Essay (Nibandh)

मज़दूर दिवस पर निबंध – Labour Day Essay in Hindi pdf Download – मज़दूर दिवस पर कविता

Majdoor Divas Par Nibandh

labour day 2019: कई यूरोपीय देशों और यूरोपीय देशों की पूर्व कालोनियों में, प्रत्येक वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। हालांकि, अमेरिका जैसे अन्य देश हर साल सितंबर के पहले सोमवार को मजदूर दिवस मनाते हैं। मजदूर दिवस मज़दूर वर्ग, मज़दूरों, और ट्रेडमेन का एक वैश्विक उत्सव है, जिनके प्रयासों से हमारी सामाजिक और आर्थिक प्रगति की नींव पड़ती है। भारत में, हम मई के महीने की शुरुआत उन मजदूरों और श्रमिकों के प्रति समर्पण से करते हैं जो हमारे राष्ट्र के औद्योगिक विकास के पीछे बल रहे हैं।

Majdoor Divas Par Nibandh

मजदूर हमारे समाज का वह तबका है जिस पर समस्त आर्थिक उन्नति टिकी होती है । वह मानवीय श्रम का सबसे आदर्श उदाहरण है । वह सभी प्रकार के क्रियाकलापों की धुरी है । आज के मशीनी युग में भी उसकी महत्ता कम नहीं हुई है । उद्‌योग, व्यापार,कृषि, भवन निर्माण, पुल एवं सड़कों का निर्माण आदि समस्त क्रियाकलापों में मजदूरों के श्रम का योगदान महत्त्वपूर्ण होता है ।

मजदूर अपना श्रम बेचता है । बदले में वह न्यूनतम मजदूरी प्राप्त करता है । उसका जीवन-यापन दैनिक मजदूरी के आधार पर होता है । जब तक वह काम कर पाने में सक्षम होता है तब तक उसका गुजारा होता रहता है । जिस दिन वह अशक्त होकर काम छोड़ देता है, उस दिन से वह दूसरों पर निर्भर हो जाता है । भारत में कम से कम असंगिठत क्षेत्र के मजदूरों की तो यही स्थिति है । असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की न केवल मजदूरी कम होती है, अपितु उन्हें किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा भी प्राप्त नहीं होती ।

संगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति कुछ अच्छी है । उन्हें मासिक वेतन, महँगाई भत्ता, पेंशन एवं अन्य सुविधाएँ प्राप्त हैं । उनके काम करने की दशाएँ बेहतर होती हैं । कार्य के दौरान मृत्यु होने पर उन्हें विभाग की ओर से सुरक्षा प्रदान की जाती है ताकि उनका परिवार बेसहारा न हो ।

मजदूर चाहे किसी भी क्षेत्र का हो, आर्थिक क्रियाकलापों में उसकी अग्रणी भूमिका होती है । वह सड़कों एवं पुलों के निर्माण में सहयोग करता है । वह भवन निर्माण के क्षेत्र में भरपूर योगदान देता है । वह ईटें बनाता है, वह खेती में किसानों की मदद करता है । शहरों और गाँवों में उसे कई प्रकार के कार्य करने होते हैं । तालाबों, कुओं, नहरों और झीलों की खुदाई में उसके श्रम का बहुत इस्तेमाल होता है । रिक्यहचालक, सफाई, कर्मचारी, बढ़ई, लोहार, हस्तशिल्पी, दर्जी, पशुपालक आदि वास्तव में मजदूर ही होते हैं । सूती वस्त्र उद्‌योग, चीनी उद्‌योग, हथकरघा उद्‌योग, लोहा एवं इस्पात उद्‌योग, सीमेंट उद्‌योग आदि जितने भी प्रकार के उद्‌योग हैं उनमें मजदूरों की भागीदारी अपरिहार्य होती है ।

Labour Day Essay In Hindi

विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस “1 मई” के दिन मनाया जाता है। किसी भी देश की तरक्की उस देश के किसानों तथा कामगारों (मजदूर / कारीगर) पर निर्भर होती है। एक मकान को खड़ा करने और सहारा देने के लिये जिस तरह मजबूत “नीव” की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, ठीक वैसे ही किसी समाज, देश, उद्योग, संस्था, व्यवसाय को खड़ा करने के लिये कामगारों (कर्मचारीयों) की विशेष भूमिका होती है।
वर्ष 1886 में 4 मई के दिन शिकागो शहर के हेमार्केट चौक पर मजदूरों का जमावड़ा लगा हुआ था। मजदूरों नें उस समय आम हड़ताल की हुई थी। हड़ताल का मुख्य कारण मजदूरों से बेहिसाब काम कराना था। मजदूर चाहते थे कि उनसे दिन भर में आठ घंटे से अधिक काम न कराया जाए। मौके पर कोई अप्रिय घटना ना हो जाये इसलिये वहाँ पर स्थानीय पुलिस भी मौजूद थी। तभी अचानक किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भीड़ पर एक बम फेंका गया। इस घटना से वहाँ मौजूद शिकागो पुलिस नें मजदूरों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिये एक्शन लिया और भीड़ पर फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में कुछ प्रदर्शनकारीयों की मौत हो गयी। मजदूर वर्ग की समस्या से जुड़ी इस घटना नें समग्र विश्व का ध्यान अपनी और खींचा था।

इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन (the International Socialist Conference ) में ऐलान किया गया कि हेमार्केट नरसंघार में मारे गये निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों व श्रमिकों का अवकाश रहेगा।

Labour Day speech In Hindi

Labour Day Essay in Hindi pdf

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आज हम मजदूर/श्रम दिवस के बारे में चर्चा करेंगे जिसे मई दिवस भी कहा जाता है। यह हर साल 1 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है। हमारा संगठन एक निजी कल्याण संगठन है जो राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करता है। हम मूल रूप से निम्न स्तर से संबंधित श्रमिकों के विकास के लिए काम करते हैं। आज हमारे बीच बहुत प्रसिद्ध उद्योगपति भी मौजूद हैं जो इस आंदोलन का समर्थन करते हैं। दोस्तों जब भी हम श्रम शब्द सुनते हैं तो हमें कड़ी मेहनत या शारीरिक श्रम का ध्यान आता है। आज हम यहां बड़े और प्रमुख संगठनों के लिए काम करने वाले श्रमिकों के कुछ महत्वपूर्ण अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इकट्ठे हुए हैं।

ऐतिहासिक रूप से मजदूर/श्रम दिवस की शुरुआत अमेरिका में हुई थी जिसमें मजदूरों के लिए 8 घंटे के काम की वकालत करते हुए बिल पारित किया गया था और 1886 के बाद से मजदूरों या कर्मचारियों के कड़ी मेहनत का सम्मान करने के लिए श्रम दिवस का जश्न शुरू हुआ।

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कोई भी कंपनी या संगठन बिना परिश्रम नहीं चल सकती लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कंपनी के लिए काम करने वाले किसी भी कर्मचारी को नज़रंदाज किया जाए। कंपनी को 8 घंटे के काम के बाद यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मजदूरों या कर्मचारियों के साथ जाति, धर्म, पंथ, लिंग, विकलांगता आदि के आधार पर भेदभाव न किया जाए और उन्हें प्रतिस्पर्धी मजदूरी या वेतन का भुगतान होना चाहिए। इसके अलावा प्रत्येक श्रमिक पहले एक व्यक्ति है और इस प्रकार उनकी स्थिति या नौकरी को ध्यान में ना रखकर उनका सम्मान होना चाहिए।

यह भी सच है कि मजदूर हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक प्रगति की प्रेरणा शक्ति हैं। श्रमिकों के पास एक बड़ा राजनीतिक प्रभाव भी है क्योंकि कुछ श्रमिक मुद्दों ने कई राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने में मदद की है। श्रमिक कारखाने चलाने, सड़कों का निर्माण करने, इमारतें बनाने, तेल निकालने आदि अलग-अलग तरीकों से काफ़ी मदद करते हैं।

Labour Day Poem In Hindi

मजदूर हैं हम, मजबूर नहीं

चलता है परदेश कमाने हाथ में थैला तान
थैले में कुछ चना, चबेना, आलू और पिसान…
टूटी चप्‍पल, फटा पजामा मन में कुछ अरमान
ढंग की जो मिल जाये मजूरी तो मिल जाये जहान।।

साहब लोगों की कोठी पर कल फिर उसको जाना है
तवा नहीं है फिर भी उसको तन की भूख मिटाना है…
दो ईटों पर धरे फावड़ा रोटी सेंक रहा है
गीली लकड़ी सूखे आंसू फिर भी सेंक रहा है।।

धुंआ देखकर कबरा कुत्‍ता पूंछ हिलाता आया
सोचा उसने मिलेगा टुकड़ा, डेरा पास जमाया…
मेहनतकश इंसानों का वह सालन बना रहा है
टेढ़ी मेढ़ी बटलोई में आलू पका रहा है।।

होली और दिवाली आकर उसका खून सुखाती है
घर परिवार की देख के हालत खूब रूलाई आती है…
मुन्‍ना टाफी नहीं मांगता, गुड़िया गुमसुम रहती है
साहब लोगों के पिल्‍लों को देख के मन भरमाती है।।

फट गया कुरता फिर दादा का, अम्‍मा की सलवार
पता नहीं किस बात पे हो गई दोनों में तकरार…
थे अधभरे कनस्‍तर घर में थी ना ऐसी कंगाली
नहीं गयी है मुंह में उसके कल से एक निवाली।।

लगता गुड़िया की मम्‍मी ने छेड़ी है कोई रार
इसी बात पर हो गई होगी दोनों में तकरार…

दो ईटों पर धरे फावड़ा रोटी सेंक रहा है
गीली लकड़ी सूखे आंसू फिर भी सेंक रहा है।।

Majdoor Diwas Par Kavita

मैं एक मजदूर हूँ
भगवान की आंखों से मैं दूर हूँ
छत खुला आकाश है
हो रहा वज्रपात है
फिर भी नित दिन मैं
गाता राम धुन हूं
गुरु हथौड़ा हाथ में
कर रहा प्रहार है
सामने पड़ा हुआ
बच्चा कराह रहा है
फिर भी अपने में मगन
कर्म में तल्लीन हूँ
मैं एक मजदूर हूँ
भगवान की आंखों से मैं दूर हूँ ।
आत्मसंतोष को मैंने
जीवन का लक्ष्य बनाया
चिथड़े-फटे कपड़ों में
सूट पहनने का सुख पाया
मानवता जीवन को
सुख-दुख का संगीत है
मैं एक मजदूर हूँ
भगवान की आंखों से मैं दूर हूँ ।

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