Poem (कविता)

Poem on Rain – Rain Poem in Hindi | बारिश पर कविता

Poem on Rain

बारिश का मौसम सभी को पसंद होता है | अगर आप किसी हरियाली वाली जगह हैं तो बारिश के वक़्त मिटटी से आने वाली भीनी-भीनी उसकी खुशबू का एहसास अलग ही होता है | बहुत लोगोनों को बारिश का मौसम बहुत पसंद होता है और कुछ तो शायद नहीं भी| बारिश के मौसम में बच्चे खासकर खूब मस्ती करते हैं, बहते पानी में कागज की नाव चलाते हैं बारिश में छत्तों पर जाकर नहाते हैं और बारिश में सभी को चाय के साथ पकोड़े खाने में बहुत आनंद आता है | बारिश का मौसम बहुत ही मनभावक और अच्छा होता है |

Barish ki kavita

बारिश जब आती है, ढेरो खुशिया लाती है,
प्यासी धरती की प्यास बुझाती है, मिटटी की भीनी सुगंध फैलाती है,
बारिश जब आती है, ढेरो खुशिया लाती है।
भीषण गर्मी से बचाती है, शीतलता हमें दे जाती है,
मुसलाधार प्रहारों से पतझड़ को भागाती है,
बहारो का मौसम लाती है।
बारिश जब आती है, ढेरो खुशिया लाती है,
चारो ओर हरियाली फैलाती है,
नदियों का पानी बढाती है,
तालाबो को भर जाती है।
बारिश जब आती है, ढेरो खुशिया लाती है
बारिश के चलते ही खेती हो पाती है,
किसानो के होठो पे मुस्कान ये लाती है,
रिमझिम फुहारों से सुखा मिटाती है,
बारिश जब आती है, ढेरो खुशिया लाती है।
मोरो को नचाती है,
पहाड़ो में फूल खिलाती है,
बीजो से नए पौधे उगाती है।
बारिश जब आती है, ढेरो खुशिया लाती है।।

The rain poem

बारिश है ऋतुओं की रानी,
चारों तरफ बरसा है पानी,
लोगों ने है छतरी तानी।।
नभ में काले बादल छाये,
नाचे मोर पंख फैलाए,
कोयल मीठे गीत सुनाये।।
झूम उठे हैं सब किसान,
सब खाएं मीठे पकवान।
सबका हो इससे कल्याण,
क्या निर्धन क्या धनवान।।
वर्षा ख़ुशहाली फैलाती है,
कुछ देने का संदेश सुनाती है।
इसे सुने हम इसे गुने हम,
वर्षा जैसा सरस् बनें हम।।

A rain poem

बारिश का मौसम है आया।
हम बच्चों के मन को भाया।।
‘छु’ हो गई गरमी सारी।
मारें हम मिलकर किलकारी।।
काग़ज़ की हम नाव चलाएँ।
छप-छप नाचें और नचाएँ।।
मज़ा आ गया तगड़ा भारी।
आँखों में आ गई खुमारी।।
गरम पकौड़ी मिलकर खाएँ।
चना चबीना खूब चबाएँ।।
गरम चाय की चुस्की प्यारी।
मिट गई मन की ख़ुश्की सारी।।
बारिश का हम लुत्फ़ उठाएँ।
सब मिलकर बच्चे बन जाएँ।।

Rain poems in marathi

पावसाचे स्वागत करताना तोते
फ्लाय फ्लाय

उंच उडी
दूर उडणे

पपयया कुहू-खुहू
नवीन धैर्याने भरलेली पपा

टितराह कुठेही राहू नका
गोड पाऊस आनंदी

शेळी सांगत आहे
उडी मारण्यासाठी नवीन मार्ग

पूडल
ढग प्रत्येकजण आहे

मुलांचे वळण
बोट सवारी

माफ करा
आकाशात उडी मार

Rain poems in english

Falling Down, pooling up,
Out of the sky, into my cup.

What is this wet that comes from above,
That some call disaster, and others find love.

The harder it falls, the less it is nice,
The colder it falls the harder the ice.

The rain has an art that I may not get,
So I stand still here and get soaking wet.

Poem on Rain1

Rain poems in telugu

వర్షం వచ్చింది,
ప్రకృతి దాని ఆశీర్వాదాలను ఆశీర్వదించింది.
చెట్లు ఆకుపచ్చ రంగులలో పెయింట్ చేయడం ద్వారా వారి ఆనందాన్ని ప్రదర్శిస్తాయి.

వర్షం వచ్చింది,
రైతులకు ఒక ఉంగరాల పంటను సూచిస్తుంది.
ప్రేమికుల హృదయాల్లో ప్రేమ జ్వాల ..

వర్షం వచ్చింది,
ఆనందం మరియు సంతోషం తో మేల్కొన్నాను
అతను ఆనందం మరియు సంతోషంగా వికసించాడు వచ్చింది.

వర్షం వచ్చింది,
జీవితం యొక్క అన్ని కష్టాలను ఎక్కడ కోల్పోయాయి?
వర్షం వచ్చింది.

Rain poem short

रिमझिम रिमझिम बारिश आई,
काली घटा फिर है छाई।
सड़कों पर बह उठा पानी,
कागज़ की है नाव चलानी

नुन्नू-मुन्नू-चुन्नू आए,
रंग-बिरंगे छाते लाए।
कहीं छप-छप, कहीं टप-टप,
लगती कितनी अच्छी गपशप।

रिमझिम बारिश की फौहारें
मन को भातीं खूब बौछारें,
बारिश की यह मस्ती है,
हो चाहे कल छुट्टी है।

Barish par kavita hindi me

मेरे बचपन की बारिश बड़ी हो गयी..!

ऑफिस की खिड़की से जब देखा मैने,मौसम की पहली बरसात को….
काले बादल के गरज पे नाचती, बूँदों की बारात को…

एक बच्चा मुझसे निकालकर भागा था भीगने बाहर…
रोका बड़प्पन ने मेरे, पकड़ के उसके हाथ को…!

बारिश और मेरे बचपने के बीच एक उम्र की दीवार खड़ी हो गयी…
लगता है मेरे बचपन की बारिश भी बड़ी हो गयी..

वो बूँदें काँच की दीवार पे खटखटा रही थी…
मैं उनके संग खेलता था कभी, इसीलिए बुला रही थी..

पर तब मैं छोटा था और यह बातें बड़ी थी…
तब घर वक़्त पे पहुँचने की किसे पड़ी थी…

अब बारिश पहले राहत, फिर आफ़त बन जाती है…
जो गरज पहले लुभाती थी,वही अब डराती है….

मैं डरपोक हो गया और बदनाम सावन की झड़ी हो गयी…
लगता है मेरे बचपन की बारिश भी बड़ी हो गयी..

जिस पानी में छपाके लगाते, उसमे कीटाणु दिखने लगा…
खुद से ज़्यादा फिक्र कि लॅपटॉप भीगने लगा…

स्कूल में दुआ करते कि बरसे बेहिसाब तो छुट्टी हो जाए…
अब भीगें तो डरें कि कल कहीं ऑफिस की छुट्टी ना हो जाए…

सावन जब चाय पकोड़ो की सोहबत में इत्मिनान से बीतता था,
वो दौर, वो घड़ी बड़े होते होते कहीं खो गयी..

लगता है मेरे बचपन की बारिश भी बड़ी हो गयी..

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