Hindi Lekh

सोलह सोमवार व्रत कथा आरती – Somvar Vrat Katha in Hindi – 16 Somvar Vrat

सोमवार व्रत कथा आरती

हिन्दू धर्म और कथाओं के अनुसार सोमवार के दिन को भगवान शिव जी को समर्पित किया है। Sawan में सोमवार को भगवान् शिव जी की पूजा-आराधना के लिए सर्व श्रेष्ठ माना जाता है। सोमवार का व्रत मुख्य रूप से तीन प्रकार से किया जाता है जिसमे से “प्रथम साधारण प्रति सोमवार, द्वितीय सोम्य प्रदोष एवं तृतीय सोलह सोमवार” को माना जाता है तथा तीनो व्रत की विधि एक सामान होती है। आज हम आपको अपने इस लेख में Somvar Vrat Katha के माध्यम से आपको सोलह सोमवार व्रत कथा आरती की भी सभी प्रकार की जानकारी प्रस्तुत कर रहे है। आपको इस Article में Solah Somvar Vrat Katha Vidhi, सावन सोमवार व्रत कथा, सोलह सोमवार की आरती और Somvar Vrat Katha Aarti के बारे में सभी जानकारी मिल जाएगी। और आप अपने परिवार एवं सभी रिश्तेदारों को भी यह सोमवार व्रत कथा सुनाइए जिससे सभी के Sankat दूर हो सकें।

आप Internet पर Somvar Vrat Katha in Hindi या Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi के साथ-साथ in Punjabi, in Marathi या in English में भी पढ़ सकते है। Somvar Vrat Katha pdf में Download कर सकते है। सोमवार व्रत कथा विधि या श्रावण सोमवार व्रत कथा मराठी की pdf को आप अपने Friends और Relatives के साथ सांझा कर सकते है। कई बार लोग बोलते है कि आप उन्हें सोमवार व्रत कथा सुनाएं और आपका भी मन करता होगा कि मै भी उन्हें Somvar Vrat Katha Sunau तो आप हमारे इस Article को पढ़कर उन्हें यह 16 Somvar Vrat Katha सुना सकते है।

सोलह सोमवार व्रत कथा

हिन्दू धर्म में कई औरत सोलह सोमवार व्रत करती है | इस सोलह सोमवार व्रत को सम्भव हो सके तो , श्रावण मास से ही शुरू करना चाहिए और लगातार 16 सोमवार तक इस व्रत को करते है | सोलह सोमवार व्रत की कथा इस प्रकार है | एक बार शिवजी और माता पार्वती मृत्यु लोक पर घूम रहे थे | घूमते घूमते वो विदर्भदेश के अमरावती नामक नगर में आये | उस नगर में एक सुंदर शिव मन्दिर था इसलिए महादेव जी  पार्वती जी के साथ वहा रहने लग गये | एक दिन बातो बातो में पार्वती जी ने शिवजी को चौसर खेलने को कहा | शिवजी राजी हो गये और चौसर खेलने लग गये |

उसी समय मंदिर का पुजारी दैनिक आरती के लिए आया | पार्वती ने पुजारी से पूछा “बताओ , हम दोनों में चौसर में कौन जीतेगा ” | वो पुजारी भगवान शिव का भक्त था और उसके मुह में तुंरत निकल पड़ा “महादेव जी जीतेंगे ” | चौसर का खेल खत्म होने पर पार्वती जी जीत गयी और शिवजी हार गये | पार्वती जी ने क्रोधित होकर उस पुजारी को श्राप देना चाहा तभी शिवजी ने उन्हें रोक दिया और कहा कि ये तो भाग्य का खेल है उसकी कोई गलती नही है | फिर भी माता पार्वती ने उस कोढ़ी होने का श्राप दे दिया और उसे कोढ़ हो गया |काफी समय तक वो कोढ़ से पीड़ित रहा | एक दिन एक अप्सरा उस मंदिर में शिवजी की आराधना के लिए आये और उसने उस पुजारी के कोढ को देखा | अप्सरा ने उस पुजारी को कोढ़ का कारण पूछा तो उसने सारी घटना उसे सुना दी |

