Poem (कविता)

Poem on Navratri in Hindi, English & Marathi | नवरात्रि पर कविता

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नवरात्रि पर्व हिंदुओं का पवित्र त्यौहार माना जाता है।इस पर्व में मा दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है। सभी लोग इस त्यौहार को बड़ी हर्ष उल्लास के साथ धूम धाम से मनाते है।इसका अपना अलग ही महत्व है ।इस पर्व पर दुर्गा मा के नौ-रूपों की 9 दिन तक भक्ति की जाती हैं।हिन्दू धर्म में देवी की पूजा को अत्यधिक महत्व दिया है। प्राचीन काल से ही देवी को सर्वोपरि मन गया है ओर इंडिनो जो भी सच्चे मन से देवी की भक्ति करता है उसकी सारी मनोकामनाएँ पूरी होती है, किसी का भी भय नहीं होता, कार्यों में सफलता प्राप्त होती हैं,उन्नति होती है आदि।

इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको इस दिन को और भी महत्वपूर्ण बनाने के लिए लेकर आए है माता-रानी की कविताएँ जिन्हे पढ़कर या फिर अपने किसी को भी भेजकर यह पर्व मन सकते है ओर उनको भी भक्ति मार्ग की ओर बढ़ावा दे सकते हैं।आपको मिलेगी navratri kavita in marathi, navratri poems, poem on navratri in hindi, navratri poems in hindi, happy navratri poem, navratri poems in english, tamil, poem on navratri festival in hindi, Navratri poems in tamil, नवरात्रि की कविताएं, स्टूडेंट्स के लिए (शब्दों) में देख व pdf भी डाउनलोड कर सकते हैं इसके अलावा class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चे इन्हे अपने स्कूल फंक्शन celebration व प्रोग्राम में सुना सकते हैं, किसी भी भाषा जैसे Hindi, हिंदी फॉण्ट, मराठी, गुजराती, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada आदि।

चैत्र नवरात्रि पर कविता | Chaitra Navratri Poem In Hindi

मां दुर्गा पर कविता : किस विधि दर्शन पाऊं मां…

अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां,
मन मेरे संताप भरा है, मैं कैसे मुस्काऊं मां।

कदम-कदम पर भरे हैं कांटे, ऊंची-नीची खाई है,
दुःखों की बेड़ी पड़ी पांव में, किस विधि चलकर आऊं मां।

अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां।
सुख और दुःख के भंवरजाल में, फंसी हुई है मेरी नैया,
कभी डूबती, कभी उबरती, आज नहीं है कोई खिवैया।

छूट गई पतवार हाथ से, किस विधि पार लगाऊं मां,
अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां।

पाप-पुण्य के फेर में फंसा हूं, मैंने सुध-बुध खोई मां,
अंदर बैठी मेरी आत्मा, फूट-फूटकर रोई मां।

बोल भी अब तो फंसे गले में, आरती किस विधि गाऊं मां,
अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां।

पाप-पुण्य में भेद बता दे, धर्म-कर्म का ज्ञान दे,
मेरे अंदर तू बैठी है, इतना मुझको भान दे।

फिर से मुझमें शक्ति भर दे, फिर से मुझमें जान दे,
नवजात शिशु-सा गोद में खेलूं, फिर बालक बन जाऊं मां।

तू ही बता दे, किन शब्दों में, तुझको आज मनाऊं मां,
अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां।

Hindi Poem On Navratri | नवरात्रि पर हिंदी कविता

नवरात्र में माँ फिर आईं हैं

प्रकृति ने भी धरती सजाई है
शाखों पर नए पत्ते शर्मा रहे हैं
पेड़ों पर नए पुष्प इठला रहे है
खेतों में नई फसलें लहलहा रही हैं
चिड़ियाँ चहक रही हैं कोयल गा रही है
सम्पूर्ण सृष्टि स्वागत गान गा रही है
हे शक्ति की देवी समृद्धि की देवी
यश की देवी आरोग्य की देवी
सुख की देवी जय की देवी
तुम्हारे आशीर्वाद की सदा हम पर कृपा हो
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

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नवरात्र कविता मराठी | नवरात्र उत्सव मराठी कविता

नऊ दिवसाचे नवरात्र

भारतीय संस्कृतीचे आहे सत्र
अन्नधान्य पिकविण्याची शिकवण
घेऊ घटस्थापना करून
शेती पिकवू झाडें लावू
शेतीच आहे देवी जाणू
नऊ दिवसाचे नवरात्र
अन्न हे पूर्णब्रम्ह
होमहवन करून
पर्यावरणाचे करू संरक्षण
उपवास करून
मनावर मिळवू ताबा
नऊ दिवसाचे नवरात्र
पर्यावरणाचे करू रक्षण
कन्याभोजन करून
कन्या देवीचे रूप जाणू
स्त्रीभूण हत्या थांबवू
मुलगा मुलगी समान मानू
नऊ दिवसाचे नवरात्र
स्त्रीजन्माचे करू स्वागत
अंबेने केला राक्षसाचा संहार
स्त्रीनेही करावा अन्यायाचा प्रतिकार
स्त्री हे अंबेचे रूप जाणा
स्त्रियांवरील अत्याचार टाळा
नऊ दिवसाचे नवरात्र
स्त्रीशक्तीचा करू जागर

Navratri Par Hindi Mein Kavita | नवरात्रि की कविता

आ गया नवरात्र माँ की भक्ति का त्यौहार

आ गया नवरात्र माँ की भक्ति का त्यौहार ।
सज रहा है माँ भवानी का सुघर दरबार।।

रक्त वसना आभरण युत खुले कुंचित केश
सिंह पर शोभित सुकोमल शक्ति का आगार।।

उड़ रही है धूप फूलों की सुगंध सुवास
ला रहा उपहार कोई फूल कोई हार।।

ठनकता तबला सरंगी और बजता ढोल
कर रहे हैं भजन के स्वर भक्ति का संचार।।

दुर्व्यवस्था देश की है दुखी सारे लोग
नाव जर्जर भँवर में है माँ करो उद्धार।।

दुर्विचारों दुष्प्रचारों ने किया आघात
जगद्धात्री जगत जननी अब करो संहार।।

कर रहा सिंदूर अर्पण मात्र कोई धूप
पास मेरे सिर्फ श्रद्धा करो अंगीकार।।

Poem on Navratri in English

The temple priest has rung his bell.
A cloud of smoke from candles and lamps
Haloes the Goddess, glowing bright
This beat of drums both maddens and dulls.

The incense burns: so heady the musk,
Our senses flounder in the flood.
This endless chant of sacred words
Soon drugs our lips and stuns our minds.

The Goddess, always staring down:
Her painted pupils cut through smoke
And read the secret thoughts we think.
We somehow feel this within our hearts.

To Mother, we know, we bow and pray –
Her form not just this image of clay.

Poem on Garba in Hindi

कभी-कभी उच्च पर
कभी-कभी चढ़ाव पर,
जोर से मारना
फिर भी जीवन बहता है,

कभी भी प्लान न करें
जीवन छोरों में चलता है,
प्यार में ऊपर
इसके बाद ड्रोप्स हुए।

से बाहर निकलो
जीवन अपमान,
आत्मा को गूंजने दो
ड्रम के साथ।

एक – दूसरे का सामना करना पड़ा
ताली और थाप,
एक कोमल आशा
घेरा में कदम।

आओ कपड़े उतारो
एक घेरा बनाना,
चलो गाना बजाओ
अपने मंडली के साथ नृत्य करें।

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