Essay (Nibandh)

रथ यात्रा पर निबंध 2019 | Speech on Rath Yatra in Hindi, Bengali, Oriya & English with Pdf Download

Speech on Rath Yatra

Rath Yatra 2019 : रथ यात्रा भारत के पुरी में जून या जुलाई के महीनों में आयोजित भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु का अवतार) से जुड़ा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है| पुरी रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है और हर साल एक लाख तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती है, न केवल भारत से बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से भी। रथ यात्रा दूसरे शब्दों में रथ महोत्सव एकमात्र दिन है जब भक्तों को मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है, उन्हें देवताओं को देखने का मौका मिल सकता है। यह त्योहार समानता और एकीकरण का प्रतीक है।

जगन्नाथ रथ यात्रा निबंध

भारत भर में मनाए जाने वाले महोत्सवों में जगन्नाथपुरी की रथयात्रा सबसे महत्वपूर्ण है। यह परंपरागत रथयात्रा न सिर्फ हिन्दुस्तान, बल्कि विदेशी श्रद्धालुओं के भी आकर्षण का केंद्र है। श्रीकृष्ण के अवतार जगन्नाथ की रथयात्रा का पुण्य सौ यज्ञों के बराबर माना गया है।

पुरी का जगन्नाथ मंदिर भक्तों की आस्था केंद्र है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। जो अपनी बेहतरीन नक्काशी व भव्यता लिए प्रसिद्ध है। यहां रथोत्सव के वक्त इसकी छटा निराली होती है, जहां प्रभु जगन्नाथ को अपनी जन्मभूमि, बहन सुभद्रा को मायके का मोह यहां खींच लाता है। रथयात्रा के दौरान भक्तों को सीधे प्रतिमाओं तक पहुंचने का मौका भी मिलता है।
यह दस दिवसीय महोत्सव होता है। इस दस दिवसीय महोत्सव की तैयारी का श्रीगणेश अक्षय तृतीया को श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा के रथों के निर्माण से होता है और कुछ धार्मिक अनुष्ठान भी महीने भर किए जाते हैं।
जगन्नाथजी का रथ ‘गरुड़ध्वज’ या ‘कपिलध्वज’ कहलाता है। 16 पहियों वाला रथ 13.5 मीटर ऊंचा होता है जिसमें लाल व पीले रंग के कप़ड़े का इस्तेमाल होता है। विष्णु का वाहक गरुड़ इसकी हिफाजत करता है। रथ पर जो ध्वज है, उसे ‘त्रैलोक्यमोहिनी’ कहते हैं। बलराम का रथ ‘तलध्वज’ के बतौर पहचाना जाता है, जो 13.2 मीटर ऊंचा 14 पहियों का होता है। यह लाल, हरे रंग के कपड़े व लकड़ी के 763 टुकड़ों से बना होता है। रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं। रथ के ध्वज को उनानी कहते हैं। त्रिब्रा, घोरा, दीर्घशर्मा व स्वर्णनावा इसके अश्व हैं। जिस रस्से से रथ खींचा जाता है, वह बासुकी कहलाता है।’पद्मध्वज’ यानी सुभद्रा का रथ। 12.9 मीटर ऊंचे 12 पहिए के इस रथ में लाल, काले कपड़े के साथ लकड़ी के 593 टुकड़ों का इस्तेमाल होता है। रथ की रक्षक जयदुर्गा व सारथी अर्जुन होते हैं। रथध्वज नदंबिक कहलाता है। रोचिक, मोचिक, जिता व अपराजिता इसके अश्व होते हैं। इसे खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुडा कहते हैं।

Rath Yatra Essay in Hindi

रथ यात्रा (Ratha Yatra), भारत का एक हिन्दू त्यौहार है जो प्रभु जगन्नाथ से जुडा हुआ है और (famous festivals of india)विश्व प्रसद्ध तरीके से पूरी, ओडिशा, भारत में मनाया जाता है। रथ यात्रा दर्शन भारत के साथ-साथ दुसरे देशों में भी मनाया जाता है। इस भव्य त्यौहार को भारत के दूरदर्शन चैनल पर सीधा प्रसारण दिखाया जाता है।