अप्सरा ने उस पुजारी को कहा “तुम्हे इस कोढ़ से मुक्ति पाने के लिए सोलह सोमवार व्रत करने चाहिए ” | उस पुजारी ने व्रत करने की विधि पूछी | अप्सरा ने बताया “सोमवार के दिन नहा धोकर साफ़ कपड़े पहन लेना और आधा किलो आटे से पंजरी बना देना , उस पंजरी के तीन भाग करना , प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करना , इस पंजरी के एक तिहाई हिस्से को आरती में आने वाले लोगो को प्रसाद के रूप में देना , इस तरह सोलह सोमवार तक यही विधि अपनाना , 17वे सोमवार को एक चौथाई गेहू के आटे से चूरमा बना देना और शिवजी को अर्पित कर लोगो में बाट देना , इससे तुम्हारा कोढ़ दूर हो जायेगा   “| इस तरह सोलह सोमवार व्रत करने से उसका कोढ़ दूर हो गया और वो खुशी खुशी रहने लगा |

एक दिन शिवजी और पार्वती जी दुबारा उस मंदिर में लौटे और उस पुजारी को एकदम स्वास्थ्य देखा | पार्वती जी ने उस पुजारी से स्वास्थ्य होने का राज पूछा | उस पुजारी ने कहा उसने 16 सोमवार व्रत किये जिससे उसका कोढ़ दूर हो गया | पार्वती जी इस व्रत के बारे में सुनकर बहुत प्रस्सन हुएए | उन्होंने भी ये व्रत किया और इससे उनका पुत्र वापस घर लौट आया और आज्ञाकारी बन गया | कार्तिकेय ने अपनी माता से उनके मानसिक परविर्तन का कारण पूछा जिससे वो वापस घर लौट आये | पार्वती ने उन्हें इन सब के पीछे सोलह सोमवार व्रत के बारे में बताया | कार्तिकेय ये सुनकर बहुत खुश हुए |

कार्तिकेय ने अपने विदेश गये ब्राह्मण मित्र से मिलने के लिए उस व्रत को किया औरसोलह सोमवार होने पर उनका मित्र उनसे मिलने विदेश से वापस लौट आया | उनके मित्र ने इस राज का कारण पूछा तो कार्तिकेय ने सोलह सोमवार व्रत की महिमा बताई | ये सुनकर उस ब्राह्मण मित्र ने भी विवाह के लिए सोलह सोमवार व्रत रखने के लिए विचार किया | एक दिन राजा अपनी पुत्री के विवाह की तैयारिया कर रहा था | कई राजकुमार राजा की पुत्री से विवाह करने के लिए आये | राजा ने एक शर्त रखी कि जिस भी व्यक्ति के गले में हथिनी वरमाला डालेगी उसके साथ ही उसकी पुत्री का विवाह होगा | वो ब्राह्मण भी वही था और भाग्य से उस उस हथिनी ने उस ब्राह्मण के गले में वरमाला डाल दी और शर्त के अनुसार राजा ने उस ब्राह्मण से अपनी पुत्री का विवाह करा दिया |

एक दिन राजकुमारी ने ब्राह्मण से पूछा “आपने ऐसा क्या पुन्य किया जो हथिनी ने दुसरे सभी राजकुमारों को छोडकर आपके गले में वरमाला डाली  “| उसने कहा “प्रिये , मैंने अपने मित्र कार्तिकेय के कहने पर सोलह सोमवार व्रत किये थे उसी के परिणामस्वरुप तुम मुझे लक्ष्मी जैसी दुल्हन मिली ” | राजकुमारी ये सुनकर बहुत प्रभावित हुए और उसने भी पुत्र प्राप्ति के लिए सोलह सोमवार व्रत रखा | फलस्वरूप उसके एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ और जब पुत्र बड़ा हुआ तो पुत्र ने पूछा “माँ , आपने ऐसा क्या किया जो आपको मेरे जैसा पुत्र मिला ” | उसने भी उसके पुत्र को सोलह सोमवार व्रत Solah Somvar Vrat Katha की महिमा बताई |

