Essay (Nibandh)

साक्षरता दिवस पर निबंध – World Literacy Day Essay & Speech

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World Literacy Day 2019: अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाना साक्षरता की ओर मानवीय ध्यान को बढ़ावा देना और सामाजिक और मानव विकास के लिए उनके अधिकारों को जानना है। साक्षरता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना कि जीवित और सफल होने के लिए भोजन। गरीबी उन्मूलन, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता प्राप्त करना आदि बहुत आवश्यक है। साक्षरता में परिवार की स्थिति और इसलिए देश का दर्जा बढ़ाने की क्षमता है। यह लोगों को निरंतर शिक्षा प्राप्त करने और परिवार, समाज और देश के लिए उनकी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है।

विश्व साक्षरता दिवस पर भाषण

अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (अंग्रेज़ी: International Literacy Day) विश्व में 8 सितंबर को मनाया जाता है। वर्तमान युग में शिक्षा बहुत ज़रूरी है। शिक्षा के बिना किसी कार्यक्रम का नियोजन सम्भव नहीं है। शिक्षा हमारे जीवन का आवश्यक अंग है। सरकार सर्वशिक्षा अभियान चलाकर प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर बनाने के लिए विभिन्न योजनायें संचालित कर रही है। एक व्यक्ति का शिक्षित होना उसके स्वयं का विकास है, वहीं एक बालिका शिक्षित होकर पूरे घर को संवार सकती है। जब देश का हर नागरिक साक्षर होगा तभी देश की तरक़्क़ी हो सकेगी। [1]

तात्पर्य
साक्षरता का तात्पर्य सिर्फ़ पढ़ना-लिखना ही नहीं बल्कि यह सम्मान, अवसर और विकास से जुड़ा विषय है। दुनिया में शिक्षा और ज्ञान बेहतर जीवन जीने के लिए ज़रूरी माध्यम है। आज अनपढ़ता देश की तरक़्क़ी में बहुत बड़ी बाधा है। जिसके अभिशाप से ग़रीब और ग़रीब होता जा रहा है।

उद्देश्य
साक्षरता दिवस का प्रमुख उद्देश्य नव साक्षरों को उत्साहित करना है। अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमारे लिये अहम दिवस है, क्योंकि हमारे जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महत्त्व है। हमारे देश में पुरुषों की अपेक्षा महिला साक्षरता कम है। हमें आज के दिन यह संकल्प लेना होगा कि हर व्यक्ति साक्षर बनें, निरक्षर कोई न रहे। हमें अपने यहाँ से निरक्षता को भगाना होगा।

शैक्षिक इतिहास
भारत का शैक्षिक इतिहास अत्यधिक समृद्ध है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों द्वारा शिक्षा मौखिक रूप में दी जाती थी। शिक्षा का प्रसार वर्णमाला के विकास के पश्चात् भोज पत्र और पेड़ों की छालों पर लिखित रूप में होने लगा। इस कारण भारत में लिखित साहित्य का विकास तथा प्रसार होने लगा। देश में शिक्षा जन साधारण को बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ उपलब्ध होने लगी। नालन्दा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसी विश्व प्रसिद्ध शिक्षा संस्थानों की स्थापना ने शिक्षा के प्रचार में अहम भूमिका निभाई। लोगों में व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए साक्षरता एक बड़ी ज़रूरत है।

शिक्षा का प्रसार
भारत में अंग्रेज़ों के आगमन से यूरोपीय मिशनरियों ने अंग्रेज़ी शिक्षा का प्रचार किया। इसके बाद से भारत में पश्चिमी पद्धति का निरन्तर प्रसार हुआ है। वर्तमान समय में भारत में सभी विषयों के शिक्षण हेतु अनेक विश्वविद्यालय और उनसे जुड़े़ हजा़रों महाविद्यालय हैं। भारत ने उच्च कोटि की उच्चतर शिक्षा प्रदान करने वाले विश्व के अग्रणी देशों में अपना स्थान बना लिया है।

शुल्क में वृद्धि
शिक्षा के शुल्क में अनेक कारणों से (विशेष रूप से व्यावसायिक शिक्षा) निरन्तर वृद्धि हो रही है। इस कारण ग़रीब परिवार के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होने लगी है।[2]

