Poem (कविता)

माता पिता पर कविता | Poem on Parents in Hindi

माता पिता पर कविता

माता पिता भगवान के अनमोल उपहार मे से एक हैं। इनका अपना सभी के जीवन में अलग ही महत्व है।दोनों की अपने बच्चों के पार्टी अलग ही भूमिका होती है जिनकी जगह कोई ऑर नहीं ले सकता । उनकी अपने बच्चों के प्रति कर्तव्य निस्वार्थ होते हैं ऑर वह उस कार्य को बहाली भांति निभाते भी हैं, इसलिए बच्चों का भी उनके प्रति कई फर्ज होते हैं जिनको उन्हे करना चाहिय।

हमारे जीवन में उनकी महत्वता को व्यक्त करने के लिए हम आपके लिए लेकर आए हैं ऐसी कविताएँ जिससे उन्हे गर्व महसूस होगा,ऑर साथ मे प्रसन्नता भी होगी। mummy papa par poem, maa baap se जुड़ी लाइंस, mother, poetry, काव्य नीचे  दी गई पंक्तियों में दर्शाई गई है।

कविता माता पिता को समर्पित

कभी ना छोड़ें हमारा हाथ,
हैं हुम उनके राजदुलारे,
हैं हम उनके सबसे प्यारे!!
हैं हम उनके राजकुमार,
हमसे करते हैं वो बहुत सारा प्यार,
हमेशा हमारा दयां वह रखते,
क्या हम उनसे प्यार नहीं कर सकते?
अच्छा बुरा सब दिलाया,
बुरे से हमें लड़ना सिखाया,
हैं एक फूल,
जिसकें हैं वो वनमाली!!
रखते रखते ख़याल हमारा,
उन्होनें हमारा जीवन हैं सवारा,
करते हैं रखवाली हमारी,
क्युकी हमसे हैं उनके दुनिया सारी!!
आँसू बहाकर हमें हसाया हैं,
नींदे उड़ा के हमें सुलाया हैं,
डांटकर हसाया अपने आप हैं,
दुनिया कहते उन्हें “माँ बाप” हैं!!

माता पिता का कभी साथ न छोड़ना,
दिल उनका भूलकर भी न तोडना,
बहुत कुछ सहकरके तुम्हे बड़ा किये है!!
तुम्हे अपने पैरो पर खड़ा किये है,
तुम्हारे खुशियों के अलावा कुछ न चाह रखते है,
तुम्हारे मुस्कराहट के सिवा कुछ न मांग करते है!!
माता पिता का कभी साथ न छोड़ना,
दिल उनका भूलकर भी न तोडना,
खुद से पहले तुम्हे खिलाते थे!!
जब तुम रोते थे तो खुद बच्चे बन जाते थे,
खुद जागकर तुम्हे सुलाते थे,
घुटनों में बैठ के तुम्हे चलना सिखाते थे!!
माता पिता का कभी साथ न छोड़ना,
दिल उनका भूलकर भी न तोडना,
शिक्षक बन तुम्हे पढाया!!
दर्द सहते हुए भी तुम्हे हसाया,
तुम इस ओहदे पर पहुचे हो,
तुम्हे इस काबिल बनाया!!
माता पिता का कभी साथ न छोड़ना,
दिल उनका भूलकर भी न तोडना!!

मेरी खातिर तेरा रोटी पकाना याद आता है,
अपने हाथो को चूल्हे में जलाना याद आता है।
वो डांट-डांट कर खाना खिलाना याद आता है,
मेरे वास्ते तेरा पैसा बचाना याद आता है।
कही हो जाये ना घर की मुसीबत लाल को मालूम,
छुपा कर तकलीफें तेरा मुस्कुराना याद आता है।
जब आये थे तुझे हम छोड़ कर परदेश मेरी माँ,
मुझे वो तेरा बहुत आंसू बहाना याद आता है।

Parents Anniversary | Poem in English

Dear mom and dad…
Your married life is a great example
Of the sacrifices made by couples
Your married life has been so fine
It has aged gracefully like a vintage wine
Your married life has been full of care
To each other, you have always laid your hearts bare
Your married life has been perfect and ideal
It is an example of love which is pure and real

Your lives and relationship have taught me a lot
That love and affection can’t be bought
I have learned how to trust
How to be fair, righteous and just
Where would I be without you both, I don’t know
Thanks for always being my shadow
My best wishes are with you on your anniversary
To have parents like you, I am extremely lucky