ये सूनकर उसने भी राजपाट की इच्छा के लिए ये व्रत रखा | उसी समय एक राजा अपनी पुत्री के विवाह के लिए वर तलाश कर रहा था तो लोगो ने उस बालक को विवाह के लिए उचित बताया | राजा को इसकी सुचना मिलते ही उसने अपनी पुत्री का विवाह उस बालक के साथ कर दिया | कुछ सालो बाद जब राजा की म्रत्यु हुयी तो वो राजा बन गया क्योंकि उस राजा के कोई पुत्र नही था  | राजपाट मिलने के बाद भी वो सोमवार व्रत करता रहा | एक दिन 17वे सोमवार व्रत पर उसकी पत्नी को भी पूजा के लिए शिव मंदिर आने को कहा लेकिन उसने खुद आने के बजाय दासी को भेज दिया | ब्राह्मण पुत्र के पूजा खत्म होने के बाद आकाशवाणी हुयी “तुम्हारी पत्नी को अपने महल से दूर रखो ,वरना तुम्हारा विनाश हो जाएगा ” | ब्राह्मण पुत्र ये सुनकर बहुत आश्चर्यचकित हुआ |

महल वापस लौटने पे उसने अपने दरबारियों को भी ये बात बताई तो दरबारियों ने कहा कि जिसकी वजह से ही उसे राजपाट मिला है वो उसी को महल से बाहर निकालेगा | लेकिन उस ब्राहमण पुत्र ने उसे महल से बाहर निकल दिया | वो राजकुमारी भूखी प्यासी एक अनजान नगर में आयी | वहा पर एक बुढी औरत धागा बेचने बाजार जा रही था | जैसे ही उसने राजकुमारी को देखा तो उसने उसकी मदद करते हुए उसके साथ व्यापार में मदद करने को कहा | राजकुमारी ने भी एक टोकरी अपने सर पर रख दी | कुछ दूरी पर चलने के बाद एक तूफान आया और वो टोकरी उडकर चली गयी | अब वो बुढी औरत रोने लग गयी और उसने राजकुमारी को मनहूस मानते हुए चले जाने को कहा |

उसके बाद वो एक तेली के घर पहुची | उसके वहा पहुचते ही सारे तेल के घड़े फुट गये और तेल बहने लग गया | उस तेली ने भी उसे मनहूस मानकर उसको वहा से भगा दिया | उसके बाद वो एक सुंदर तालाब के पास पहुची और जैसे ही पानी पीने लगी उस पानी में कीड़े चलने लगे और सारा पानी धुंधला हो गया | अपने दुर्भाग्य को कोसते हुए उसने गंदा पानी पी लिया और पेड़ के नीचे सो गयी | जैसे ही वो पेड़ के नीचे सोयी उस पेड़ की सारी पत्तिय झड़ गयी | अब वो जिस पेड़ के पास जाती उसकी पत्तिया गिर जाती थी |

ऐसा देखकर वहा के लोग मंदिर के पुजारी के पास गये | उस पुजारी ने उस राजकुमारी का दर्द समझते हुए उससे कहा :बेटी , तुम मेरे परिवार के साथ रहो , मै तुम्हे अपनी बेटी की तरह रखूंगा , तुम्हे मेरे आश्रम में कोई तकलीफ नही होगी ” | इस तरह वो आश्रम में रहने लग गयी अब वो जो भी खाना बनाती या पानी लाती उसमे कीड़े पड़ जाते | ऐसा देखकर वो पुजारी आश्चर्यचकित होकर उससे बोला “बेटी , तुम पर ये कैसा कोप है जो तुम्हारी ऐसी हालत है ” | उसने वही शिवपूजा में ना जाने वाली कहानी सुनाई | उस पुजारी ने शिवजी की आराधना की और उसको सोलह सोमवार व्रत करने को कहा | इससे उसे जरुर राहत मिलेगी |

उसने सोलह सोमवार व्रत किया और 17वे सोमवार पर ब्राह्मण पुत्र उसके बारे में सोचने लगा “वो कहा होगी , मुझे उसकी तलाश करनी चाहिये ” | इसलिए उसने अपने आदमी भेजकर अपनी पत्नी को ढूंढने को कहा | उसके आदमी ढूंढने ढूंढने उस पुजारी के घर पहुच गये और उन्हें वहा राजकुमारी का पता चल गया | उन्होंने पुजारी से राजकुमारी को घर ले जाने को कहा लेकिन पुजारी ने मना करते हुए कहा “अपने राजा को खो कि खुद आकर इसे ले जाए ” | राजा खुद वहा पर आया और राजकुमारी को वापस अपने महल लेकर आया |  इस तरह जो भी स्त्री-पुरुष ये सोलह सोमवार व्रत करता है उसकी सभी मनोकामनाए पुरी होती है |