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की सभी महिलाओं को अगले पाँच सालों में साक्षर बनाने के लक्ष्य के साथ अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर महिलाओं के लिए विशेष तौर पर ‘साक्षर भारत’ मिशन का शुभारंभ किया था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई थी कि ‘साक्षर भारत’ मिशन, राष्ट्रीय साक्षरता मिशन से भी ज़्यादा सफल साबित होगा। उन्होंने कहा था कि- “देश की एक तिहाई आबादी निरक्षर है। देश की आधी महिलाएं अभी भी पढ़-लिख नहीं सकतीं। साक्षरता के मामले में हम विश्व में सबसे पिछड़े देशों में शुमार हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि- “अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य वंचित व पिछड़े वर्गो की महिलाओं का साक्षर न होना हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती है और हमें इस चुनौती से पार पाना होगा। यदि हमें सभी नागरिकों को सशक्त करना है और तेज़ी से विकास करना है तो देश को पूरी तरह से साक्षर करना होगा। जिस ‘साक्षर भारत’ मिशन की आज हम शुरुआत कर रहे हैं वह साक्षरता के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को ज़ाहिर करता है। यह मिशन ख़ासकर महिलाओं में साक्षरता की दर बढ़ाने की हमारी कोशिश में मददगार साबित होगा।”

उन्होंने कहा कि- “साक्षरता के मामले में आज़ादी के बाद से हमने लगातार वृद्धि की है। वर्ष 1950 में साक्षरता की दर 18 फ़ीसदी थी, जो वर्ष 1991 में 52 फ़ीसदी और वर्ष 2001 में 65 फ़ीसदी पहुँच गयी।”[3]

भारत भी बन सकता है, शत प्रतिशत साक्षर
साक्षरता दिवस का दिन हमें सोचने को मजबूर करता है, कि हम क्यो 100% साक्षर नहीं हैं। यदि केरल को छोड़ दिया जाए तो बाकि राज्यों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है। सरकार द्वारा साक्षरता को बढ़ने के लिए सर्व शिक्षा अभियान, मिड दे मील योजना, प्रौढ़ शिक्षा योजना, राजीव गाँधी साक्षरता मिशन आदि न जाने कितने अभियान चलाये गये, मगर सफलता आशा के अनुरूप नहीं मिली। मिड दे मील में जहाँ बच्चो को आकर्षित करने के लिए स्कूलों में भोजन की व्यवस्था की गयी, इससे बच्चे स्कूल तो आते हैं, मगर पढ़ने नहीं खाना खाने आते हैं। शिक्षक लोग पढ़ाई की जगह खाना बनवाने की फिकर में लगे रहते हैं। हमारे देश में सरकारी तौर पर जो व्यक्ति अपना नाम लिखना जानता है, वह साक्षर है। आंकड़े जुटाने के समय जो घोटाला होता है, वो किसी से छुपा नहीं है। अगर सही तरीक़े से साक्षरता के आंकडे जुटाए जाए तो देश में 64.9% लोग शायद साक्षर न हो। सरकारी आंकडो पर विश्वास कर भी लिया जाए तो भारत में 75.3% पुरुष और 53.7% महिलायें ही साक्षर हैं।

साक्षर कैसे बने
भारत 100% साक्षर कैसे बने। भारत में सबसे ज़्यादा विश्वविद्यालय है। हमारे देश में हर साल लगभग 33 लाख विद्यार्थी स्नातक होते हैं। उसके बाद बेरोज़गारों की भीड़ में खो जाते हैं। हम हर साल स्नातक होने वाले विद्यार्थियो का सही उपयोग साक्षरता को बढ़ाने में कर सकते हैं। स्नातक के पाठ्यक्रम में एक अतिरिक्त विषय जोड़ा जाए, जो सभी के लिए अनिवार्य हो। इस विषय में सभी छात्रों को एक व्यक्ति को साक्षर बनाने की ज़िम्मेदारी लेनी होगी। शिक्षकों के द्वारा इसका मूल्यांकन किया जाएगा। अन्तिम वर्ष में मूल्यांकन के आधार पर अंकसूची में इसके अंक भी जोड़े जाए। इससे हर साल लगभग 33 लाख लोग साक्षर होंगे। वो भी किसी सरकारी खर्च के बिना।