यहाँ यह त्यौहार सबसे साहित्यिक है और 10-11 सदियों से लोग इसे मानते चले आ रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी मौजूद है ब्रह्म पुराण में, पद्म पुराण में, स्कन्दा पुराण में तथा कपिला समिथा में। हर साल रथ यात्रा अषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष द्वितीय के दिन मनाया जाता है।

इस भव्य त्यौहार को मनाने के लिए पुरे विश्व भर से लोग पूरी पहुँचते हैं जो बडदांड चौक, पूरी में है। रथ यात्रा त्यौहार के दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और छोटी बहन सुभद्रा के रथ को श्रद्धालु खिंच कर मुख्य मंदिर जगन्नाथ मंदिर से उनकी मौसी के घर गुंडीचा मदिर ले कर जाते हैं। वहाँ तीनो रथ 9 दिन तक रहते हैं। उसके बाद इन तीनो रथ की रथ यात्रा वापस अपने मुख्य जगन्नाथ मंदिर जाती है जिसे बहुडा जात्रा कहा जाता है।

Rath Yatra Speech in Hindi

Rath Yatra Essay in Hindi

भगवान जगन्नाथ विष्णु भगवान के पूर्ण कला अवतार श्रीकृष्ण का ही एक रूप हैं। ओडिशा राज्य के पुरी शहर में भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ साक्षात विराजते हैं। इस शहर का नाम जगन्नाथ पुरी से निकल कर पुरी बना है। यहां हर साल भगवान जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का उत्सव बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। भगवान जगन्नाथ पुरी धाम की गिनती हिन्दू धर्म के चार धाम में होती है।

हिंदू धर्म के चार धामों बद्रीनाथ, द्वारिका और रामेश्वरम में भगवान जगन्नाथ पुरी धाम (Jagannath Puri) का बहुत महत्व है। जब गुरु आदि शंकराचार्य पुरी पधारे तो उन्होंने यहां गोवर्धन मठ की स्थापना की। तब से पुरी को सनातन धर्म के चार धामों में एक माने जाने लगा है। हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु पुरी में भोजन करते हैं, रामेश्वरम में स्नान करते हैं, द्वारका में शयन करते हैं और बद्रीनाथ में ध्यान करते हैं। पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बिना चार धाम यात्रा अधूरी मानी जाती है। भगवान जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का महत्व जानने के लिए दो कहानियां प्रसिद्द हैं, जिनको आप आगे की स्लाइड्स में जान पाएंगे…
जगन्नाथ से जुड़ी दो दिलचस्प कहानी हैं। पहली कहानी में श्रीकृष्ण अपने परम भक्त राज इन्द्रद्युम्न के सपने में आये और उन्हे आदेश दिया कि पुरी के दरिया किनारे पर पडे एक पेड़ के तने में से वे श्री कृष्ण का विग्रह बनायें।

राज ने इस कार्य के लिये काबिल बढ़ई की तलाश शुरु की। कुछ दिनो बाद एक रहस्यमय बूढा ब्राह्मण आया और उसने कहा कि प्रभु का विग्रह बनाने की जिम्मेदारी वो लेना चाहता है।लकिन उसकी एक शर्त थी – कि वो विग्रह बन्द कमरे में बनायेगा और उसका काम खत्म होने तक कोई भी कमरे का दरवाजा नहीं खोलेगा, नहीं तो वो काम अधूरा छोड़ कर चला जायेगा।

Speech on Rath Yatra in Oriya Language

भारत भर में मनाए जाने वाले महोत्सवों में जगन्नाथपुरी की रथयात्रा सबसे महत्वपूर्ण है। यह परंपरागत रथयात्रा न सिर्फ हिन्दुस्तान, बल्कि विदेशी श्रद्धालुओं के भी आकर्षण का केंद्र है। श्रीकृष्ण के अवतार जगन्नाथ की रथयात्रा का पुण्य सौ यज्ञों के बराबर माना गया है।