शिव_1

Shiv Parvati

सोमवार व्रत की विधि

  • सोमवार के व्रत वाले दिन व्रत करने वाले मनुष्य को सूर्योदय से पहले ब्रह्म महूर्त में प्रातः काल उठकर नित्य क्रिया से निवृत होकर स्नान इत्यादि करना चाहिए।
  • उसके उपरांत अपने पूरे घर में गंगाजल छिड़क कर पवित्र करना चाहिए।
  • puja करने के लिए इसके बाद अपने घर के मंदिर में माता पार्वती एवं भगवान् शिव जी की मूर्ति की स्थापना करें या फिर किसी शिव मंदिर में जाकर उनका पूजन करें।
  • जैसा कि आप सभी जानते है हिन्दू धर्म में सर्व प्रथम किसी भी कार्य या puja का आरंभ भगवान श्री गणेश जी की अराधना से किया जाता है।
  • ठीक उसी प्रकार सोमवार के व्रत में भी भगवान श्री गणेश जी की अराधना के बाद ही भगवान् शिव जी और माता पार्वती पूजा करें। और फिर इसके बाद भगवान शिव जी, माँ पार्वती एवं शिव जी की सबारी नन्दी देव की pooja करें।
  • पूजा सामग्री में दही, दूध, जल, घी, शहद, चीनी, पंचामृ्त, मोली (कलावा), वस्त्र, जनेऊ, चन्दन, रोली, चावल, बेल-पत्र, आंकड़े का पुष्प, धतूरा, भांग, फूल और पुष्पों की माला, इलायची, लौंग, पान-सुपारी, कमल गठ्टा, मेवा और प्रसाद के साथ कुछ दक्षिणा को pooja में भगवान् शिव जी और माता पार्वती जी को अर्पित करें।
  • इसके उपरांत “मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमव्रतं करिष्ये” मंत्र का मन ही मन रुद्राक्ष की माला अपने हाथों में लेकर पूर्ण श्रद्धा भक्ति के साथ 108 बार मंत्र का जाप करें।
  • सोमवार के व्रत की कथा को सुनें। सोमवार के व्रत की कथा को सुनने के पश्चात धुप व् शुद्ध घी का दीपक जलाकर भगवान शिव जी की आरती करें और उन्हें प्रसाद का भोग लगाए।

सोमवार व्रत के लाभ

  • सोमवार का व्रत करने वाली विवाहित महिलाओं के परिवार में समृद्घि, खुशियां, एवं उनको जीवन में सम्मान की प्राप्ति होती है।
  • सोमवार का व्रत करने वाले सभी पुरूषों को सोमवार का व्रत करने से उन्हें शैक्षणिक गतिविधियों में सफलता, उनके कार्य और व्यवसाय में उन्नति होती है तथा उनको आर्थिक रूप से मजबूती भी प्राप्ति होती है।
  • सोलह सोमवार के व्रत रखने से और शिव परिवार की विधिवत पूजा करने से कुंवारी लड़कियों को विवाह के बाद एक घर की प्राप्ति के साथ-साथ एक अच्छे वर की भी प्राप्ति होती है।
  • सोमवार का व्रत करने से सभी को सभी दुःखों व कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।
  • Monday Fast में जवा पुष्प से शिव जी की पूजा करने से मनुष्य के शत्रु का नाश हो जाता है।
  • सोमवार व्रत में कनेर के पुष्प से भोले नाथ की पूजा करने से व्यक्ति को सभी रोगों से मुक्ति के साथ-साथ संपति तथा वस्त्र की भी प्राप्ति होती है।
  • सोमवार व्रत में हर सिंगार के पुष्पों से प्रभु शिव जी का पूजन करने से धन सम्पति में बढ़ोतरी होती है।
  • सोमवार का व्रत करने वाले व्यक्ति के द्वारा भोले नाथ को भांग व् धतूरा अपरपित करने से ज्वर एवं विषभय से मुक्ति प्राप्ति होती है।
  • सोमवार व्रत में डमरूधर शंकर जी को साबुत चावल अर्पित करने से धन में बृद्धि होती है।
  • भगवान् भोले नाथ को गंगाजल अर्पित करने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होती है।

