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विश्व जनसंख्या दिवस पर कविता 2019 – World Population Day Poem in Hindi – World Population Day Kavita

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विश्व जनसंख्या दिवस 2019: दुनिया भर में जनसंख्या मुद्दों की तात्कालिकता और महत्व पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट 2017 के अनुसार, वर्तमान विश्व की जनसंख्या 7.6 बिलियन है और 2030 में 8.6 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।11 जुलाई 1987 को दुनिया की पांच बिलियन आबादी का दिन था, जिसने इस वार्षिक कार्यक्रम की स्थापना की। इसकी शुरुआत 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की तत्कालीन गवर्निंग काउंसिल ने की थी।

World Population Par kavita in Hindi

कौन कहता है
दुनिया की जनसंख्या सात अरब है
मुझे तो लगती यह सात सौ अरब है।

हर आदमी के होते हैं
कई चेहरे, कई रूप
छाँव के रंग बदल जाते हैं
जब आती है कड़ी धूप।

एक संत के चेहरे में
छिपा रहता है शैतान
त्यागी जिसे कहता है जग
आसमां छूता है उसका गुमान।

बिजली से कड़कते हैं
जो बन शब्दों के जाल
हकीकत में खामोश कर देता है उन्हें
किसी का डर तो किसी का माल।

जिसके चेहरे पर मुस्कुराहट, सौम्यता
और विनम्रता का निर्झर बहता है
उसके हाथों में कहीं छिपा
एक खूनी खंजर रहता है।

सच के साथ खड़े होकर
करते हैं जो संपादक झूठ का पर्दाफाश
उनकी नजरों से सुरक्षित है एक औरत
नहीं कर सकते इसका भी विश्वास।

मंदिर में जाकर
चन्दन का जिसने टीका लगाया होगा
नहीं जान सकता कोई
उसके मन में कितना मैल समाया होगा।

सत्य, अहिंसा, मुक्ति पर
जो देता है हर रोज गुरु ज्ञान
कितने अपराधों में होगा संलग्न
नहीं लगा सकते इसका भी अनुमान।

समाज सेवा की आड़ में
सेक्स स्कैंडल जैसे घृणित कार्यों को अंजाम
अहिंसा का मुखौटा लगाकर भी
होता है यहाँ कत्ले आम।

छद्म नारीवादियों के रूप में
जन्मे हैं नारी के नए शोषक
लिखते हैं जो प्रेम शास्त्र
उनमें से कई मिलेंगे नफरत के पोषक।

कायरों ने ओढ़ी शेरों की खाल
सन्यासी हो रहे मालामाल हैं
सच्चा आदमी पहचानना है मुश्किल
हर ओर मकड़ी के जाल हैं।

चिंता जनसंख्या से ज्यादा मुझे
एक आदमी में छिपे सौ चेहरों की है
किसी मासूम को अपना निशाना बनाये
खौफ़नाक पहरो की है।

देर-सबेर बढ़ती जनसंख्या पर
लगाम लग भी जायेगी
पर मुखौटे बदलने की यह प्रवृत्ति
तो दिनों-दिन बढ़ती ही जायेगी।

जनसँख्या नियंत्रण के साथ ही हो नियंत्रण
एक जन में छिपे दुर्जन इरादों पर भी
प्यार की झूठी कसमों पर
और नेता के झूठे वादों पर भी।

क्योंकि समस्याएं मात्रात्मक से ज्यादा
अब गुणात्मक हो रही है
दिखते हैं यहाँ शरीर ही शरीर
आत्माएं सबकी कहीं खो रही है।

विश्व जनसंख्या दिवस पोएम इन हिंदी

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
खाद्द्यान्न संकट खड़ा हो गया
उर्जा संकट बड़ा हो गया

भुखमरी चारो ओर बढ़ी
गरीबी की समस्या सामने खड़ी
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही

बेरोजगारी हताशा ला रही
आर्थिक संकट की चिंता खाए जा रही
महंगाई तेजी से बढ़ रही
आम लोगो का जीना मुश्किल कर रही

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा
जनता को न्याय नहीं मिल रहा
जंगल काटे जाते है
पेड़ न कोई लगाते है

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
चारो ओर प्रदुषण बढ़ते जा रहा
नई नई बीमारिया फैला रहा
खतरे में है वन्यजीवों का जीवन
हो रहे रोज उनपर नए नए सितम

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
हमें इन समस्यायों से निजात पाना होगा
जनसंख्या के बढ़ने पे अंकुश लगाना होगा
हमें कुछ तो कदम उठाना होगा

World Population Day Short Poem

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
खाद्यान्न संकट खड़ा हो गया
उर्जा संकट बड़ा हो गया
भुखमरी चारो ओर बढ़ी
गरीबी की समस्या सामने खड़ी

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
बेरोजगारी हताशा ला रही
आर्थिक संकट की चिंता खाए जा रही
महंगाई तेजी से बढ़ रही
आम लोगो का जीना मुश्किल कर रही

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा
जनता को न्याय नहीं मिल रहा
जंगल काटे जाते है
पेड़ न कोई लगाते है

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
चारो ओर प्रदुषण बढ़ते जा रहा
नई नई बीमारिया फैला रहा
खतरे में है वन्यजीवों का जीवन
हो रहे रोज उनपर नए नए सितम