पुरी का जगन्नाथ मंदिर भक्तों की आस्था केंद्र है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। जो अपनी बेहतरीन नक्काशी व भव्यता लिए प्रसिद्ध है। यहां रथोत्सव के वक्त इसकी छटा निराली होती है, जहां प्रभु जगन्नाथ को अपनी जन्मभूमि, बहन सुभद्रा को मायके का मोह यहां खींच लाता है। रथयात्रा के दौरान भक्तों को सीधे प्रतिमाओं तक पहुंचने का मौका भी मिलता है।
यह दस दिवसीय महोत्सव होता है। इस दस दिवसीय महोत्सव की तैयारी का श्रीगणेश अक्षय तृतीया को श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा के रथों के निर्माण से होता है और कुछ धार्मिक अनुष्ठान भी महीने भर किए जाते हैं।
जगन्नाथजी का रथ ‘गरुड़ध्वज’ या ‘कपिलध्वज’ कहलाता है। 16 पहियों वाला रथ 13.5 मीटर ऊंचा होता है जिसमें लाल व पीले रंग के कप़ड़े का इस्तेमाल होता है। विष्णु का वाहक गरुड़ इसकी हिफाजत करता है। रथ पर जो ध्वज है, उसे ‘त्रैलोक्यमोहिनी’ कहते हैं। बलराम का रथ ‘तलध्वज’ के बतौर पहचाना जाता है, जो 13.2 मीटर ऊंचा 14 पहियों का होता है। यह लाल, हरे रंग के कपड़े व लकड़ी के 763 टुकड़ों से बना होता है। रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं। रथ के ध्वज को उनानी कहते हैं। त्रिब्रा, घोरा, दीर्घशर्मा व स्वर्णनावा इसके अश्व हैं। जिस रस्से से रथ खींचा जाता है, वह बासुकी कहलाता है।’पद्मध्वज’ यानी सुभद्रा का रथ। 12.9 मीटर ऊंचे 12 पहिए के इस रथ में लाल, काले कपड़े के साथ लकड़ी के 593 टुकड़ों का इस्तेमाल होता है। रथ की रक्षक जयदुर्गा व सारथी अर्जुन होते हैं। रथध्वज नदंबिक कहलाता है। रोचिक, मोचिक, जिता व अपराजिता इसके अश्व होते हैं। इसे खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुडा कहते हैं।

Ratha Yatra Speech in Bengali

জগন্নাথপুরির রথযাত্রা সমগ্র ভারতে পালিত সবচেয়ে গুরুত্বপূর্ণ উত্সবের অন্যতম। এই ঐতিহ্যবাহী রথযাত্রাটি শুধু হিন্দুস্তানের আকর্ষণের কেন্দ্র নয়, বিদেশী ভক্তদেরও। ভগবান শ্রীকৃষ্ণের রথযাত্রাটির সদৃশ শত শতকের সমান বলে বিবেচিত হয়।