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अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास
यूनेस्को ने 7 नवंबर 1965 में ये फैसला किया कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर वर्ष 8 सितंबर को मनाया जायेगा जोकि पहली बार 1966 से मनाना शुरु हुआ। व्यक्ति, समाज और समुदाय के लिये साक्षरता के बड़े महत्व को ध्यान दिलाने के लिये पूरे विश्व भर में इसे मनाना शुरु किया गया। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिये वयस्क शिक्षा और साक्षरता की दर को दुबारा ध्यान दिलाने के लिये इस दिन को खासतौर पर मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह
शिक्षा पर वैश्विक निगरानी रिपोर्ट के अनुसार ये ध्यान देने योग्य है कि हर पाँच में से एक पुरुष और दो-तिहाई महिलाएँ अनपढ़ है। उनमें से कुछ के पास कम साक्षरता कौशल है, कुछ बच्चों की पहुँच आज भी स्कूलों से बाहर है और कुछ बच्चे स्कूलों में अनियमित रहते हैं। लगभग 58.6% की सबसे कम वयस्क साक्षरता दर दक्षिण और पश्चिम एशिया के नाम है। बुरकिना फासो, माली और नाइजर वो देश है जहाँ सबसे कम साक्षरता दर है।

यह पूरे विश्व में शिक्षा की खास विषय-वस्तु, कार्यक्रम और लक्ष्य से साथ मनाया जाता है। वर्ष 2007 और 2008 में इस दिन की विषय-वस्तु साक्षरता और स्वास्थ्य था (टीबी, कॉलेरा, एचआईवी और मलेरिया जैसी फैलने वाली बीमारी से लोगों को बचाने के लिये महामारी के ऊपर मजबूत ध्यान देने के लिये)। वर्ष 2009 और 2010 का मुद्दा साक्षरता और महिला सशक्तिकरण था जबकि 2011 और 2012 के इस उत्सव का विषय साक्षरता और शांति था।

समाज की साक्षरता दर को बढ़ावा देने के लिये असाधारण मूल्य के लिखित शब्द और जरुरत के बारे सार्वजनिक चेतना को बढ़ावा देने के लिये इस दिन को मनाने का खास महत्व है। साक्षरता सुधार की मदद करने के लिये कुछ लेखकों ने लेख लिखे हैं वो हैं- मारगरेट एटवुड, पॉलो कोहेलहो, फिलीप डेलर्म, पॉल ऑस्टर, फिलीप क्लॉडेल, फैटेउ डियोम आदि और भी बहुत सारे। कुछ कंपनियाँ, दानी संस्थाएँ, वैश्विक विकास शोध केन्द्र, रोटरी अंतर्राष्ट्रीय, मौंटब्लैंक और राष्ट्रीय साक्षरता संस्थान भी सामाजिक साक्षरत को बढ़ावा देने में शामिल हैं। साक्षरता इंसान के जीवन को आकार देने के साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी बनाता है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्यों मनाया जाता है
मानव विकास और समाज के लिये उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। सफलता और जीने के लिये खाने की तरह ही साक्षरता भी महत्वपूर्णं है। गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरुरी है। साक्षरता में वो क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। ये उत्सव लगातार शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने के लिये और परिवार, समाज तथा देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिये मनाया जाता है।

साक्षरता दिवस मराठी भाषण

World Literacy Day Speech in Hindi

“शिक्षण आयुष्यासाठी तयारी नाही; शिक्षण हेच जीवन आहे. “- जॉन डेव्ही

मर्यादा किंवा मर्यादा नसलेल्या, केवळ कोळशापासून हिरा बनविणारी एकमेव गोष्ट म्हणजे शिक्षण शिक्षणासारखी शक्तीशाली काहीही नाही आणि आपण या शक्तीचे वितरण करण्याच्या उद्दिष्टांची पुनरावृत्ती करण्याचा दिवस साजरा केला पाहिजे.
दरवर्षी, 8 सप्टेंबरला जागतिक साक्षरता दिन साजरा केला जातो. यावर्षी, युनेस्को आंतरराष्ट्रीय वाचन दिन 51tst वर्धापनदिन “वाचन पाश्चात्य, लेखन भविष्यातील” सह उद्धरण आहे. आजचा दिवस जगभरात साजरा केला जातो ज्यायोगे व्यक्ती, समाज आणि समुदायांना साक्षरतेचे महत्त्व समजले जाते.

