेगी,
जो तू नहीं तो कान्हा,
ये प्राण भी न होंगे…
हम तो तेरे दीवाने ,
तेरे प्रेम के पुजारी…
तेरे लिए जिए हैं,
तेरे लिए जिएँगे…
मेरी बाँह अब पकड़ लो…
मुझे प्रेम से जकड़ लो,
ये प्रेम की डगर पे
जो चल पड़े कदम हैं….
तेरी शपथ है बाँके
ये अब तो न रुकेंगे

कृष्ण जन्माष्टमी पर कवितायें

नैन लख्यो जब कुंजन तैं, बनि कै निकस्यो मटक्यो री।
सोहत कैसे हरा टटकौ, सिर तैसो किरीट लसै लटक्यो री।
को ‘रसखान कहै अटक्यो, हटक्यो ब्रजलोग फिरैं भटक्यो री।
रूप अनूपम वा नट को, हियरे अटक्यो, अटक्यो, अटक्यो री॥
जय जय श्री राधे !

कृष्ण जन्माष्टमी पर कविता

नन्हे कन्हैया छोटी दंतिया दिखाए
पग घुंघरू बजाए प्यारी मुरली सुनाये।
मोर पंख मस्तक पर सुन्दर सजाये
दूध दही सम्भालो मटकी फोड़न को आये
कदंब के झूलों में वृन्दावन की गलियों में
कन्हैया को ढूँढ़ते माँ यशोदा खूब बौराए।
गोवर्धन उठाने को गोपियों संग महारास को
कालिया के मर्दन को कंस के संहार को
गीता के पाठ को घर घर गुंजाने को
कन्हैया छिप छिप के आये।
कन्हैया मंद मंद मुस्काये
कन्हैया जग में हैं आए
कन्हैया कण कण समाये।

Janmashtami Kavita in Hindi

बांसुरी वादन से, खिल जाते थे कमल
वृक्षों से आंसू बहने लगते,
स्वर में स्वर मिलाकर, नाचने लगते थे मोर ।
गायें खड़े कर लेतीं थी कान,
पक्षी हो जाते थे मुग्ध,
ऐसी होती थी बांसुरी तान… ।
नदियां कल-कल स्वरों को,
बांसुरी के स्वरों में मिलाने को थी उत्सुक
साथ में बहाकर ले जाती थी, उपहार कमल के पुष्पों के,
ताकि उनके चरणों में, रख सके कुछ पूजा के फूल ।

ऐसा लगने लगता कि, बांसुरी और नदी मिलकर, करती थी कभी पूजा
जब बजती थी बांसुरी, घनश्याम पर बरसाने लगते, जल अमृत की फुहारें
अब समझ में आया, जादुई आकर्षण का राज
जो आज भी जीवित है, बांसुरी की मधुर तान में
माना हमने भी, बांसुरी बजाना पर्यावरण की पूजा करने के समान है,
जो कि‍ हर जीव में प्राण फूंकने की क्षमता रखती,
और सुनाई देती है कर्ण प्रिय बांसुरी ।

Janmashtami Poem in English

krishna Janmashtami poem In Hind

O Krishna! you promised
Whenever a decline of righteousness will prevail
You will manifest yourself personally
Today evils have spread its trap
and morality is falling rapidly.
O Krishna! can’t you hear
The pain filled screams of poor
Can’t you see the standing walls of hatred
Greed, lies, deceit and hypocrisy are growing day by day
So many Kansas and devils are born today.
Cows of our country are cut in slaughterhouses
Farmers are committing suicide in narrow circumstances
Journals are filled with rapes, murders and corruption
Increasing crimes are leading us towards destruction.
To stir the universal consciousness with your flute
To overthrow all the evils from their roots
To bring out our chariot wheels stuck in the slime
Please come again to held the chariot for bridle of our life.
Many Sudamas need your friendly affection
Many Draupadies are waiting to get your protection
We need you even more than before
Our society is sick and wants you to cure.
O Krishna! please come once and fulfill your promise
Light the flame of hope and fight for the justice
Please protect the religion and reestablish it in true sense
Destroy all sins and remove all pain.
You have to come for the protection of good
You have to come for the destruction of wicked
You have to come for the establishment of righteousness
You have to come to awaken our consciousness.
By Monika Jain ‘Panchhi’