পুরি জগন্নাথ মন্দিরটি ভক্তদের জন্য বিশ্বাসের একটি কেন্দ্র, যেখানে সারাবছর ভক্তদের ভিড় রয়েছে। তার চমৎকার carvings এবং মহত্ত্ব জন্য বিখ্যাত। এখানে, রথযাত্রার সময়, তার ছায়া অনন্য, যেখানে লর্ড জগন্নাথ তার জন্মস্থান, বোন সুভূদ্রা এবং তার মা এর আকর্ষণে আকৃষ্ট হয়। রথযাত্রার সময় ভক্তরা সরাসরি মূর্তিগুলিতে সরাসরি পৌঁছানোর সুযোগ পায়।
এটি একটি দশ দিন উৎসব। এই দশ দিনের উৎসব প্রস্তুতি শ্রীকৃষ্ণ, বাল্রম ও সুভূর রথ নির্মাণ দ্বারা সম্পন্ন হয়, এবং কিছু ধর্মীয় অনুষ্ঠানও সারা মাস ধরে পরিচালিত হয়।
জগন্নাথের রথটিকে ‘গুরত্বভজ’ বা ‘কাপিলভভ’ বলা হয়। 16-চক্রের রথ 13.5 মিটার উচ্চ, লাল এবং হলুদ কাপড় ব্যবহৃত হয়। বিষ্ণুর বাহক গরুড়, এটি রক্ষা করে। রথের পতাকাটি ‘ট্রলকয়মোহিনী’ নামে পরিচিত। বালামের রথটি ‘তালুহুজ’ নামে পরিচিত, যা 14 টি চাকা 13.2 মিটার উচ্চ। এটি 763 টুকরো লাল, সবুজ কাপড় এবং কাঠের তৈরি। রথগুলি বাগানে বাজীদ এবং সারথি মুথালে দ্বারা সংরক্ষিত। রথের পতাকাটি আসানী বলা হয়। ত্রিরা, ঘোড়া, লঙ্গশার্মা এবং স্বর্ণাভায় তার ঘোড়া। রথটি দ্বারা রশিটি টানা হয়, এটি বসুকি নামে পরিচিত। পদ্মভূষণ অর্থ সুধাদর রথ। 12.9 মিটার উচ্চ 1২-চক্র রথ লাল, কালো কাপড় দিয়ে 593 টুকরা কাঠ ব্যবহার করে। রথের রক্ষিবাহিনী, জ্যন্ডুর্গ ও সারথি অর্জুন। র্যাভভভকে নাদাম্বিক বলা হয়। রচিক, মোচিক, জিতা এবং অপরাজিটি তার ঘোড়া। টানা দৌড়কে গোল্ডেন চুনডা বলা হয়।

Rath Yatra Essay in English

अक्सर class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो को कहा जाता है रथ यात्रा पर निबंध लिखें| यहाँ हमने हर साल 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 व 2019 के अनुसार Rath Yatra Quotes, ratha yatra essay in hindi, rath yatra essay in oriya, rath yatra bengali essay, रथ यात्रा फोटो , rath yatra par nibandh, रथ यात्रा पर कविता, rath yatra nibandh in gujarati, Speech on Rath Yatra, essay on rath yatra in hindi, Rath Yatra Drawing pictures, Paragraph on Rath Yatra essay on rath yatra in english, दिए हैं जो की रथ यात्रा टॉपिक पर निश्चित रूप से आयोजन समारोह या बहस प्रतियोगिता (debate competition) यानी स्कूल कार्यक्रम में स्कूल या कॉलेज में निबंध में भाग लेने में छात्रों की सहायता करेंगे। इन रथ यात्रा पर हिंदी स्पीच हिंदी में 100 words, 150 words, 200 words, 400 words जिसे आप pdf download भी कर सकते हैं|

Ratha Yatra  also referred to as Rathayatra, Rathjatra or Chariot festival is any public procession in a chariot.The term particularly refers to the annual Rathayatra in Odisha, Jharkhand and other East Indian states , particularly the Odia festival. that involve a public procession with a chariot with deities Jagannath (Vishnu avatar), Balabhadra (his brother), Subhadra (his sister) and Sudarshana Chakra (his weapon) on a ratha, a wooden deula-shaped chariot. It attracts over a million Hindu pilgrims who join the procession each year.

Rathayatra processions have been historically common in Vishnu-related (Jagannath, Rama, Krishna) traditions in Hinduism across India,[6] in Shiva-related traditions, saints and goddesses in Nepal, with Tirthankaras in Jainism, as well as tribal folk religions found in the eastern states of India. Notable ratha yatras in India include the Ratha yatra of Puri, the Dhamrai Ratha Yatra and the Ratha Yatra of Mahesh. Hindu communities outside India, such as in Singapore, celebrate Rathayatra such as those associated with Jagannath, Krishna, Shiva and Mariamman. According to Knut Jacobsen, a Rathayatra has religious origins and meaning, but the events have a major community heritage, social sharing and cultural significance to the organizers and participants.

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