युनेस्कोचे महासंचालक इरीना बोकोवा म्हणाले, “1 9 66 पासून जग बदलले आहे, परंतु प्रत्येक स्त्री आणि पुरुष ज्याची क्षमता, कौशल्य आणि सर्व इच्छा, सन्मान आणि सन्मानात्मक स्थितीत राहण्यासाठी संधी देण्याचे आमचे निश्चय ते आजपर्यंत कायम अवघड आहे. साक्षरता हा सर्वांसाठी एक अधिक शाश्वत भविष्य निर्माण करण्यासाठी पाया आहे. ”

जागतिक म्युच्युअलेशनच्या अहवालाप्रमाणे हे दिसून आले आहे की दर पाच पुरुष आणि दोन तृतीयांश स्त्रियांपैकी एक निरक्षर अशिक्षित आहे. म्हणून साक्षरता दर वाढवण्यासाठी जागतिक साक्षरता दिन साजरा केला जातो.

आम्ही आंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिन साजरा का करतो-
आंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिन साजरा करण्याचा मुख्य हेतू म्हणजे साक्षरतेबद्दल जागरुकता वाढवणे जेणेकरून प्रत्येकजण त्यांचे सामाजिक आणि वैयक्तिक अधिकार जाणून घेऊ शकेल. आपल्याला जीवनाची गरज आहे त्याप्रमाणे अन्नासाठी सामाजिक आणि वैयक्तिक विकासासाठी साक्षर्याची आवश्यकता आहे. गरिबीचे अत्यंत वाढीव दर, बेकायदेशीर लोकसंख्या वाढ, लिंग असमानता इत्यादि लक्षात घेता, युनेस्कोने या समस्यांना दूर करण्यासाठी एक दिवस साजरा करण्याचे ठरविले आहे. त्यांना दूर करण्याने केवळ व्यक्तींनाच वाढण्यास मदत मिळत नाही, तर देशाच्या एकूण विकासासाठी आणि उत्थाननास देखील योगदान होते.

साक्षरता महत्त्वाची का आहे?
साक्षरता केवळ रोजगार मिळविण्याचा मार्ग नाही, हे मानवाधिकार जाणून घेण्यास प्रोत्साहन देते जेणे करून प्रत्येकजण जे पात्र असेल ते प्राप्त करू शकेल. निरक्षरता असल्यामुळे बरेच लोक दररोज निराश होतात. याव्यतिरिक्त, ते स्वतःच्या आयुष्यात संघर्षापुढे भरभराट करतात. म्हणून स्थानिक आणि शाळेच्या वाचनालयांमधील माहिती मिळविण्यासाठी एक उत्तम जग निर्माण करण्यासाठी आणि सामुदायिक संसाधनांचा वापर करण्यासाठी, साक्षरता अत्यंत महत्त्वाची आहे

जगभरात साक्षरता प्रसारित करण्याच्या मोहिमेत, रोबोमेट + ने एक पुढाकार घेतला आहे. हे भारतातील सर्वात मोठे व्हिडिओ प्लॅटफॉर्म आहे जे समजण्यास सोपे आणि परस्परसंवादी व्हिडिओ व्याख्यान देते. आपण कोणत्या वर्गापैकी किंवा परीक्षेसाठी तयारी करत आहात हे महत्त्वाचे नाही, जवळजवळ प्रत्येक संकल्पनावर व्हिडिओ व्याख्याने रोबोमेट + येथे उपलब्ध आहेत.

तर आपण या साक्षरता दिवशी प्रतिज्ञा करूया, आपण शिकतो, शिकवतो, आम्ही प्रेरणा देतो, आपले भविष्य ज्ञान आणि यशाने पूर्ण करण्यासाठी.