Anniversaries will come and go
But you will always be the best married couple I know
Friends may leave or stay
But you will always be there show me the way
I hope you get everything you want
Although you both have enough to flaunt
I pray to God on your anniversary
That every kid in the world gets parents like me

मां बाप पर कविता

कविता माता पिता को समर्पित

घुटनों से रेंगते-रेंगते,
कब पैरों पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छाँव में,
जाने कब बड़ा हुआ..
काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ वैसा है,
मैं ही मैं हूँ हर जगह,
माँ प्यार ये तेरा कैसा है?
सीधा-साधा, भोला-भाला,
मैं ही सबसे अच्छा हूँ,
कितना भी हो जाऊ बड़ा,

भूलो सभी को मगर, माँ-बाप को भूलना नहीं।
उपकार अगणित हैं उनके, इस बात को भूलना नहीं।।
पत्थर पूजे कई तुम्हारे, जन्म के खातिर अरे।
पत्थर बन माँ-बाप का, दिल कभी कुचलना नहीं।।
मुख का निवाला दे अरे, जिनने तुम्हें बड़ा किया।
अमृत पिलाया तुमको, जहर उनके लिए उगलना नहीं।।
कितने लड़ाये लाड़, सब अरमान भी पूरे किये।
पूरे करो अरमान उनके, बात यह भूलना नहीं।।
लाखों कमाते हो भले, माँ-बाप से ज्यादा नहीं।
सेवा बिना सब राख है, मद में कभी फूलना नहीं।।
संतान से सेवा चाहो, संतान बन सेवा करो।
जैसी करनी वैसी भरनी, न्याय यह भूलना नहीं।।
सोकर स्वयं गीले में, सुलाया तुम्हें सूखी जगह।
माँ की अमीमय आँखों को, भूलकर कभी भिगोना नहीं।।
जिसने बिछाये फूल थे, हर दम तुम्हारी राहों में।
उस राहबर की राह के, कंटक कभी बनना नहीं।।
धन तो मिल जायेगा, मगर माँ-बाप क्या मिल पायेंगे ?
पल-पल पावन उन चरण की, चाह कभी भूलना नहीं।।

हर माँ बाप को अपना फर्ज निभाना होता है
रोते हुए बच्चे को प्यार से गले लगाना होता है,
तेरी सूरत देख जन्नत का सुख नसीब होता है
माँ तेरे आँचल में, हर मौसम सुहाना होता है,
मेरे जीवन में बचपना जब उछल कूद करता है
खिलौना लेने का माँ से, फिर नया बहाना होता है,
जब जिद्द पर अड़ जाऊ माँ प्यार से समझाती है
माँ की बात को ना समझू तो, रोना रुलाना होता है,
मेरे हर गुन्हा को मेरी माँ हंस कर माफ़ कर देती है
नादान हू में, कुछ गलतियों को माँ से छुपाना होता है,
लुटा कर सारी दोलत बच्चो पर माँ-बाप गर्व करते है
माँ-बाप का खज़ाना, बच्चो का सपना सजाना होता है

Poem on Father in Hindi

बरगद की गहरी छांव जैसे,
मेरे पिता।
जिंदगी की धूप में,
घने साये जैसे मेरे पिता।।
धरा पर ईश्वर का रूप है,
चुभती धूप में सहलाते,
मेरे पिता।
बच्चों संग मित्र बन खेलते,
उनको उपहार दिला कर,
खुशी देते।
बच्चों यूं ही मुस्कुराओं की
दुआ देते मेरे पिता।।
संकट में पतवार बन खड़े होते,
आश्रय स्थल जैसे है मेरे पिता।
बूंद बूंद सब को समेटते,
अंधेरी में देकर हौसला,
कहते मेरे पिता।।
तुम को किस का डर है,
गमों की भीड़ में,
हंसना सिखाते,
मेरे पिता।
और अपने दम पर,
तूफानों से लड़ना,
किसी के आगे तुम नहीं झुकना,
ये सीखलाते मेरे पिता।
परिवार की हिम्मत,
और विश्वास है,
उम्मीद और आस की,
पहचान है मेरे पिता।