Janmashtami Short Poems in Hindi

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बांसुरी वादन से, खिल जाते थे कमल
वृक्षों से आंसू बहने लगते,
स्वर में स्वर मिलाकर, नाचने लगते थे मोर ।
गायें खड़े कर लेतीं थी कान,
पक्षी हो जाते थे मुग्ध,
ऐसी होती थी बांसुरी तान… ।नदियां कल-कल स्वरों को,
बांसुरी के स्वरों में मिलाने को थी उत्सुक
साथ में बहाकर ले जाती थी, उपहार कमल के पुष्पों के,
ताकि उनके चरणों में, रख सके कुछ पूजा के फूल ।

Janmashtami Poem in Gujarati

ઓ કૃષ્ણ! તે વચન દીધું હતું
જ્યારે પણ પ્રામાણિકતાના ધોરણ જીતશે
તમે જાતે વ્યક્તિગત રીતે પ્રગટ થશો
આજે અનિષ્ટ તેના છટકાં ફેલાયેલ છે
અને નૈતિકતા ઝડપથી ઘટી રહ્યો છે.
ઓ કૃષ્ણ! તમે સાંભળી શકતા નથી
ગરીબોના પીડાથી ભરેલા ચીસો
તમે તિરસ્કારની સ્થાયી દિવાલો જોઈ શકતા નથી
લોભ, જૂઠ્ઠાણું, કપટ અને પાખંડ દરે દિવસે વધી રહ્યા છે
ઘણા કેન્સાસ અને ડેવિલ્સ આજે જન્મે છે.
આપણા દેશના ગાય કતલખાનામાં કાપવામાં આવે છે
સાંકડી સંજોગોમાં ખેડૂતો આત્મહત્યા કરે છે
જર્નલ્સ બળાત્કાર, હત્યા અને ભ્રષ્ટાચારથી ભરપૂર છે
વધતા ગુનાઓ આપણને વિનાશ તરફ દોરી રહ્યાં છે.
તમારી વાંસળી સાથે સાર્વત્રિક સભાનતાને જગાડવા
તેમના મૂળમાંથી તમામ દુષ્ટતાને ઉથલાવી પાડવા
અમારા રથના વ્હીલ્સને લીંબુમાં અટકી કાઢવા
અમારા જીવનના કાટમાળ માટે રથને રાખવા માટે ફરી આવો.
ઘણા સુદામાને તમારા મૈત્રીપૂર્ણ સ્નેહની જરૂર છે
ઘણા દ્રૌપદી તમારી સુરક્ષા મેળવવા માટે રાહ જોઈ રહ્યા છે
અમે તમને પહેલાં કરતાં પણ વધુ જરૂર છે
અમારું સમાજ બીમાર છે અને તમે ઇલાજ કરવા માંગે છે.
ઓ કૃષ્ણ! એકવાર આવો અને તમારું વચન પૂરું કરો
આશા માટેની જ્યોત પ્રકાશ અને ન્યાય માટે લડવું
કૃપા કરીને ધર્મની રક્ષા કરો અને તેને સાચા અર્થમાં પુનઃસ્થાપિત કરો
બધા પાપો નાશ અને બધા પીડા દૂર
તમારે સારા રક્ષણ માટે આવવું પડશે
તમે દુષ્ટ નાશ માટે આવે છે
તમારે ન્યાયીપણાની સ્થાપના માટે આવવું પડશે
તમારે અમારી સભાનતાને જાગૃત કરવી પડશે.

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