World Literacy Day Speech in Tamil

கல்வி என்பது வாழ்க்கைக்கான தயாரிப்பு அல்ல; கல்வி என்பது வாழ்க்கைதான். “- ஜான் டெவே

எல்லைகள் அல்லது வரம்புகள் இல்லாத நிலையில், நிலக்கரியிலிருந்து ஒரு வைரத்தை உங்களால் செய்ய முடியும் என்பது மட்டுமே கல்வி. கல்வியில் அதிக சக்தி வாய்ந்த ஒன்றுமில்லை, இந்த அதிகாரத்தை வழங்குவதற்கான இலக்குகளை மாற்றியமைக்க நாளையே நாம் கொண்டாட வேண்டும்.
ஒவ்வொரு ஆண்டும், உலக எழுத்தறிவு தினம் செப்டம்பர் 8 அன்று கொண்டாடப்படுகிறது. இந்த ஆண்டு, யுனெஸ்கோ சர்வதேச எழுத்தாளர் தினத்தின் 51 வது ஆண்டு நிறைவை கொண்டாடுகிறது, “படித்தல் படித்தல், எதிர்காலத்தை எழுதுதல்”. தனிநபர்கள், சமூகம் மற்றும் சமூகங்களுக்கான கல்வியின் முக்கியத்துவத்தைப் பற்றி விழிப்புணர்வை பரப்புவதற்காக உலகெங்கும் இந்த நாள் கொண்டாடப்படுகிறது.

யுனெஸ்கோவின் இயக்குநர் ஜெனரல் இரினா பொகோவா கூறுகையில், “உலகம் 1966 இலிருந்து மாறிவிட்டது, ஆனால் ஒவ்வொரு பெண்ணும், மனிதனுக்கும் திறமை, திறமை, வாய்ப்புகள் ஆகியவற்றைக் கொண்டு, அவர்கள் விரும்பும் எல்லாவற்றையும், மரியாதையுடனும் மரியாதையுடனும் கொண்டுவர வேண்டும் என்ற எங்கள் உறுதிப்பாடு எப்பொழுதும் உறுதியாக உள்ளது. கல்வியறிவு ஒரு முழுமையான எதிர்காலத்தை உருவாக்குவதற்கான அடித்தளம் ஆகும். ”

உலகளாவிய கண்காணிப்பு அறிக்கையின் படி, ஒவ்வொரு 5 ஆண்கள் மற்றும் மூன்றில் மூன்றில் ஒரு பெண்மணியாக உள்ளவர்கள் படிப்பறிவில்லாதவர்களாக உள்ளனர். எனவே, எழுத்தறிவு விகிதம் அதிகரிக்க உலக எழுத்தறிவு தினம் கொண்டாடப்படுகிறது.

ஏன் சர்வதேச எழுத்தறிவு தினத்தை கொண்டாடுகிறோம்?
சர்வதேச எழுத்தறிவு தினத்தை கொண்டாடும் பிரதான நோக்கம் கல்வியறிவுக்கான விழிப்புணர்வை ஊக்குவிப்பதாகும், இதனால் அனைவரும் தங்கள் சமூக மற்றும் தனிப்பட்ட உரிமைகளை அறிந்து கொள்ளலாம். எங்களுக்கு உணவு இருக்க வேண்டும் என, சமூக மற்றும் தனிப்பட்ட வளர்ச்சிக்கு எழுத்தறிவு தேவை. வறுமையின் அதிகரித்த விகிதம், கட்டுப்பாடற்ற மக்கள்தொகை வளர்ச்சி, பாலின சமத்துவமின்மை போன்றவற்றை கருத்தில் கொண்டு யுனெஸ்கோ இந்த பிரச்சினைகளை அகற்ற ஒரு குறிக்கோளுடன் கொண்டாட முடிவு செய்துள்ளது. அவர்களை நீக்குதல் தனிநபர்கள் வளர உதவுகிறது மட்டும், ஆனால் நாட்டின் ஒட்டுமொத்த வளர்ச்சி மற்றும் மேம்பாட்டு பங்களிப்பு.