तन मन धन से समर्पित होता है,
परिवार के लिए तत्पर रहता है।
मुसीबत में साथ खड़ा होता है,
बेटे के लिए राजा होता है,
बेटी के सर का ताज होता है,
हमें एकजुट रखता है,
वो पिता होता है।
व्यवहार से लोह-सा सशक्त होता है,
दिल से फूलों सा कोमल होता है,
चिरागों को जो रोशन करता है,
वो पिता होता है।
बहती धारा सा अविरल रहता है,
अनुभवों का एक पिटारा रखता है।
आशीष जिनका संग रहता है,
जिंदगी में जो रंग भरता है,
हर कदम पर ठोकरों से बचाता है,
वो पिता होता है।

दर्द को दबाना,
आंसू को छिपाना,
कोई सीख ले आपसे।
अंगारों की छांव सा आशियाना,
कांटो पर चलकर मुस्कुराना,
यह जमाना वह जमाना भी,
सीख ले आपसे।
पिता ही तो कल्पतरू,
पिता ही पारिजात,
तृष्णा तो बस बूंद चाहे,
फिर भी हो बरसात।
वाकई जिसके आगे,
सारी जन्नतें अधूरी हो जाती है,
बस पिता कहने भर से,
सारी मन्नते पूरी हो जाती है।

Maa aur Pita Hindi Poem

मैंने माँ को है जाना, जब से दुनिया है देखी
प्यार माँ का पहचाना, जब से उंगली है थामी.
त्याग की भावना जो है माँ के भीतर,
प्यार उससे भी गहरा जितना गहरा समंदर.
अटल विश्वास माँ का, माँ की ममता डोरी
माँ के आंचल की छांव, माँ की मुस्कान प्यारी.
माँ ही है इस जहां में जो सबसे न्यारी,
सीचती है जो हमारे जीवन की क्यारी.
माँ की आंखों में देखें सपने हजार हमारे वास्ते,
मंजिलें बनाई ने अपनी न माँ ने चूने अपने रास्ते.
डगमगाए कदम जो तो है थाम लेती,
गर हो जाऊं उदास तो माँ प्यार देती.
मेरे लिए वह करती अपनी खुशियां कुर्बान,
गम के सैलाब में भी बिखेरती है मुस्कान.
वो सिमटी थी घर तक रखती थी सब का मान,
हर कमी को पूरा करने में जिसने लगा रखी है जान.
वजूद माँ का और माँ की पहचान,
रखना माँ के लिए सदा ह्रदय में सम्मान.

माँ की ममता करुणा न्यारी,
जैसे दया की चादर.
शक्ति देती नित हम सबको,
बन अमृत की गागर.
साया बनकर साथ निभाती,
चोट न लगने देती.
पीड़ा अपने ऊपर ले लेती,
सदा सदा सुख देती.
माँ का आंचल सब खुशियों की रंगारंग फुलवारी,
इसके चरणों में जन्नत है आनंद की किलकारी.
अद्भुत माँ का रूप सलोना बिल्कुल रब के जैसा,
प्रेम की सागर से लहराता इसका अपनापन ऐसा.

हम एक शब्द हैं तो वह पूरी भाषा है
हम कुंठित हैं तो वह एक अभिलाषा है
बस यही माँ की परिभाषा है.
हम समुंदर का है तेज तो वह झरनों का निर्मल स्वर है
हम एक शूल है तो वह सहस्त्र ढाल प्रखर
हम दुनिया के हैं अंग, वह उसकी अनुक्रमणिका है
हम पत्थर की हैं संग वह कंचन की कृनीका है
हम बकवास हैं वह भाषण हैं हम सरकार हैं वह शासन हैं
हम लव कुश है वह सीता है, हम छंद हैं वह कविता है.
हम राजा हैं वह राज है, हम मस्तक हैं वह ताज है
वही सरस्वती का उद्गम है रणचंडी और नासा है.
हम एक शब्द हैं तो वह पूरी भाषा है.
बस यही माँ की परिभाषा है.

माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तित्वा होते हैं.
माँ के पास अश्रुधारा तो पिता के पास संयम होता है.
दोनो समय का भोजन माँ बनाती है
तो जीवन भर भोजन की व्यवस्था करने वाले पिता होते हैं.
कभी चोट लगे तो मुंह से ‘ ओह माँ ’ निकलता है
रास्ता पार करते वक़्त कोई ट्रक पास आकर ब्रेक लगाये तो ‘ बाप रे ’ ही निकलता है.
क्यूं कि छोटे छोटे संकट के लिये माँ याद आती है
मगर बड़े संकट के वक़्त पिता याद आते हैं.
पिता एक वट वृक्ष है जिसकी शीतल च्हाव मे,
सम्पूर्ण परिवार सुख से रहता है…!!!!

कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता
कभी धरती तो कभी आसमान है पिता
अगर जन्म दिया है माँ ने
जानेगा जिससे जग वो पहचान है पिता….”
“कभी कंधे पे बिठाकर मेला दिखता है पिता…
कभी बनके घोड़ा घुमाता है पिता…
माँ अगर मैरों पे चलना सिखाती है…
तो पैरों पे खड़ा होना सिखाता है पिता…..”
कभी रोटी तो कभी पानी है पिता…”
“कभी रोटी तो कभी पानी है पिता…
कभी बुढ़ापा तो कभी जवानी है पिता…
माँ अगर है मासूम सी लोरी…
तो कभी ना भूल पाऊंगा वो कहानी है पिता….”
“कभी हंसी तो कभी अनुशासन है पिता…
कभी मौन तो कभी भाषण है पिता…
माँ अगर घर में रसोई है…
तो चलता है जिससे घर वो राशन है पिता….”
“कभी ख़्वाब को पूरी करने की जिम्मेदारी है पिता…
कभी आंसुओं में छिपी लाचारी है पिता…
माँ गर बेच सकती है जरुरत पे गहने…
तो जो अपने को बेच दे वो व्यापारी है पिता….”
“कभी हंसी और खुशी का मेला है पिता…
कभी कितना तन्हा और अकेला है पिता…
माँ तो कह देती है अपने दिल की बात…
सब कुछ समेत के आसमान सा फैला है पिता….”

Mummy Papa par Poem

Papa ji hain meethe-meethe,
Mummy khatti khatti.
Papa ji hain duble patle,
Mummy hatti katti.
Papa ki khatti meethi baatein,
mujhko sada hansaati.
aankh dikha kar moti mummy,
saari hansi bhagaatin.
Papa man ke bhole-bhaale,
Mummy bhi hai achchhi.
lagate mujhko donon pyare,
baat kahun main sachchi.

हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ…
कभी डाँटती है हमें, तो कभी गले लगा लेती है माँ…
हमारी आँखोँ के आंसू, अपनी आँखोँ मेँ समा लेती है माँ…
अपने होठोँ की हँसी, हम पर लुटा देती है माँ……
हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ…
जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…
दुनिया की तपिश में, हमें आँचल की शीतल छाया देती है माँ…
खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ…
प्यार भरे हाथोँ से, हमेशा हमारी थकान मिटाती है माँ…
बात जब भी हो लजीज खाने की, तो हमें याद आती है माँ……
रिश्तों को खूबसूरती से निभाना सिखाती है माँ……
लब्जोँ मेँ जिसे बयाँ नहीँ किया जा सके ऐसी होती है माँ……
भगवान भी जिसकी ममता के आगे झुक जाते हैँ !
! माँ से बढकर कुछ नहीं है दुनिया माँ !!

Poem on Mother

Her hands held me gently from the day I took my first breath.
Her hands helped to guide me as I took my first step.
Her hands held me close when the tears would start to fall.
Her hands were quick to show me that she would take care of it all.
Her hands were there to brush my hair, or straighten a wayward bow.
Her hands were often there to comfort the hurts that didn’t always show.
Her hands helped hold the stars in place, and encouraged me to reach.
Her hands would clap and cheer and praise when I captured them at length.
Her hands would also push me, though not down or in harm’s way.
Her hands would punctuate the words, just do what I say.
Her hands sometimes had to discipline, to help bend this young tree.
Her hands would shape and mold me into all she knew I could be.
Her hands are now twisting with age and years of work,
Her hand now needs my gentle touch to rub away the hurt.
Her hands are more beautiful than anything can be.
Her hands are the reason I am me.

Mom, you’re a wonderful mother,
So gentle, yet so strong.
The many ways you show you care
Always make me feel I belong.
You’re patient when I’m foolish;
You give guidance when I ask;
It seems you can do most anything;
You’re the master of every task.
You’re a dependable source of comfort;
You’re my cushion when I fall.
You help in times of trouble;
You support me whenever I call.
I love you more than you know;
You have my total respect.
If I had my choice of mothers,
You’d be the one I’d select!