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
हमें इन समस्यायों से निजात पाना होगा
जनसंख्या के बढ़ने पे अंकुश लगाना होगा
हमें कुछ तो कदम उठाना होगा
छोटा परिवार, सुखी परिवार का नारा लगाना होगा

World Population Day Poem in Hindi Class-6th

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जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
खाद्द्यान्न संकट खड़ा हो गया
उर्जा संकट बढ़ा हो गया
भुखमरी चारो ओर बढ़ी

गरीबी की समस्या सामने खड़ी
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
बेरोजगारी हताशा ला रही
आर्थिक संकट की चिंता खाय जा रही

महंगाई तेजी से बढ़ रही
आम लोगो का जीना मुश्किल कर रही
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही

भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा
जनता को न्याय नहीं मिल रहा
जंगल काटे जाते है
पेड़ न कोई लगाते है
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही

बहुत से समस्याए पैदा कर रही
चारो ओर प्रदुषण बढ़ते जा रहा
नई नई बीमारिया फैला रहा
खतरे में है वन्यजीवों का जीवन

हो रहे रोज उनपर नए नए सितम
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही

हमें इन समस्यायों से निजात पाना होगा
जनसंख्या के बढ़ने पे अंकुश लगाना होगा
हमें कुछ तो कदम उठाना होगा
छोटा परिवार , सुखी परिवार का नारा लगाना होगा

World Population Day Poem in Punjabi

World Population Par kavita

ਜਨਤਾ ਜੋ ਇਸ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ
ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਪੈਦਾ ਕਰ ਰਹੇ
ਖਾਦਨੇ संकट ਖੜ੍ਹਾ ਹੋ ਗਿਆ
ਊਰਜਾ ਸੰਕਟ ਵੱਡੇ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ
ਭੁੱਖਮਰੀ ਚਾਰੋ ਵੱਲ ਵਧੇ
गरीबी ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਸਾਹਮਣੇ
ਜਨਤਾ ਜੋ ਇਸ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ
ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਪੈਦਾ ਕਰ ਰਹੇ
ਬੇਰੋਜ਼ਗਾਰ ਹਤਾਸ਼ਾ ਲਿਆਉਣਾ
ਆਰਥਿਕ ਸੰਕਟ ਦੀ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ
ਮਹਿੰਗਾਈ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧ ਰਹੀ
आम लोगो ਦਾ जीना मुश्किल ਕਰ ਰਹੇ ਕਰਨਾ

ਜਨਤਾ ਜੋ ਇਸ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ
ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਪੈਦਾ ਕਰ ਰਹੇ
ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ
ਜਨਤਾ ਨੂੰ ਨਿਰਣਾ ਨਹੀਂ ਮਿਲ ਰਿਹਾ
जंगल कटे जाते हैं
पेड़ न कोई लगाए है

ਜਨਤਾ ਜੋ ਇਸ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ
ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਪੈਦਾ ਕਰ ਰਹੇ
ਚਾਰੋ ਵੱਲ ਪਰਦੂਸ਼ਣ ਵਧਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ
ਨਵਾਂ ਨਵ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਫੈਲਾ ਰਿਹਾ
ਖਤਰੇ ਵਿੱਚ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵਣ ਦਾ ਜੀਵਨ
ਹੋਰੀ ਦਿਨ

ਜਨਤਾ ਜੋ ਇਸ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ
ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਪੈਦਾ ਕਰ ਰਹੇ
ਸਾਨੂੰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਤੋਂ ਨਿਜਲ ਹੋਣਾ ਪਵੇਗਾ
जनसंख्या के बढ़ने पर अंकुश लगाना गरिए
ਸਾਨੂੰ ਕੁਝ ਸੜਕ ਚੁੱਕਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ
ਛੋਟੇ ਪਰਿਵਾਰ, ਸੁਖੀ ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਨਾਰਾ ਲਗਨਾ

Population Day poems in English

We need more population
So no need to have atomic explosion
Why do we need tsunami and atomic radiation?
When there are enough hurdles for poverty alleviation

How will you interfere with God’s will?
When it will amount to criticism or religion’s kill
Who will make all the necessary propaganda?
When it is forgotten in our agenda

We are our own enemy
We need pray for it to almighty
We are not worried about population control
As it may bring our natural down fall

We have mastered the in burning grain
Rot them in open so as to be spoiled in rain
Why poor should get up to it?
Why should we remove their curse as glorious feat?

We will take all precautions not to do anything
Let population double and we be known for something
“Most populous country in world” to feel proud
Everything looks in order and economy looks very sound

We swallow not in million or billions
Let many corrupt are sent in jails or pavilions
We care for no sentiments or religions
We have strong alliance and firm allegiance

Poverty must stay in country as permanent feature
We must take all the relevant steps and assure
Let poor die of hunger and starvation
We will maintain harmony and relation

No one may raise even little finger
Public is looked upon as strangers
They come in picture only once in limited span
They have all the strategy to counter the plan

Let politicians fool no more
Let good people take over and explore
If tolerance is about cross its threshold
They will be wiped out once for all and loose the hold

We are duty bound and obey divine call
The bread and cloth must be provided to all
Let the strong warning be served on those violators
Who are responsible for crimes as instigators?

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