ஏன் எழுத்தறிவு முக்கியமானது-
எவ்வாறாயினும், எழுத்தறிவு வேலைவாய்ப்பை மட்டுமல்லாமல், மனித உரிமைகளை அறிந்து கொள்ள ஊக்குவிக்கிறது, அதனால் அனைவருக்கும் அவர்கள் தகுதியுள்ளவர்களாவார்கள். கல்வியறிவு காரணமாக, பலர் ஒவ்வொரு நாளும் அவமானத்தை எதிர்கொள்கிறார்கள். மேலும், அவர்களது சொந்த வாழ்க்கையை போராட்டங்களை முழுமையாக்குகின்றனர். எனவே, ஒரு சிறந்த உலகத்தை உருவாக்கவும், உள்ளூர் மற்றும் பள்ளி நூலகங்களில் இருந்து தகவல்களைப் பெறுவதற்காக சமூக வளங்களைப் பயன்படுத்தவும், கல்வியறிவு மிகவும் முக்கியமானது.

உலகெங்கிலும் எழுத்தறிவுகளை பரப்புவதற்கு இந்த முயற்சியில், Robomate + ஒரு முன்முயற்சியை எடுத்துள்ளது. புரிந்துணர்வு மற்றும் ஊடாடும் வீடியோ விரிவுரைகளை வழங்குவதில் இந்தியாவின் மிகப்பெரிய வீடியோ தளம் இதுவாகும். எந்த வகுப்பு அல்லது பரீட்சை தயாரிக்கிறதோ, எந்தவொரு கருத்தும் வீடியோ விரிவுரைகள் Robomate இல் கிடைக்கின்றன.

எனவே, இந்த கல்வியறிவு நாளில் உறுதியளிக்கிறேன், நாம் கற்பிக்கிறோம், கற்பிக்கிறோம், ஊக்குவிக்கிறோம், அறிவையும் வெற்றிகளையும் எமது எதிர்காலத்தை முழுமையாக்குவதற்கு

World Literacy Day Speech in Punjabi

ਸਿੱਖਿਆ ਜੀਵਨ ਲਈ ਤਿਆਰੀ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ; ਸਿੱਖਿਆ ਜੀਵਨ ਹੈ. “- ਜੌਹਨ ਡੇਵੀ

ਕੋਈ ਸੀਮਾ ਜਾਂ ਹੱਦ ਨਹੀਂ, ਸਿਰਫ ਇਕ ਚੀਜ਼ ਹੈ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕੋਲੇ ਤੋਂ ਇਕ ਹੀਰਾ ਬਣਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਸਿੱਖਿਆ ਹੈ ਸਿੱਖਿਆ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਕੁਝ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਨੂੰ ਇਹ ਸ਼ਕਤੀ ਵੰਡਣ ਦੇ ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਦੁਹਰਾਉਣ ਲਈ ਦਿਨ ਦਾ ਜਸ਼ਨ ਮਨਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ.
ਹਰ ਸਾਲ, ਵਿਸ਼ਵ ਸਾਖਰਤਾ ਦਿਵਸ 8 ਸਤੰਬਰ ਨੂੰ ਮਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਇਸ ਸਾਲ, ਯੂਨੇਸਕੋ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਾਖਰਤਾ ਦਿਵਸ ਦੇ 51 ਵੀਂ ਬਰਸੀ ਮੌਕੇ “ਰੀਡਿੰਗ ਦ ਪਸਟ, ਰਾਈਟਿੰਗ ਦ ਫਿਊਚਰ” ਦੇ ਹਵਾਲੇ ਨਾਲ ਮਨਾ ਰਿਹਾ ਹੈ. ਇਸ ਦਿਨ ਨੂੰ ਲੋਕਾਂ, ਸਮਾਜ ਅਤੇ ਸਮੁਦਾਇਆਂ ਨੂੰ ਸਾਖਰਤਾ ਦੇ ਮਹੱਤਵ ਬਾਰੇ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਫੈਲਾਉਣ ਲਈ ਸੰਸਾਰ ਭਰ ਵਿੱਚ ਮਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ.