सोमवार व्रत के नियम

  • सोमवार के व्रत वाले दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को सूर्योदय से पहले ब्रह्म महूर्त में प्रातः काल उठना चाहिए।
  • प्रातः काल उठने के बाद घर की सफाई करने के पश्चात् नित्यक्रिया करके स्नान आदि करना चाहिए।
  • केतकी और चंपा के पुष्पों को भगवान् शंकर जी को अर्पित नहीं करना चाहिए।
  • व्रत करें वाले व्यक्ति को प्रभु सदाशिव जी का जलाभिषेक शक्कर मिले हुए जल से करना चाहिए।
  • इस व्रत में शिव जी के पूजन के उपरांत व्रत करने वाले व्यक्ति को सोमवार की व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए।
  • सोमवार का व्रत करने वाले को व्रत के दिन कोई भी अनैतिक कार्य नहीं करना चाहिए।
  • भगवान शिव जी के व्रत में उनके पूजन के लिए जल, घी, शहद, दही, दूध, चीनी, मोली (कलावा), पंचामृ्त, जनेऊ, वस्त्र, रोली, चन्दन, साबुत चावल, बेल-पत्र, भांग, धतूरा, आंकड़े का पुष्प, पुष्पों एवं फूलों की माला, लौंग, कमल गठ्टा, इलायची, पान-सुपारी, मेवा तथा प्रसाद के साथ दान दक्षिणा भगवान् शंकर जी और माता पार्वती अर्पित करने के लिए उपयोग करना चाहिए।
  • सोमवार की व्रत कथा सुनने के बाद भगवान् शिव जी की आरती करनी चाहिए।
  • सोमवार के व्रत को तीसरे पहर के उपरांत शंकर जी की आरती करने के बाद ही खोलना चाहिए।
  • सोमवार के व्रत पूर्ण करने के बाद सोमवार के व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

सोमवार का व्रत कब से शुरू करें : आप भगवान् शिव शंकर जी की भक्ति करने के लिए सोमवार के व्रत भी कर सकते है। इसके लिए आपको यह सोमवार के व्रत को पूरी विधि विधान और सच्ची भक्ति व् पूर्ण निष्ठा के साथ करना होगा। आप सोमवार के व्रत को शिवरात्रि या सावन से प्रारंभिक प्रथम सोमवार से अपने मन में सच्ची भक्ति और संकल्प लेकर प्रारम्भ कर सकते है। सोमवार का व्रत करने वाले मनुष्य को इस व्रत के द्वारा उसकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तथा उसके जीवन से सभी दुःखों का निवारण भी हो जाता है। और उस व्यक्ति को इस व्रत को करने से उत्तम फल प्राप्ति होती है।

Somvar Vrat Aarti in Hindi: पौराणिक व् प्रामाणिक कथाओं के अनुसार किसी भी भगवान् की पूजा में आरती का सबसे ज्यादा महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि कोई भी पूजा आरती के बिना संपन्न नहीं होती है। इसलिए पूजा करने के पश्चात् आरती अवश्य करनी चाहिए। और तभी वह पूजा पूर्ण रूप से संपन्न होती है। और हम भी आपके लिए इस सोमवार की व्रत कथा के साथ-साथ सोमवार की आरती को भी प्रस्तुत कर रहे है।

सोमवार व्रत की आरती in Hindi :

जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा |
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्दाडी धारा | टेक

एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे |
हंसानन गरुडासन बर्षवाहन साजै | जय…

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अते सोहै |
तीनो रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहै | जय…
अक्षयमाला वन माला मुंड माला धारी |
त्रिपुरारी कंसारी वर माला धारो |जय…

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे |
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे । जय…
कर मे श्रेष्ठ कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता
जग – कर्ता जग – हर्ता जग पालन कर्ता। जय…

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव जानत अविवेका
प्रणवाक्षर के मध्य ये तीनो एका | जय
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई गावे |
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे | जय…

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

Copyright © 2018 Hindiguides.in

To Top