You are the sunlight in my day.
You are the moon I see far away.
You are the tree I lean upon.
You are the one that makes troubles be gone.
You are the one who taught me about life,
How not to fight and what is right.
You are the words inside my song.
You are my love, my life, my mom.
You are the one who cares for me.
You are the eyes that help me see.
You are the one who knows me best,
When it’s time to have fun and time to rest.
You are the one who has helped me to dream.
You hear my heart and you hear my screams.
Afraid of life but looking for love.
I’m blessed, for God sent you from above.
You are my friend, my heart, and my soul.
You are the greatest friend I know.
You are the words inside my song.
You are my love, my life, my mom.

Poem on Father in Hindi

Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
Tham kar ungli hamari aapne chalna sikhaya
Hamare bachpan ko majedar banane ke liye aapne kya nahi kiya papa
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
Mujhe aaj bhi yaad ha wo bachpan ke din jab hum school jaane ke liye taiyar hua karte the
Tab aap mukh se raam ka gungaan karke bachho ko bhajan suna ke hamara din accha karte the
Log to kehte hai ki mujhe apne papa se yeh mila wo mila
Par main to ye kehta hu mujhe to apna naam bhi aapse hi mila hai papa
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
School se koi bhi shikayat aane par aap adhyapica ji ki shamat laga dete the
Holy heart school ke samman me koi bhi varshikutsav main mukhya atithi banke aap hi jaate the na papa
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
Jyoti chemical se business ki shuruaat ki
Jyoti chemical se deepshila auto bhi banayi aapne
Ek din me hi Delhi se Gujarat ghum Punjab vapis aa jate the papa
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
Jo kaam koi ni kr sakta vo aap kar sakte ho
Are log to apno ko kaam nahi aate par hamne to aapko
Dushman ka sath dete huye bhi dekha hai
Bade bade Businessmen Advocate Ministry aapse rai lene aate hai
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
Jab samay thoda kharab aaya tab aapne himmat nahi hari
Hamare chehre pe muskaan dekhne ke liye aapne din raat ek kar diya
Zindgi ko kaise jeena aur sangharsh karke mushkilo se
kaise nipatna to aapne hi hamein sikhaya hi sikhaya hai papa
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
Jab aapko har taraf se nirasha hath lagi
Tab aapne us nirasha me bhi asha ki kiran dekhi
Hamare palan poshan ke liye aapne apni zindgi ko dav pe laga di
Paisa to sab kamate hai par aap jaise izzat koi nahi kama sakta papa
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
Jab meri collage ki padayi shuru huyi tab aap pe meri fees ki jimeedari aur bad gayi
Tab aapne meri padayi ke liye apana pet katkar paisa ikattha kiya
Meri padayi ke liye aapne apni sari jama – punji tak laga di
Aap ne apni zindgi tak lga di hamare vaste hum wo bhi nahi ban paye jo aap chahte the papa
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa
Dar sa gaya tha jab main un andheri galiyon se, tab aapne hi mujhe un galiyon se nikala tha
Khud raat ko jagkar mujhe padaya jab bhi maine tanha mehsus kiya tab aapne hi mujhe sahara diya
Aaj aapka birthday hai mujhe khushi hai is baat ki par main aapko kya gift du jo barabari kare aapki
Log kehte hai Bhushan tum bahut achha likhte ho, Par Bhushan likhne ke kabil aapne banya papa
Meri zindgi ka bahut bada hissa ho aap papa
Meri zindgi ka dusra naam hissa ho aap papa

Bhagwaan ke jaisa
Dharti par hi
Milta hai jo wo
Kehlaata Pita
Thaam ke ungli jab pehli baari
Uske Jigar ka tukdaa chalaa
Ehsaans yeh uske jeevan mein jaise
Khushiyon ka mela sajaata Chalaa
Jis pyaar ka koi mol nahin
Us pyaar ko hai nibhaata Pita..
Apne dukho ko bhul hi jaata
Dekh ke saare dukh ko mere
Meri hansi ke liye khud hi dekho
Ban jaata hai wo khilaunaa mera
Ek aur chahe duniya kahe Kuch bhi
Hamesha tere Sangh chalta Pita
Bhagwaan ke jaisa
Dharti par hi
Milta hai jo wo
Kehlaata Pita…