ਯੂਨੈਸਕੋ ਦੇ ਡਾਇਰੈਕਟਰ-ਜਨਰਲ ਇਰਿਨਾ ਬੋਕੋਵਾ ਨੇ ਕਿਹਾ, “ਸੰਸਾਰ 1966 ਤੋਂ ਬਦਲ ਗਿਆ ਹੈ, ਪਰ ਹਰ ਔਰਤ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ, ਹੁਨਰ, ਅਤੇ ਜੋ ਵੀ ਉਹ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਬਣਨ ਦੇ ਮੌਕਿਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਨਿਧਤਾ ਕਰਦੇ ਹਨ. ਸਾਖਰਤਾ ਸਾਰਿਆਂ ਲਈ ਇੱਕ ਵੱਧ ਸਥਾਈ ਭਵਿੱਖ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਬੁਨਿਆਦ ਹੈ. ”

ਗਲੋਬਲ ਨਿਗਰਾਨੀ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, ਇਹ ਦੇਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਹਰੇਕ 5 ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਅਤੇ ਦੋ ਤੀਹਤਰੀ ਔਰਤਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਅਨਪੜ੍ਹ ਹੈ. ਇਸ ਲਈ, ਸਾਖਰਤਾ ਦਰ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਵਿਸ਼ਵ ਸਾਖਰਤਾ ਦਿਵਸ ਮਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ.

ਅਸੀਂ ਇੰਟਰਨੈਸ਼ਨਲ ਸਾਖਰਤਾ ਦਿਵਸ-
ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਾਖਰਤਾ ਦਿਵਸ ਮਨਾਉਣ ਦਾ ਮੁੱਖ ਮਕਸਦ ਸਾਖਰਤਾ ਪ੍ਰਤੀ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਪੈਦਾ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਹਰ ਕੋਈ ਆਪਣੇ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਜਾਣ ਸਕੇ. ਜਿਉਂ ਜਿਉਂ ਜਿਉਂ ਜਿਉਂ ਜਿਉਂ ਜਿਉਂ ਜਿਉਂ ਜਿਉਂ ਜਿਉਂ ਜਿਉਣ ਦੀ ਸਾਨੂੰ ਲੋੜ ਪੈਂਦੀ ਹੈ, ਸਾਨੂੰ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਨਿੱਜੀ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਸਾਖਰਤਾ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਗਰੀਬੀ ਦੀ ਬੇਹੱਦ ਵਾਧਾ ਦਰ, ਬੇਕਾਬੂ ਆਬਾਦੀ ਵਾਧਾ, ਲਿੰਗ ਅਸਮਾਨਤਾ ਆਦਿ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖਦੇ ਹੋਏ, ਯੂਨੇਸਕੋ ਨੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਦਿਮਾਗ ਦੇ ਨਾਲ ਦਿਨ ਮਨਾਉਣ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਕੀਤਾ ਹੈ. ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨ ਨਾਲ ਨਾ ਸਿਰਫ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀ ਮਦਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸਗੋਂ ਕੌਮ ਦੀ ਸਮੁੱਚੀ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ ਵਿਚ ਵੀ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਉਂਦਾ ਹੈ.

ਕਿਉਂ ਸਾਖਰਤਾ ਅਹਿਮ ਹੈ-
ਸਾਖਰਤਾ ਸਿਰਫ ਨੌਕਰੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਮਨੁੱਖੀ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਜਾਣਨ ਲਈ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿ ਹਰ ਕੋਈ ਉਹ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕੇ ਜਿਸ ਦੀ ਉਹ ਹੱਕਦਾਰ ਹੈ. ਅਨਪੜ੍ਹਤਾ ਦੇ ਕਾਰਨ, ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲੋਕ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਬੇਇੱਜ਼ਤੀ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਦੇ ਹਨ. ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ, ਉਹ ਖੁਦ ਆਪਣੀ ਜਿੰਦਗੀ ਸੰਘਰਸ਼ਾਂ ਨਾਲ ਭਰੇ ਹੋਏ ਹਨ. ਇਸ ਲਈ, ਇੱਕ ਵਧੀਆ ਸੰਸਾਰ ਬਣਾਉਣ ਅਤੇ ਸਥਾਨਕ ਅਤੇ ਸਕੂਲ ਲਾਇਬਰੇਰੀਆਂ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕਮਿਊਨਿਟੀ ਵਸੀਲਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਲਈ, ਸਾਖਰਤਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ

ਵਿਸ਼ਵ ਭਰ ਵਿੱਚ ਸਾਖਰਤਾ ਨੂੰ ਫੈਲਾਉਣ ਦੇ ਮਿਸ਼ਨ ਵਿੱਚ, ਰੋਬੈਟ + ਨੇ ਇੱਕ ਪਹਿਲ ਕੀਤੀ ਹੈ ਇਹ ਭਾਰਤ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਵੀਡੀਓ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਹੈ ਜੋ ਸਮਝਣ ਵਿਚ ਆਸਾਨ ਅਤੇ ਇੰਟਰਐਕਟਿਵ ਵੀਡੀਓ ਲੈਕਚਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ. ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਕਿਹੜਾ ਕਲਾਸ ਜਾਂ ਇਮਤਿਹਾਨ ਤੁਸੀਂ ਤਿਆਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ, ਤਕਰੀਬਨ ਹਰੇਕ ਸੰਕਲਪ ਤੇ ਵੀਡੀਓ ਭਾਸ਼ਣ ਰੋਕੋਮੇਟ + ਤੇ ਉਪਲਬਧ ਹਨ.

ਸੋ ਆਓ ਇਸ ਸਾਖਰਤਾ ਦਿਹਾੜੇ ‘ਤੇ ਵਾਅਦਾ ਕਰੀਏ, ਅਸੀਂ ਸਿੱਖਦੇ ਹਾਂ, ਅਸੀਂ ਸਿਖਾਉਂਦੇ ਹਾਂ, ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਭਵਿੱਖ ਨੂੰ ਗਿਆਨ ਅਤੇ ਸਫ਼ਲਤਾ ਨਾਲ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ.

World Literacy Day Essay in English

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“Education is not preparation for life; Education is life itself.” – John Dewey

With no boundaries or limitation, the only thing that can make you a diamond from coal is Education. There is nothing as powerful as education and we should celebrate the day to revise the goals of distributing this power.
Every year, the World Literacy Day is celebrated on September 8. This year, UNESCO is celebrating the 51tst anniversary of International Literacy Day with the quote “Reading the Past, Writing the Future”. This day was is celebrated all around the world to spread awareness about the importance of the literacy to individuals, society, and communities.

UNESCO Director-General Irina Bokova said, “The world has changed since 1966, but our determination to offer every woman and man with the capacities, skills, and opportunities to become everything they wish, in respect and dignity, remains as firm as ever. Literacy is a foundation to build a more sustainable future for all.”

As per the report of the global monitoring, it has been observed that one among every 5 men and two third women are illiterate. Hence, to increase the literacy rate World Literacy Day is celebrated.

Why We Celebrate International Literacy Day-
The main purpose to celebrate the International Literacy Day is to encourage awareness towards literacy so that everyone can know their social and individual rights. As we need food to be live, we need literacy for social and personal development. Considering the immensely increased rate of poverty, uncontrollable population growth, gender inequality, etc. UNESCO has decided to celebrate the day with a goal to remove these problems. Eliminating them not only helps individuals to grow, but also contributes to the overall growth and upliftment of the nation.

Why Literacy is Important-
Literacy is not only the way to get employment however, it encourages to know human rights so that everyone can get what they deserve. Due to illiteracy, many people face humiliation every day. Moreover, they make their own life full of struggles. Hence, to make a better world and to make use of community resources for gaining information from local and school libraries, literacy is of utmost important.

In the mission to spread literacy around the globe, Robomate+ has taken an initiative. It is the India’s largest video platform that provides easy to understand and interactive video lectures. No matter which class or exam you are preparing for, video lectures on almost every concept are available at Robomate+.

So let’s pledge on this literacy day, we learn, we teach, we inspire, to make our future full of knowledge and success

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