Poem on Mother

माँ सब जानती है,
तुझे खुद से भी ज्यादा पहचानती है,
लाख कोशिश कर तू छिपाने की,
तेरे हर सुख-दुख को वो जानती है |
खुद जागकर तुझे सुलाती है,
खुद रोकर तुझे हंसाती है,
तन्हा रहती है खुद मगर,
तेरा साथ हमेशा निभाती है,
माँ सब जानती है |
जब तुझे चोट लगे तो सिसकती है माँ,
जब तू गलती करे तो समझती है माँ,
तू ही तो है माँ का लाडला,
जब तेरी आँखे भीगे आंसुओं से,
तो अपना आँचल देती है माँ,
माँ सब जानती है |
उसकी हर दुआ कबूल है,
वो तो ममता का एक फूल है,
शायद तभी भगवान से भी ऊपर आती है माँ,
एक सच्चा दोस्त कहलाती है माँ,
तुझे ना हो फुर्सत एक पल भी उसके लिए,
उसका हर पल हर लम्हा है तेरे लिए,
माँ सब जानती है |
पर आज मैं दूर हूँ,
खुद से मजबूर हूँ,
उलझा हूँ ज़िन्दगी के सफर में,
चल रहा हूँ माँ तेरे सपनो की डगर पे,
चाहत है तुझे खुश रखने की,
मुझे पता है माँ तू सब जानती है |

बाजुओं में खींच के आ जायेगी जैसे क़ायनात
अपने बच्चे के लिए ऐसे बाहें फैलाती है माँ…
ज़िन्दगी के सफ़र मै गर्दिशों में धुप में
जब कोई साया नहीं मिलता तब बहुत याद आती है माँ..
प्यार कहते हैं किसे, और ममता क्या चीज़ है,
कोई उन बच्चों से पूछे जिनकी मर जाती है माँ…
सफा-ए- हस्ती पे लिखती है, असूल-ए- ज़िन्दगी,
इसलिए तो मक़सद-ए- इस्लाम कहलाती है माँ..
जब ज़िगर परदेस जाता है ए नूर-ए- नज़र,
कुरान लेकर सर पे आ जाती है माँ..
लेके ज़मानत में रज़ा-ए- पाक की,
पीछे पीछे सर झुकाए दूर तक जाती है माँ…
काँपती आवाज़ में कहती है बेटा अलविदा…
सामने जब तक रहे हाथों को लहराती है माँ..
जब परेशानी में फँस जाते हैं हम परदेस में,
आंसुओं को पोंछने ख्वाबों में आ जाती है माँ..
मरते दम तक आ सका न बच्चा घर परदेस से,
अपनी सारी दुआएं चौखट पे छोड़ जाती है माँ..

मेरे सर पर भी माँ की दुवाओं का साया होगा,
इसलिए समुन्दर ने मुझे डूबने से बचाया होगा..
माँ की आघोष में लौट आया है वो बेटा फिर से..
शायद इस दुनिया ने उसे बहुत सताया होगा…
अब उसकी मोहब्बत की कोई क्या मिसाल दे,
पेट अपना काट जब बच्चों को खिलाया होगा..
की थी सकावत उमर भर जिसने उन के लिए
क्या हाल हुआ जब हाथ में कजा आया होगा
कैसे जन्नत मिलेगी उस औलाद को जिस ने
उस माँ से पैहले बीवी का फ़र्ज़ निभाया होगा…
और माँ के सजदे को कोई शिर्क ना कह दे
इसलिए उन पैरों में एक स्वर्ग बनाया होगा…
मुझको हर हाल में देगा उजाला अपना,
चाँद रिश्ते में तो लगता नहीं मामा अपना…
मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों से माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना
हम परिन्दों की तरह उड़ के तो जाने से रहे,
इस जन्म में तो न बदलेंगे ठिकाना अपना
धूप से मिल गए हैं पेड़ हमारे घर के,
हम समझते थे,कि काम आएगा बेटा अपना..
सच बता दूँ तो ये बाज़ार-ए- मुहब्बत गिर जाए,
मैंने जिस दाम में बेचा है ये मलबा अपना…
आइनाख़ाने में रहने का ये इनाम मिला,,
एक मुद्दत से नहीं देखा है चेहरा अपना
तेज़ आँधी में बदल जाते हैं सारे मंज़र
भूल जाते हैं परिन्दे भी ठिकाना अपना..

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